सोनिया की चुप्पी में चीन की सी कुटिलता है तो मनमोहन सिंह की शालीनता और विनम्रता देश के लिए उनकी ‘ठेंगा नीति’ बन चुकी है। सोनिया मनमोहन सरकार के निर्णय पर तब तक चुप रहती हैं जब तक उनसे सरकार और मनमोहन सिंह की फजीहत होती हो, जैसे ही ये निर्णय सोनिया और उनके परिवार पर आंच पहुँचाने वाले बनने लगते हैं, वैसे ही सोनिया मुंह खोलने के लिए मजबूर होने लगती हैं। अमेरिका और अन्य ईसाई देशों के प्रति सोनिया का लचीला नजरिया जगजाहिर है। मनमोहन अमेरिका को लाभ पहुंचाएं और उसे देश चुप सहन कर जाये तो सोनिया गांधी के लिए इससे बढ़िया बात कोई नहीं हो सकती। एफडीआई के मामले में सोनिया की चुप्पी और मनमोहन की विनम्रता को पश्चिम बंगाल की शेरनी मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने चुनौती दी है। राष्ट्र में उनकी शक्ति और राजनीतिक मामलों में निर्णय लेने की उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति के सामने सरकार झुक गयी है। फलस्वरूप एफडीआई विषयक निर्णय को सरकार ने आम सहमति बनाने तक के लिए टाल दिया है।
ममता बैनर्जी ने देश की जनता के उस निर्णय को समझा है जिसे वह मनमोहन सरकार के खिलाफ ले चुकी थी। एफडीआई पर सरकारी नीति पर देश की पूरी जनता आसमत है, पर मनमोहन सिंह की विनम्रता कठोर तानाशाह की भांति देश की जनता की भावनाओं को कुचलती जा रही थी। वह बिलकुल लापरवाह होकर देश की हुकूमत की गाड़ी को चला रहे है। दुख की बात है कि उनकी गाड़ी की अधिकांश सवारियाँ भी नींद मे झटके ले रही हैं और एक दो मंत्रियो के अलावा कोई भी ‘जाग’ नहीं रहा है।
देश के जनमत की उपेक्षा लोकतंत्र को कलंकित करती है, और उसके संचलकों के लिए कब्र खोदने का काम किया करती है। मनमोहन सिंह इस सच को जानते हैं, पर वो यह भी जानते हैं कि सोनिया जी के आशीर्वाद से उन्होनें देश पर बहुत हुकूमत कर ली। फिर भी देश की जनता ने उन्हें ‘केयरटेकर’ से अधिक कुछ नहीं माना। अतः ऐसी जनता पर उन्हें गुस्सा आने लगा है। इसलिए वह हठी होकर शासन करने केई अपना “साहस’ मानने लगे हैं। जबकि यह साहस नहीं दुस्साहस है। दुस्साहसी लोग अभी भी जनप्रिय नहीं हो पते हैं। जनप्रिय वही लोग होते है जिनके जोश के साथ होश जुड़ा होता है। जोश और जिद्द का कोई रिश्ता नहीं है, जोश और विवेक का रिश्ता जरूर है। क्योकि विवेक व्यक्ति की दूरदर्शित से और ‘कर्तव्य बोध’ को स्पष्ट करता है। यदि मनमोहन की विनम्रता देश के लिए बेठेगी है। इसलिए लोग उन्हें पसंद नहीं कर रहे हैं। वह केयरटेकर इसलिए है कि वो किसी और के लिए काम कर रहे हैं, अपने लिए काम करने की तो उन्होनें कभी नहीं सोची। एफ॰डी॰आई पर आम सहमति बनाने की गलती भी वह न करें, अपितु जनमत का सम्मान करें। ममता दी ने उनकी लगाम मे झटका देकर शायद उन्हें यही ‘पैगाम’ दिया है इसके लिए ममता दी को धन्यवाद दिया ही जाना चाहिए।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betsat giriş
betpark giriş
betpark giriş
cratosroyalbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betsat giriş
betsat giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betsat giriş
betsat giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
casinolevant giriş
bettilt giriş
holiganbet giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş