ओ३म् -वैदिक साधन आश्रम तपोवन का पांच दिवसीय शरदुत्सव सोल्लास सम्पन्न- वेद ईश्वरीय ज्ञान होने से मानवमात्र का धर्मग्रन्थ हैः उमेशचन्द्र कुलश्रेष्ठ

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वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून का पांच दिवसीय शरदुत्सव दिनांक 8 अक्टूबर 2023 को सोल्लास सम्पन्न हुआ। शरदुत्सव में सम्मिलित प्रमुख विद्वान स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती, साध्वी प्रज्ञा जी, आचार्या डा. प्रियवंदा वेदभारती, पं. सूरतराम शर्मा जी, श्री विजय गोयल जी, श्री अनुज शास्त्री जी, स्वामी योगेश्वरानन्द सरस्वती, आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी, डा. धनन्जय आर्य जी, श्री जगत वर्मा जी जालन्धर, श्री शैलेश मुनि शास्त्री जी हरिद्वार, श्री सुशील भाटिया जी चण्डीगढ, पं. वेदवसु शास्त्री, महात्मा आर्यमुनि जी एवं श्रीमती मीनाक्षी पंवार जी आदि थे। उत्सव में प्रतिदिन प्रातः 6.30 बजे से 9.00 बजे तक सन्ध्या एवं यज्ञ का आयोजन हुआ करता था। यज्ञ की ब्रह्मा कन्या गुरुकुल, नजीबाबाद की विदुषी आचार्या डा. प्रियम्वदा वेदभारती जी थी। उनके साथ उनके गुरुकुल की पांच कन्यायें भी आयीं थीं जो सन्ध्या एवं यज्ञ के मन्त्रोच्चारण करती थीं। यज्ञ की ब्रह्मा का यज्ञ के मध्य में संक्षिप्त निर्देश एवं प्रवचन भी हुआ करता था। उनके पृथक से भी कई उपदेश वा प्रवचन इन पांच दिवसीय आयोजन में हुए। प्रातः 10.00 बजे से 12.00 बजे तक भजन एवं उपदेशों सहित युवा सम्मेलन, महिला सम्मेलन योग एवं उपासना सम्मेलन तथा विद्यालय सम्मेलन आदि के आयोजन भी सम्पन्न किये गये। भोजनावकाश के बाद अपरान्ह 3.00 बजे से पुनः यज्ञ का आयोजन किया जाता था। यज्ञ के अनन्तर भी भजन एवं वैदिक विद्वान पं. उमेशचन्द्र कुलश्रेष्ठ एवं आचार्या डा. प्रियंवदा वेदभारती जी के उपदेश हुआ करते थे। कार्यक्रम समाप्त होने से पूर्व सन्ध्या का आयोजन किया जाता था। रात्रि 7.00 बजे से 9.00 बजे तक भजन एवं प्रवचन आयोजित किये जाते थे। एक दिन संगीत सन्ध्या का आयोजन भी किया गया। सभी आयोजनों में पं. जगत वर्मा, जालन्धर, महात्मा आर्यमुनि जी तथा श्रीमती मीनाक्षी पंवार जी आदि के गीत वा भजन हुआ करते थे। सभी आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न किये गये।

रविवार दिनांक 8-10-2023 को समापन समारोह हुआ। इस आयोजन में प्रातः 6.30 बजे से सन्ध्या एवं यज्ञ का सम्पादन किया गया। यज्ञ की पूर्वाहुति हुई। स्वामी चित्तेश्वरानन्द जी एवं साध्वी प्रज्ञा जी सहित अनेक विद्वानों ने इस सभा को सम्बोधित किया और अपने अनुभव श्रोताओं से साझा किए। समापन कार्यक्रम आश्रम के मुख्य सभागार में प्रातः 10.00 बजे से आरम्भ किया गया जिसका कुशल संचालन आर्यसमाज के उच्च कोटि के विद्वान, उपदेशक एवं वेद-धर्म प्रचारक पं. शैलेशमुनि सत्यार्थी जी ने बहुत ही योग्यतापूर्वक किया। समापन समारोह के आरम्भ में जालन्धर से पधारे आर्यसमाज के प्रसिद्ध भजनोपदेशक पं. जगत वर्मा जी के दो भजन हुए। पहले भजन के बोल थे ‘कौन कहे तेरी महीमा कौन कहे तेरी माया’ तथा दूसरे भजन के आरम्भ के शब्द थे ‘मेरी मां शेरों वाली है, मेरी मां शेरों वाली हैं’। सभी श्रोताओं ने इन भजनों को दत्तचित्त होकर एकाग्रता से सुना और सराहा। भजन की समाप्ति पर आश्रम के प्रधान एवं अन्य अधिकारियों द्वारा वर्मा जी को शाल ओढ़ा कर एवं दक्षिणा राशि देकर सम्मान किया गया। इस अवसर एक सामूहिक चित्र भी लिया गया। कार्यक्रम के संचालक महोदय ने सूचना दी कि देहरादून में विगत एक सौ वर्ष से संचालित आचार्य रामदेव जी द्वारा संस्थापित कन्या गुरुकुल का आगामी 7 व 8 नवम्बर, 2023 को शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है जिसमें सभी आर्य बहिनों एवं भाईयों को आमंत्रित किया गया है। सभी को आयोजन में सम्मिलित होने की प्रेरणा की गई। कार्यक्रम में कन्या गुरुकुल की आचार्या सन्तोष आर्या जी उपस्थित थीं।

