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स्वास्थ्य

मधुमक्खी का सरेस

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लेखक आर्य सागर खारी 🖋️

मधुमक्खी कमाल का कीट है।

कीट वर्ग में जितना अपने हैरतअंगेज कारनामों, रचना कौशल, बुद्धिमता ,संवेदनशीलता, सामाजिकता के कारण कीट विज्ञानियों अर्थात मानुष को सर्वाधिक आश्चर्यचकित मधुमक्खी ने ही किया है इतना शायद ही किसी अन्य कीट ने नहीं किया हो। एकबारगी मधुमक्खी भोजन का अभाव, मौसम की प्रतिकूलता सह सकती है लेकिन यह अकेलापन कदापि नहीं सह सकती मधुमक्खी का जीवन व्यक्तिगत जैसा कुछ नहीं होता यह सामूहिक जीवन जीती है प्रत्येक मधुमक्खी का जीवन अपने समूह पर कुर्बान होता है। यही कारण है मधुमक्खी के एक छत्ते में हजारों मक्खियां रहती है जिनमें एक रानी मक्खी जो हुकुम चलाती है संतति निर्माण करती है दूसरे आलसी नकारे डंक रहित कुछ सैकडों नर मक्खे तथा हजारों की संख्या में डंक युक्त श्रमिक मादा मक्खियां जो बांझ होती है। यह श्रमिक मक्खियां ही सर्वाधिक परिश्रमी त्यागी तपस्वी होती है यही छत्ते का निर्माण करती है यही बच्चों के लिए भोजन लाती है यही शहद तथा मॉम जैसे बेशकीमती गुणकारी पदार्थ का निर्माण करती हैं और यही काटती भी है लेकिन स्वभाववश नही केवल खतरा महसूस होने पर और फिर खुद भी डंक के स्थान पर घाव होने से दर्दनाक मौत मरती भी है। रानी मक्खी की उम्र 3 साल तक होती है वही इन श्रमिक मादा मधुमक्खियों की उम्र केवल 8 महीने होती है। मधुमक्खी केवल अपना जीवन बसंत ऋतु चैत्र माह से लेकर शरद रितु अक्टूबर तक ही जीती है। इन 6 महीनों में ही इनके जीवन में निर्माण विनाश मिलन संयोग प्रवास विस्थापन पुनर्वास जैसी घटनाएं घटित हो जाती है। इन्हीं छह महीनों के मध्य गर्मियों की विदाई के दौरान मधुमक्खी एक विशेष लसलसा चिपचिपा लाल भूरे गाढे पदार्थ का निर्माण करती है जिसे सरेस कहा जाता है अंग्रेजी में इसे प्रोपोलिस और बी ग्लू भी कहा जाता है। सरेस का निर्माण मधुमक्खी अपने मुख की लार से छत्ते के आसपास सैकड़ों वर्ष पुराने विभिन्न औषधीय गुणों से परिपूर्ण वृक्षों की छाल पर बनी हुई औषधीय गोंद की सहायता से करती है। मधुमक्खियों के लिए सरेस बेहद उपयोगी पदार्थ है। सरेस की सहायता से मधुमक्खी जहां छत्ते में शहद मॉम एकत्रित रहता है उन अष्टकोणीय कोशो की दीवारों का प्लास्टर करती है दरारों को भरती है अर्थात यह सीलेंट के तौर पर कार्य करता है। मधुमक्खी का छत्ता सरेस के इस्तेमाल से मजबूत तथा कंपन रोधी बनता है। सरेस छत्ते के अंदर की गर्मी को वातावरण के बाहर नहीं जाने देता यह ऊष्मा रोधी कार्य करता है क्योंकि सरदी मधुमक्खी के लिए जानलेवा होती है। सर्दिया ही वह समय होता है जब फूलों के ना खिलने से भोजन पराग की कमी हो जाती है मधुमक्खियां तेजी से मरती है। मधुमक्खी द्वारा निर्मित यह लाल भूरा चिपचिपा पदार्थ जबरदस्त एंटी बैक्टीरियल एंटी वायरल एंटी फंगल होता है क्योंकि इसमें दुर्लभ एंजाइम फ्लेवोनॉयड्स एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। 1 छत्ते में हजारों की संख्या में मधुमक्खियां रहती है लेकिन वह कभी भी परजीवी संक्रमण से नहीं मरती उसका कारण यह सरेस ही है क्योंकि यह छत्ते में किसी भी महामारी को नहीं फैलने देता इतना ही नहीं जब कोई छोटी छिपकली या मूसा छत्ते के आसपास मर जाता है तो मधुमक्खियां सरेस की सहायता से उसके सडते गलते मृत शरीर को ढक देती है छिपकली चूहे के शरीर की दुर्गंध वातावरण में नहीं फैल पाती यह उसे ममीफाई कर देती हैं और यदि कोई मधुमक्खी किसी अवांछित रोग कारक पदार्थ को गलती से छत्ते में ले आये हालांकि ऐसा होने की संभावना 1% होती है फिर भी ऐसा होने पर अन्य मधुमक्खियां उस पदार्थ को छत्ते के किसी अनुपयोगी हिस्से मे सरेस से ढक देती है।

