मुसलमानों का सेकुलरिज्म एक साजिश है !

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आजकल मुसलमान भी कांग्रेसियों के साथ मिलकर सेकुलरिज्म की वकालत करने लगे हैं , और सामान्य हिन्दू ऐसा मने लगे हैं कि यह लोग देश में धर्म के आधार पर होने वाले विद्वेष और दंगों पर रोक लगा कर आपसी सौहार्द फैलाना चाहते हैं , लेकिन बहुत कम लोग मुसलमानों और कांग्रेसियों की छुपी हुई साजिश से अभी तक अनभिज्ञ है . क्योंकि इन दौनों का एक ही उद्देश्य है , लोग अभी तक समझ सके कि जो मुसलमान समाज और राजनीति की व्यवस्था इस्लामी कानून के मुताबिक चलने के पक्षधर रहे हैं , उनको अचानक सेकुलरिज्म ख्याल कहाँ से और क्यों अच्छा लगने लगा ? जबकि सेकुलरिज्म और इस्लाम एक दूसरे के विपरीत और परस्पर विरोधी हैं .
इस शंका को दूर करने और मुसलमानों और कांग्रेसियों की साजिश का इस लेख में भंडाफोड़ किया जा रहा है ,
इतिहास गवाह है कि शुरुआत में भारत में जितने भी मुस्लिम हमलावर आये थे धन सम्पदा लूट कर अपने देश लौट गए थे , लेकिन बाद में जितने मी मुस्लिम आक्रमणकारी आये थे उनकी यही इच्छा थी कि वह भारत को इस्लामी देश बना दें , ताकि उनकी औलादें पीढ़ी दर पीढ़ी इस देश पर हुकूमत करती रहें . भारत को इस्लामी देश बनाने के लिए मुगलों ने कई हथकंडे अपनाये , जैसे युद्ध , जबरन धर्म परिवर्तन इत्यादि , लेकिन , जब राणाप्रताप जैसे हिन्दू देश भक्तों ने उसकी योजना सफल नहीं होने दी तो पहले अकबर ने सन 1582 ई ० में सेकुलरिज्म का अविष्कार किया था . जिसका नाम उसने ” दीने इलाही – دین الهی‎ ” रखा था , और उसमे सभी धर्मों कि बातों को शामिल किया था .अकबर की योजना थी कि वह हिंदुओं को विभाजित कर दे , यानि एक तरफ अकबरी सेकुलर वाले और दूसरी तरफ देशभक्त हिन्दू हो जाएँ , ताकि गद्दार सेकुलरों की मदद से बाकी हिंन्दुओं पर अपनी हुकूमत मजबूत कर सके और उसका वंश हमेशा भारत पर राज कर सके , लेकिन बाद में शिवाजी और गुरु गोविन्द सिंह जैसे महान योद्धाओं ने अकबरकी भावी योजना पर पानी फेर दिया .
फिर जब देश में कांग्रेसी सरकार आयी तो उसने भी अकबर वही नीति फिर से अपनायी , अर्थात हिंदुओं को दो भागों में बाँट दिया , एक तरफ तथाकथित सेकुलर और कांग्रेस के पिट्ठू , और दूसरी तरफ देश भक्त संगठन जैसे आर एस एस , विश्व हिन्दू परिषद् ,हिन्दू महा सभा , और अकाली दल इत्यादि , जिन्हें कांग्रेसी सम्प्रदायवादी बताते है , कांग्रेस चाहती है कि हिन्दू विरोधी सेकुलरो मदद से नेहरु गांधी वंश भारतपर क़यामत तक राज करता रहे , चूँकि जैसे अकबरी सेकुलरिज्म का उद्देश्य हिन्दू विरोध था उसी तरह कांग्रसी सेकुलरिज्म का आधार भी हिन्दू विरोध ही है , यही कारन है कि मुसलमान सेकुलर बन कर हिंदुओं पर आतंकी होने का आरोप लगाते रहते हैं , वर्ना सेकुलरिज्म और इस्लाम एक दूसरे के इतने विरोधी है कि खुद को सेकुलर बताने वाला मुस्लमान काफिर माना जायेगा ,

