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भगवन तेरी दुनिया

 

सूरत नकली नीयत नकली, इंसां ऐसा हो गया।
भगवन तेरी दुनिया का, ये हाल कैसा हो गया।।

दुनिया में कुछ अच्छा करने,
भेजा था इंसान को,
लेकिन भूल गया वो आकर
अपने ही भगवान को।।

नाम और हर काम है नकली, नकली पैसा हो गया,
भगवन तेरी दुनिया का, ये हाल कैसा हो गया।
भाई भाई का हत्यारा,
बेटा बाप को मार रहा।
हवा बह रही है नफरत की,
नहीं किसी में प्यार रहा।।

इंसां का ईमान है नकली, करम भी ऐसा हो गया।
भगवन तेरी दुनिया का, ये हाल कैसा हो गया।।
असली माल बस नाम जुबां पर
माल मिले सारा नकली।
नकली माल हो गया असली,
असली कहलाता फसली।।

जहर में असर नही है, वो भी-नकली जैसा हो गया।
भगवन तेरी दुनिया का, ये हाल कैसा हो गया।

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