सरेस के प्रयोग से मधुमक्खी को सोशल इम्यूनिटी मिलती है अर्थात सामाजिक प्रतिरक्षा आज सर्वाधिक अनुसंधान इसी पर हो रहा है। इंसान आज भी अपने शरीर से किसी ऐसे पदार्थ का निर्माण नहीं कर पाया है जिससे इंसानों के समूह को सामाजिक प्रतिरक्षा मिलती हो। लेकिन हम मनुष्य भीड़ में बीमारी जरूर फैलाते हैं। जब इंसानों का जिक्र चल पड़ा और इंसान हर चीज को कीमत पर तोलता है तो यहां यह बताना उल्लेखनीय होगा मधुमक्खी द्वारा निर्मित सरेस का बाजार मूल्य 5000 से लेकर ₹100000 प्रति किलो तक है। सरेस की औषधीय गुणवत्ता प्रभावशीलता इसका मूल्य छत्ते की स्थिति अर्थात मधुमक्खी का छत्ता कैसे लाभकारी औषधीय वृक्षों के बीच स्थित है इस पर निर्भर करता है क्योंकि मक्खियां सरेस का निर्माण वृक्षों की गोंद से ही करती है। लार ग्रंथि मॉम के मिश्रण की सहायता से।सरेस शरीर की क्रॉनिक ऑटोइम्यून इन्फ्लेमेटरी डिजीज जिसमें चमड़ी और हड्डी की सूजन सोरायसिस अर्थराइटिस जैसी रोगो में यह बेहद लाभकारी है। बर्न वाउंड अर्थात फुकने से हुए घाव को भरने में यह बेहद असरकारक है। मधुमेह के रोगियों में ऐसा घाव जो कभी ना भरता हो उसमें इसके लेप को लगाने से घाव चमत्कारी तौर पर ठीक हो जाता है। चीन के ग्रामीण लोग सदियो से इसका इस्तेमाल स्तन कैंसर की रोकथाम में भी कर रहे हैं तमाम आधुनिक शोधों में यह सिद्ध हो गया है इस में पाए जाने वाला पीनोकेम्बरीन रसायन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकता है। कोविड-19 कोरोना संक्रमण की रफ्तार को संक्रमित के शरीर में धीमा करने के लिए भी इस पर शोध हो रहा है। दुनिया की नामी फार्मास्यूटिकल कंपनियां सरेस का इसके इस्तेमाल कर टेबलेट कैप्सूल सिरप तीनों ही बना रही है। मधुमक्खियों द्वारा निर्मित सरेस बेहद अनूठा चमत्कारी आरोग्य वर्धक पदार्थ है । निसंदेह सरेस प्रथम तो मधुमक्खियों के लिए बेशकीमती गुणकारी विविध प्रयोगी है और फिर हम इंसानों के लिए।

आर्य सागर खारी ✍✍✍

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