1-सेकुलरिज्म के बारे में इस्लाम का दृष्टिकोण
सऊदी अरब के इस्लामी विद्वान् “सलमान बिन फहद बिन अब्दुल्लाह अल ऊदा – سلمان بن فهد بن عبد الله العودة‎” जिनको “सलमान ऊदा -سلمان العودة‎), ” भी कहा जाता है ,जिनका जन्म 1955 में हुआ था . जो मुस्लिम विद्वानों की अंतराष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष (President of the International Union for Muslim Scholars ) हैं . अपनी किताब “Islamic Views about Secularism ” में लिखा है कि , सेकुलरजम का अरबी में अर्थ ” अल मानिया -علمانية
” होता है यानि “भौतिकवाद ” होता है . जो नास्तिकता का एक प्रकार है .ऊदा ने लिखा है कि इस बात में कोई शक नहीं कि सेकुलरिज्म और इस्लाम हर प्रकार से परस्पर विरोधी हैं , यह ऐसे दो विपरीत मार्ग कि तरह हैं जो किसी भी जगह एक दूसरे पर नहीं मिलते . यानि एक रास्ते पर चलने के लिए दूसरा रास्ता छोड़ना जरूरी होता है . इसलिए जो भी व्यक्ति सेकुलरिज्म को अपनाता है उसे इस्लाम छोड़ना होगा . और जो मुसलमान होगा उसे सेकुलरिज्म त्याग देना चाहिए

“There is no doubt that secularism contradicts Islam in every aspect. They are two different paths that never meet; choosing one means rejecting the other. Hence, whoever chooses Islam has to reject secularism.

ऊदा ने सेकुलरिज्म के विरुद्ध दो तर्क पेश किये हैं ,

1-यह हराम बातों को हलाल बनाता है
पहली बात यह है कि सेकुलरिज्म मुसलमानों के लिए अनिवार्य अल्लाह के कानून ” शरीयत -شريعة‎ ” के खिलाफ है , क्योंकि सेकुलर व्यवस्था मूल धन पर ब्याज लेने पर चलती है , जबकि अल्लाह ने कहा है ” हे ईमान वालो अल्लाह से डरो , और किसी पर जोभी ब्याज ( रिबा – الربوآ ) the Usury बाकी हो। उसे छोड़ दो . यदि तुम वाकई ईमान वाले हो “सूरा -बकरा 2:278 . इसी तरह सेकुलरिज्म शराब के व्यवसाय को कमाई का साधन मानता है .

2-यह साफ़ तौर से कुफ्र है
दूसरी बात यह है कि सेकुलर न्याय व्यवस्था में मनुष्य खुद अपने ही बनाये कानूनों से अपने बारे में फैसला करता है , जबकि कुरान में कहा है ” क्या यह लोग कुफ्र वालों का फैसला पसंद करते हैं ? जान लो कि ईमान वालों के लिए अल्लाह से अच्छा फैसला करने वाला कौन हो सकता है ? सूरा – मायदा 5:50 .(“Do they seek a judgment of Ignorance? But, who, for a people whose faith is assured, can give better judgment than Allah?”-maaidaa -5:50
इसका मतलब है कि स्कुलरिम मुस्लिमों पर अपने ही कानून थोपता है . और अल्लाह के कानून को गलत मानतेहै , जो सरासर कुफ्र है

इनके अतिरिक्त सलमान ऊदा ने अपनी किताब में कई मुद्दों पर कुरान के हवाले देकर साबित किया है कि सेकुलरिज्म और इस्लाम में कोई तालमेल नहीं हो सकता , और किसी मुसलमान द्वारा खुद को सेकुलर बताना इस्लाम त्यागने के बराबर है . और शरीयत के अनुसार सेकुलर मुसलमान को मौत की सजा देना चाहिए . ऊदा ने कुरान के जो हवाले दिए हैं उन से कुछ यहाँ दिए जा रहे हैं , इन आयतों में बताया गया है कि मनुष्यों द्वारा बनाया गया संविधान और कानून “इस्लामी कानून -اسلامی قانون”यानी शरीयत के खिलाफ और मुसलमानों के लिए बेकार हैं .

“Shari`a is the body of Islamic law. The term means “way” or “path”; it is the legal framework within which the public and some private aspects of life are regulated for those living in a legal system based on Muslim principles of jurisprudence.”(Extracted from:Secularism And Islam)

1-” जो लोग उन नियमों के अनुसार फैसला नहीं करते जो अल्लाह ने उतारा हो ( शरीयत ) तो बेशक वही लोग काफिर हैं ”
सूरा – मायदा 5:44
चूँकि सेकुलर अल्लाह की शर्रियत की जगह मानव निर्मित कानून और संविधान को मानते है , इसलिए वह मुसलमान नहीं हो सकते .

