काला ब्राम्हण ( गोविंदाचार्य ) और इंटरनल हिन्दू फाउंडेशन से अरविन्दो सम्मान मैने क्यो नहीं लिया* *गोविन्दाचार्य और इंटरनल हिन्दू फाउंडेशन   की ब्राम्हण यूनियनबाजी के प्रमाण लीजिये*

images (22)

*

====================

    आचार्य विष्णु हरि

कल्याण सिंह के शब्दों में काला ब्राम्हण गोविन्दाचार्य के इंटरनल हिन्दू फांउडेशन से मैंने अरविंदों पुरस्कार क्यों नहीं लिया? इसने मुझे अरविन्दो सम्मान देने की घोषणा की थी। इस संगठन से सम्मान नहीं लेने के पीछे के करण सनातन संहार में निहित हैं। सनातन के संहार में सिर्फ आयातित संस्कृति की हिंसक और एकमेव प्रव्ति ही नहीं लगी हुई है, बल्कि सनातन की आतंरिक संरचना ब्राम्हण यूनियनबाजी, बनिया दृष्टि भी लगी हुई हैं। ब्राम्हण सिर्फ अपने आप को ही ब्राम्हण मानता है और बनिया ब्राम्हणों का पालन हार है। बनियों के खून और पसीने की कमाई का असली मजा फर्जी और ब्राह्मण यूनियन बाजी से युक्त हिंदू संगठन, पुजारी और सेक्युलर संत, कथावाचक लेते हैं।
        इंटरनल हिन्दू संगठन गोविन्दाचार्य की ब्राम्हणवादी यूनियनबाजी है, दुकानदारी है और अपनी छिपी हुई लालशा को शांत करने की प्रवृति है। इंटरनल हिन्दू संगठन ने कभी नूपुर शर्मा का समर्थन किया था क्या , नूपुर शर्मा के पक्ष में बोला था क्या, नूंह में  हिन्दुओं को बंधक बना कर कत्लेआम करने की साजिश और करतूत के खिलाफ बोला था क्या, हरियाना के पचास से अधिक गांव हिन्दू विहीन कर दिये गये, के खिलाफ कभी बोला था क्या , पश्चिम बंगाल में लाखों हिन्दुओं को खदेड दिया गया, उनका धर्मातंरण हो रहा है के खिलाफ बोला था क्या, दिल्ली के दर्जनों महल्लों से हिन्दुओ को खदेडा जा रहा है के खिलाफ बोला है क्या , देश भर में दर्जनों हिन्दू एक्टिविस्टों को मौत का घाट उतार दिया गया के खिलाफ बोला है क्या ?
गोविन्दाचार्य का चरित्र चित्रण जरूरी है। जब कल्याण सिंह अपने संबोधन में गोविन्दाचार्य को काला ब्राम्हण कहते थे तो फिर मुझे भी गुस्सा आता था, क्रोध आता था, कल्याण सिंह की समझदारी पर अविश्वास होता था, उस समय तक मेरी ब्राम्हण यूनियनबाजी की समझ बहुत ही कमजोर थी और ब्राम्हणवाद को मैंने सनातन समृद्धि का प्रतीक मानता था, मेरी समझ नहीं थी कि अटल बिहारी वाजपेयी की तरह गोविन्दाचार्य का चरित्र और दर्शन भी ब्राम्हणवाद से मिला हुआ है। उल्लेखनीय है कि गोविन्दाचार्य भी दक्षिण के ब्राम्हण हैं।
        फिर मेरी ब्राम्हण यूनियनबाजी पर समझ विकसित हुई। समझदारी इसलिए विकसित हुई कि अटल बिहारी वाजपेयी और मुरली मनोहर जोशी दोनों कल्याण सिंह को देखना तक नहीं चाहते थे, इनकी विदाई चाहते थे। इस निमित गोविन्दाचार्य को जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। गोविन्दाचार्य दो काम कर रहे थे, एक वे उंची जाति के विधायकों को भड़का रहे थे और कल्याण सिंह के खिलाफ विद्रोह भी करा रहे थे, दूसरा काम यह कि वे कल्याण सिंह के खिलाफ मीडिया में खबरे भी प्रकाशित करा रहे थे। कल्याण सिंह के खिलाफ वाजपेयी के उम्मीदवार लालजी टंडन और कलराज मिश्र थे।लालजी टंडन और कलराज मिश्र ब्राम्हण होने के कारण भाजपा की राजनीति में चमक-दमक रखते जरूर थे पर उन दोनों की छवि कल्याण सिंह के सामने जीरो थी।  गोविन्दाचार्य के लाख कोशिशों के बावजूद कलराज मिश्र और लालजी टंडन की छबि नही ंचमक सकी थी।