आयोजन में आगामी कार्यक्रम के अन्तर्गत देहरादून के आर्य अधिवक्ता श्री राजेन्द्र कुमार काम्बोज, जो आश्रम, गुरुकुल पौंधा एवं अन्य आर्यसंस्थाओं से निकटता से जुड़े हैं एवं इन्हें अपना परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, अभिनन्दन किया गया। श्री राजेन्द्र काम्बोज जी को एक अभिनन्दन पत्र फोटो फे्रम कराकर भेंट किया गया। उन्हें स्थानीय आर्यसमाजों के प्रतिनिधियों ने पुष्प मालायें पहनाईं। आश्रम के प्रधान जी ने उन्हें शाल ओढ़ाई। आश्रम की ओर से उन्हें ऋषि दयानन्द का एक बड़ा एवं भव्य चित्र भी भेंट किया गया। अभिनन्दन के पश्चात श्री राजेन्द्र काम्बोज जी ने सभा को सम्बोधित करते हुए अपने जीवन के कुछ अनुभव श्रोताओं से साझा किए और आश्रम के श्रोताओं का धन्यवाद किया। इसके पश्चात आचार्य रामदेव कन्या गुरुकुल, देहरादून की कन्याओं का एक भजन हुआ जिसके बोल थे ‘एक ओ३म् नाम सबसे प्यारा’।

कार्यक्रम में द्रोणस्थली कन्या गुरुकुल की विदुषी आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी भी विद्यमान थीं। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि महर्षि दयानन्द ने संसार को वेदों का सन्देश दिया है। उन्होंने हमें वेदेमार्ग का परिचय दिया। वेदों में ईश्वर, जीवात्मा तथा सृष्टि का सच्चा स्वरूप उपलब्ध होता है। वेदों से ही संसार की सब समस्याओं का समाधान हो सकता है और शान्ति स्थापित हो सकती है। वेदों का सन्देश है कि संसार के मनुष्य एक समान हैं। परमात्मा का मुख्य एवं निज नाम उन्होंने ओ३म् को बताया। उन्होंने कहा कि वेद अनुचित हिंसा का समर्थन नहीं करते। अविद्या सारे पापों की जननी हैं। उन्होंने कहा कि जो पदार्थ जैसा है, उसको वैसा न जानना, उससे विपरीत जानना व मानना अविद्या कहाती है। आचार्या जी ने कहा कि यदि हम सत्य मार्ग पर नहीं चलेंगे तो इससे हमारा पतन होगा। विदुषी आचार्या जी ने कहा कि अशान्त मनुष्य सुख को प्राप्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि वेदों का सन्देश है कि धरती हमारी माता है और हम इसके पुत्र एवं पुत्रियां हैं। ईश्वर का सन्देश है दूसरों से द्वेष मत करो। आचार्या जी ने कहा कि हम विद्वानों से वेदों की जो शिक्षायें सुनते हैं उन्हें हमें अपने जीवन में धारण करना चाहिये। अपने वक्तव्य को विराम देते हुए उन्होंने कहा कि यदि हम वेद और ऋषि दयानन्द के सन्देश को जानेंगे और उसे अपनायेंगे तो विश्व में शान्ति स्थापित होगी। कन्या गुरुकुल, नजीबाबाद की पांच कन्याओं ने अपनी सुमधुर वाणी से ऋषि दयानन्द जी पर एक भजन प्रस्तुत किया जिसके आरम्भ के शब्द थे ‘दयानन्द देव हम जीवन विमल अपना बना लेवें’। भजन को सभागार में सभी श्रोताओं ने पसन्द किया।