2-” वह लोग ( सेकुलर ) दावा तो करते हैं कि वह उस पर ईमान रखते हैं ,जो अल्लाह ने उतारा है , लेकिन वह फैसले करने के लिए “ताग़ूत -الطاعوت ” के पास जाते हैं . सूरा -निसा -4:60
नोट- इस्लाम से पहले अरब में ताग़ूत नामका देवता था , जिसके नाम से पुजारी फैसले किया करते थे . इस आयत का भावार्थ है कि सभी निर्णय इस्लामी कानून के अनुसार होना चाहिए .

3-” जिन लोगों ने ताग़ूत का अनुसरण किया , अल्लाह ने अपने प्रकोप से उनको बन्दर और सूअर बना दिया ” सूरा – मायदा 5:60

4-“हमने यह ऐसी किताब उतारी है ,जो हरेक विषय के बारे में खोल खोल कर बयान करने वाली है ,और मुसलमानों के लिए मार्ग दिखाने वाली है ”
सूरा – नहल 16:89

अर्थात कुरान के अलावा किसी भी किताब के मुताबिक निर्णय करना हराम है , चाहे वह संविधान हो या भारतीय दंडसंहिता ही क्यों न हो .
5-“हे नबी तुम इन लोगों से पूछो कि, तुम अधिक जानते हो कि अल्लाह ? सूरा -बकरा 2:140
इस आयत का तात्पर्य है कि केवल अल्लाह की दीगयी किताब ( कुरान ) के आधार पर बनाये गए नियम और कानून ही परिपूर्ण हैं , और मनुष्यों द्वारा बनाये सभी नियम कानून त्रुटिपूर्ण हैं . और लोग सेकुलरिज्म के नाम पर उनका समर्थन करते है , या पालन करते हैं वह मुस्लिम नहीं हो सकते , बल्कि मुनाफ़िक़ यानी कपटी और धोखेबाज है क्योंकि , यही कारण हैं कि मुसलमानों में सेकुलरिज्म का आह्वान करना इस्लाम से इंकार करना है ,

“secularism among Muslims is atheism and a rejection of Islam. ”

” انِّ العالمنيه بين المسلمين الالحادوالكفر ”

“इन्ना अल अलमानियाह अल इल्हाद वल कुफ्र ”
6-मुसलमान सेकुलरिज्म समर्थक क्यों बन गए ?

सब जानते हैं कि मुसलमान अपने कट्टर विचारों के लिए कुख्यात है , और अपनी धार्मिक मान्यताओं में रत्ती भर भी बदलाव पसंद नहीं करना चाहते , और इतने मूर्ख भी नहीं है कि इतना जानने के बावजूद सेकुलरिज्म की वकालत करने लगे . इसका जवाब हमें एक लंगड़े और अंधे की कहानी से मिलता है , जो हमने बचपन में पढ़ी थी . जो इस प्रकार है , एक अंधे और लंगड़े को पास के गाँव तक जाना था , इसलिए अंधे ने लंगड़े को कंधे पर बिठा लिया , लंगड़ा रास्ता बताता रहा और अँधा चलता रहा , इस तरकीब से दौनों उस गाँव तक पहुँच गए ,
आज कांग्रेस सरकार सत्ता के लालच में अंधी हो गयी है , और मोदी ने जिहादी शक्तियों की टाँगे लंगड़ी कर दी है , इसलिए लंगड़ी जिहादी ताकतें अंधी कांग्रेस के कंधे पर सवार होकर सत्ता की कुर्सी पर चढ़ने का मंसूबा बना रहे है , मुसलमानों की योजना है कि पहले कांग्रेस और सेकुलरों की मदद से हिंदुओं को कमजोर किया जाये , और जब मुस्लिम बहुमत हो जाये तो कांगरस को भी रास्ते से हटा कर भारत में इस्लामी राज स्थापित कर दिया जाए ,

मुसलमानों के सेकुलरिज्म का यही रहस्य है , जिसका आज भन्डाफोड़ कर दिया है , ताकि सभी देशभक्त सचेत हो जाएँ !

(200/176)

ब्रजनंदन शर्मा

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