          वाजपेयी और जोशी के साथ ही साथ गोविन्दाचार्य्र के आंखों के लिए कल्याण सिंह किरकिरी बने हुए थे। इन लोगों ने कल्याण सिंह को समाप्त करने के लिए बसपा और मायावती की दांव भी खेला था। फिर राजनाथ सिंह को खडा कर दिया गया, इस व्यक्ति को यूपी का अध्यक्ष बना दिया गया। राजनाथ सिंह जो विधान सभा का चुनाव भी पंसदीदा क्षेत्र से नहीं जीत सके थे वह राजनाथ सिंह न केवल वाजपेयी, जोशी बल्कि गोविन्दाचार्य के लिए आईकॉन बन गये थे। कभी कल्याण सिंह का पैर छूने वाला राजनाथ सिंह उन्हें आंख दिखाने लगा।
           दिल्ली में भाजपा के केन्द्रीय कार्यालय में गोविन्दचार्य ने कल्याण सिंह को सीधे धमकी पिलायी थी और कहा था कि आप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दीजिये, नही तो बर्खास्त कर दिया जायेगा। कल्याण सिंह ने इस्तीफा देना ही उचित समझा। इसके पूर्व गोविन्दाचार्य कुसुम राय तक दौड़ लगा चुके थे, कल्याण सिंह को इस्तीफा दिलाने के लिए मदद करने पर राज्यसभा का सदस्य बनाने का पाशा फेंका गया था। बाद में इसी समझौते के तहत कुसुम राय राज्यसभा की सदस्य बनी थी।
राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भाजपा उस काल में गर्त में समायी थी। वैसी पराजय किसी ने सोची भी नहीं थी।
             गोविन्दाचार्य ने बिहार में भी ऐसी ही चाल चली थी। इंदर सिंह नामधारी को प्रदेश अध्यक्ष से इसी कारण हटवाने की साजिश रची थी कि गोविन्दाचार्य के स्वागत के लिए स्टेशनों और हवाई अड्डे तक उपस्थित नहीं रहते थे। इंदर सिंह नामधारी ब्राम्हण होते तो गोविन्दाचार्य कभी भी उन्हें पार्टी से नहीं निकलवाते। हरियाणा के नेता रामविलास शर्मा की शिकायत पर तत्कालीन हरियाणा प्रदेश के संगठन मंत्री जगदीश मित्तल को भाजपा से बाहर किया गया था, शिकायत यह थी कि जगदीश मित्तल ब्राम्हण विरोधी हैं और रामविलास शर्मा को प्रभावशाली नेता नहीं बनने देना चाहते हैं। उमा भारती प्रकरण भी उल्लेखनीय है। गोविन्दाचार्य ने उमा भारती की राजनीतिक कैरियर को प्रभावित किया था। लोग कहते हैं कि गोविन्दाचार्य, पत्रकार प्रभाष जोशी और रामबहादुर राय ने उमा भारती को भाजपा छोडने और अलग पार्टी बनाने की सलाह दी थी। प्रभाष जोशी संघ और भाजपा की जानी दुश्मन थे और इन दोनों संगठनों को प्रभाष जोश सांप्रदायिक कहते थे, राम बहादुर राय पत्रकारिता में प्रभाष जोशी को गुरू मानते थे, चन्द्रशेखर और वीपी सिंह के दरबारी थे फिर भी मोदी के राज में रामबहादुर राय ब्राम्हण यूनियनबाजी के कारण माल चाभ रहे हैं।
             अति महात्वाकांक्षा के कारण भाजपा से गोविन्दाचार्य की विदाई हुई, ब्राम्हण सिरोमनी अटल बिहारी वाजपेयी ने गोविन्दाचार्य को पार्टी से निकलवा कर बाहर कर दिया। लेकिन फिर इन्होंने एक पिछडी जाति से आने वाली उमा भारती का राजनीतिक कैरियर बर्बाद कर दिया। अगर उमा भारती भाजपा नहीं छोडती और अलग पार्टी नहीं बनाती तो वह नरेन्द्र मोदी की जगह प्रधानमंत्री भी बन सकती थी, क्योंकि अटल, आडवाणी के बाद उमा भारती का योगदान सर्वश्रेष्ठ रहा है, उमा भारती के आग उगलते भाषणों ने भाजपा की जनाधार बनाया था।
             गोविन्दाचार्य फिर ब्राम्हण कल्याण में लग गये। अपने नाम के नीचे कई संगठन खडे कर रखे हैं, जो सीधे तौर ब्राम्हणवाद को चमका रहे हैं।इंटरनल हिन्दू फांउडेशन के संचालकों को ही देख लीजिये, इनकी जमा पूंजी सनातन नहीं है, इनकी जमा पूंजी जातिवाद ही है। संजय शर्मा ब्राम्हण हैं। एक दाढी वाला पवन श्रीवास्तव सरकारी कर्मचारी से सेवानिवृत हैं, कभी ये संघ-भाजपा विरोधी थे, बाद में बुढापा खफाने के लिए गोविन्दाचार्य के शरण में डूब गये।