कन्या गुरुकुल, नजीबाबाद की विदुषी आचार्या डा. प्रियम्वदा वेदभारती जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज का विषय है विश्व शान्ति में महर्षि दयानन्द जी का योगदान। उन्होंने कहा वर्तमान समय में विश्व में सर्वत्र अशान्ति है। इस समय विश्व अनेक ज्वलन्त समस्याओं से जूझ रहा है। आचार्या जी ने विश्व की सबसे बड़ी समस्या आतंकवाद को बताया। उन्होंने कहा कि धर्मान्तरण भी एक बड़ी समस्या है। विदुषी आचार्या जी ने ईसाई एवं मुस्लिम सम्प्रदाय के कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह भोलेभाले लोगों को भ्रमित कर उनका मतान्तरण करते हैं। बहिन जी ने कहा कि हम अभय तब तक नहीं हो सकते जब तक देश व विश्व में अभय का वातावरण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भय के वातावरण में हमें कार्य करना पड़ रहा है। धर्मान्तरण का उल्लेख कर उन्होंने कहा कि विधर्मी सर्वत्र छा रहे हैं। नैतिक मूल्यों का क्षरण भी देश व विश्व की एक प्रमुख समस्या है। हमें देश की युवा शक्ति को जाग्रत करना होगा। आर्यसमाज की शीर्ष विदुषी आचार्या डा. प्रियम्वदा जी ने कहा कि हम ब्राह्म शक्ति का उत्थान कर ही विश्व की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। आचार्या जी ने मोदी जी एवं योगी जी का उल्लेख कर उनके कार्यों की प्रशंसा की। अपने वक्तव्य को विराम देते हुए उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान भाषाणों से नहीं होगा। इसके लिए हमें क्रियात्मक रूप से कार्य करना होगा।

शरदुत्सव के समापन दिवस आयोजन में आश्रम को प्रचुर आर्थिक सहयोग करने वाले श्री सत्यप्रकाश गोयल जी के सुपुत्र श्री दीपक गोयल जी का सम्मान भी किया गया। श्री दीपक गोयल हैदराबाद की एक साफ्टवेयर कम्पनी में एक्जीकुटिव डायरेक्टर हैं और अपने पिता के दान व स्वाध्याय आदि गुणों से युक्त हैं। श्री दीपक जी ने अपने सम्बोधन में आश्रम के अधिकारियों तथा श्रोताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने आर्यसमाज के जनहितकारी कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आर्यसमाज शिक्षा के क्षेत्र में अगणित लोगों की सहायता कर रही है। उन्होंने बताया कि वह भी आश्रम के विद्यालय को अपनी कम्पनी के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने आश्रम की उन्नति की कामना भी की।

साध्वी प्रज्ञा जी ने अपने सम्बोधन में ओ३म् का उच्चारण कराया। उन्होंने स्वलिखित कविताओं का पाठ किया। उन्होंने कहा कि सभी मतों को सर्वस्वीकार्य विषयों में एक मत होकर सहयोग करना चाहिये। आर्यसमाज को इसके लिए प्रयास करने की उन्होंने प्रेरणा की। उन्होंने कहा कि जब सब मत सर्वमान्य विषयों में एकमत होकर सहयोग करेंगे तभी विश्व में शान्ति हो सकती है। इसके बाद उन्होंने अपनी कुछ और स्वलिखित कविताओं का पाठ किया।

आर्यसमाज के शीर्ष विद्वान पं. उमेश चन्द्र कुलश्रेष्ठ जी ने कहा कि वेद ईश्वरीय ज्ञान होने से मानवमात्र का धर्मग्रन्थ है। यह बात ऋषि दयानन्द जी ने हमें बताई है। श्री कुलश्रेष्ठ ने कहा कि नारियों को गुरुकुलीय शिक्षा देकर इनकी सार्वत्रिक उन्नति सम्भव है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों में शुद्धि आन्दोलन चलाने की प्रेरणा की। उन्होंने कहा कि देश भर में हिन्दी का प्रयोग किया जाना चाहिये। आचार्य कुलश्रेष्ठ जी ने बताया कि ऋषि दयानन्द ने अपने जीवन में लगभग पन्द्रह हजार पृष्ठों की पाठ्य सामग्री हमें प्रदान की है। उन्होंने आगे कहा कि ऋषि दयानन्द ने अपने जीवन में लगभग तीन हजार उपदेश देश के लोगों को दिए थे। विद्वान वक्ता ने कहा कि देश से जन्मना जातिवाद समाप्त किया जाना चाहिये। आचार्य कुलश्रेष्ठ जी के अनुसार वेदों के स्वाध्याय से संसार से अविद्या को दूर किया जा सकता है। उन्होंने श्रोताओं से निवेदन किया कि वह सब नियमित स्वाध्याय करने की आदत डालें। कार्यक्रम में वागेश्वर से पधारे आर्यनेता श्री गोविन्द सिंह भण्डारी जी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अन्त में आश्रम के प्रधान श्री विजय गोयल जी ने सभी श्रोताओं का धन्यवाद किया। समापन समारोह का आयोजन शान्ति पाठ के साथ समाप्त हुआ। इस वर्ष दिल्ली सहित देश के अनेक भागों से बड़ी संख्या में वैदिक धर्मी और आश्रम प्रेमी उत्सव में सम्मिलित हुए। आयोजन सोल्लास सम्पन्न हुआ। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

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