          इंटरनल हिन्दू फाउंडेशन हाथी के दांत से ज्यादा कुछ भी नहीं है। इसमें उंची जातियों का वर्चस्व है। इनके पदाधिकारियों और प्रतीकों की सूची देंखेगे तो उसमें दलित और पिछडों की जगह नहीं है या फिर बहुत सीमित है। अभी भी अरविन्दों पुरस्कार पाने वाले अधिकतर लोग उंची जाति के लोग ही थे। अगर अध्ययण करेंगे तो पायेंगे कि अरविन्दो पुरस्कार पाने वाले अधिकतर लोगों की पहचान हिन्दुत्व संरक्षक और अभियानी की रही ही नहीं है।
         गोविन्दाचार्य जैसे लोगों के हिन्दू संगठन यह सोचते नहीं कि ब्राम्हण यूनियबन बाजी से सनातन बचने वाला नहीं है। सनातन की अभी घूकधूकी बची है उसके पीछे दलितों और पिछडों की भूमिका है। गुजरात दंगों में विधर्मियों से सामना करने वाला ब्राम्हण या फिर उंची जाति के लोग नहीं थे बल्कि दलित और आदिवासी थे। पश्चिम उत्तर प्रदेश में जब भी दंगा हुआ तब सनातन की रक्षा करने वाले खटिक जाति रही है जिसे ब्राम्हण यूनियनबाजी ने अक्षूत करार दिया है। देश भर में जहां भी दंगा होता है वहां सनातन की रक्षा करने वाले दलित और पिछडे वर्ग के लोग ही होते हैं। पर्व-त्यौहारों पर सड़कों पर खुशी मनाने वाले, कावड लेकर चलने वाले अधिकतर दलित और पिछडे वर्ग के लोग ही होते हैं।
         गोविन्दाचार्य के विभिन्न संगठनों और अन्य हिन्दू संगठनों का सर्वे कर लीजिये सिर्फ और सिर्फ ब्राम्हण यूयियनबाजी ही मिलेगी। हाथ के दांत की तरह ही दलितों और पिछडों की उपस्थिति मिलगी। जबकि देश में ब्राम्हणों और उंची जातियों की संख्या कितनी है? नीतीश कुमार ने बिहार में जनगणना कर दिया, ब्राम्हण यूनियनबाजी बेपर्द हो गयी। नरेन्द्र मोदी के कारण दलित और पिछडों की बगावत नहीं हो रही है। अगर नरेन्द्र मोदी को परचम नहीं होता तो फिर भाजपा और हिन्दू आधारित संगठन बैमौत मरते। कांग्रेस का राज अपराजय होता। इसके अलावा विधर्मियों की जीत और वर्चस्व खतरनाक तौर पर चलता रहता।
         ब्राम्हण यूनियनबाजी के पालनहार बनिये हैं। मूर्खता में ये ब्राम्हणों का पालनहार बन जाते हैं, ब्राम्हण यूनियनबाजी का घिनौना चेहरा गोविन्दाचार्य हों, या फिर मंदिरों के पूजारी, कथा वाचक या फिर गौशाला संचालक, सबके सब बनियों के पैसे पर चलते हैं। अगर बनिये पैसे नहीं दे तो फिर सनातन के नाम पर चलने वाली ब्राम्हण यूनियनबाजी बेमौत मरेगी। पैसा तो सबके पास है पर सनातन की सुरक्षा में पैसा सिर्फ बनिया ही लगाते हैं। अडानी-अंबानी और जाटो की खरबपति को देखिये और विडला परिवार को देख लीजिये, तुलनात्मक अध्ययण कर लीजिये।
       मैं हिन्दुत्व का प्रहरी हूं। किसी फर्जी और ब्राम्हण यूनियनबाजी से युक्त संगठन से कोई सम्मान कैसे ले सकता हूं, मैं तो जाति तोडो और सनातन बचाओ अभियान का सारथी हूं। नरेन्द्र मोदी के कारण हिन्दुत्व बचा हुआ है, जिस दिन नरेन्द्र मोदी सरकार का पतन हुआ उस दिन भाजपा से दलित, पिछडे, कमजोर बनियों का नाता भी टूट जायेगा, ये अलग हो जायेंगे। ऐसी स्थिति में विख्यात और अविख्यात सहित सभी हिन्दू संगठन बेमौत मारे जायेंगे, फिर मतलबी ब्राम्हण भी दूसरे हरे-भरे पेड पर चला जायेगा। इसीलिए मैंने काला ब्राम्हण गोविन्दाचार्य के ब्राम्हण यूनियनबाजी और पैसे की दुकानदारी से युक्त इंटरनल हिन्दू फाउंडेशन से अरविन्दो सम्मान नहीं लिया।

===================

संपर्क
आचार्य विष्णु हरि

मोबाइल   9315206123

<

ul>

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
Casinolevant Giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş