Categories
डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

भारत के राष्ट्रवादी मुसलमान : अराजक तत्वों के खिलाफ बनना पड़ेगा ‘मदारी बाबा’

राष्ट्र हमारी सोच में निवास करता है। इस सोच के वशीभूत होकर हम अपने समस्त देशवासियों को अपना भाई-बहन मानते हैं । जब भी हमारी सामूहिक चेतना आगे बढ़ने का निर्णय लेती है या आगे बढ़कर कुछ कर दिखाती है तो चाहे चंद्रयान-3 अभियान हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक हो, सभी पर हमको समान रूप से गर्व और गौरव की अनुभूति होती है। इसी को राष्ट्रीय भावना कहते हैं। इसी को राष्ट्रवाद कहते हैं ।
जिस जिस व्यक्ति ने हमारे देश के सम्मान को चोट पहुंचाने का काम किया या किसी भी प्रकार से हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई – ऐसे व्यक्ति, व्यक्ति समूह देश या विदेशी आक्रमणकारी के प्रति घृणा का भाव रखना हमारा राष्ट्रीय संस्कार होता है। इसके उपरांत भी यदि कोई व्यक्ति देश के भीतर रहकर देश के शत्रुओं का समर्थन करता है या उन्हें किसी प्रकार से सहायता करता है या किसी भी प्रकार से उन्हें लाभ पहुंचाने का काम करता है तो ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, व्यक्ति समूह, समुदाय या संप्रदाय राष्ट्र का शत्रु होता है।
सांप्रदायिक दंगों की आग में देश को झोंकना और इसके आर्थिक संसाधनों को नष्टभ्रष्ट करना , उनका दोहन करना, किसी वर्ग विशेष को समाप्त कर देने की योजनाओं में व्यस्त रहना, राष्ट्र की सुरक्षा को खतरे में डालना या ऐसे कार्यों में संलिप्त रहना जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो या देश की सैन्य सूचनाऐं बाहर जाती हों या कोई भी ऐसा कार्य करते हों जिससे एक वर्ग विशेष को समाप्त कर कोई वर्ग विशेष अपना झंडा लहराये, या देश में गृह युद्ध की परिस्थितियां तैयार करना, ये सब ऐसे काले कारनामे हैं जो हमारी सोच की उस तंगहाली को दिखाते हैं जिसका अंतिम लक्ष्य राष्ट्र को दुर्बल करना होता है। ऐसे लोगों की गतिविधियों को प्रोत्साहित करना या ऐसे लोगों के विरुद्ध समय पर कार्यवाही न करना ,ये सब भी राष्ट्र के साथ द्रोह करने के समान है।
अब जबकि मोदी सरकार भारतीय दंड संहिता और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड को समाप्त करने का निर्णय ले चुकी है तो ऐसे में हमें उन कानूनों को भी बनाना होगा जो राष्ट्र के साथ द्रोह करने की मानसिकता पर अंकुश लगाने में सफल हों। किसी वर्ग विशेष की वेशभूषा में रहकर काम करना और फिर ऐसे राष्ट्रद्रोही लोगों का संरक्षण करने के लिए किसी वर्ग विशेष का मैदान में उतर जाना भी किसी प्रकार के राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है। यह पूर्णतया सत्य है कि राष्ट्रद्रोही आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता। तब ऐसे व्यक्ति के लिए किसी संप्रदाय का एक सहायक के रूप में मैदान में उतरना भी राष्ट्रद्रोही मानसिकता का प्रतीक माना जाना चाहिए, नए कानून में इस प्रकार का ध्यान हमको रखना होगा।
देश का संविधान यह व्यवस्था करता है कि कोई भी व्यक्ति, व्यक्ति समूह, संगठन या संस्था अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन, धरना आंदोलन आदि कर सकते हैं। पर ऐसे किसी भी धरना प्रदर्शन या आंदोलन को उग्र बनाना और सार्वजनिक संपत्ति को क्षतिग्रस्त करना, जलाना आदि के लिए कठोर सजा का प्रावधान होना समय की आवश्यकता है।
संविधान के मौलिक अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए उनकी आड़ में देश, धर्म व संस्कृति या राष्ट्रीय भावना का अपमान नहीं किया जा सकता। आंदोलन को उग्रता इसलिए नहीं दी जा सकती कि सरकार सुन नहीं रही थी। यदि सरकार नहीं सुन रही थी तो उसे सुनाने के लिए न्यायालय हैं। न्यायालय की शरण में जाकर हम अपनी मांगें मनवा सकते हैं।
देश के नए कानून में ‘राजद्रोह’ जैसे शब्द को समाप्त किया जाए। इसके स्थान पर ‘राष्ट्रद्रोह’ शब्द प्रयुक्त किया जाना चाहिए। अंग्रेजों ने जिस समय हमारे देश में अपने कानून लागू किए थे उस समय वह राजद्रोही उस व्यक्ति को कहते थे जो उनके राज के विरुद्ध अपराध करता था। उस समय राष्ट्रद्रोही होना हमारे क्रांतिकारियों के लिए गर्व की बात होती थी। आज जब राजसत्ता समाप्त हो गई है और देश में लोकतंत्र है तो राजद्रोह शब्द का कोई औचित्य नहीं है।
देश के मुस्लिम वर्ग को इस समय राष्ट्र की मुख्यधारा के साथ चलने का निर्णय लेना चाहिए । देश को आग की ओर धकेलने से उत्तम है कि हम शांति की बयार बहाने के लिए सब सामूहिक प्रयास करें । इतिहास में ऐसे अनेक मुसलमान हुए हैं जिन्होंने राष्ट्र के साथ चलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है और जब कोई विदेशी आक्रमणकारी भारत पर चढ़ाई करने के लिए आया और उसने यहां पर हिंदुओं का नरसंहार किया तो उन्होंने ऐसे विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारी को लताड़ने में या उसका विरोध करने में बढ़ चढ़कर भाग लिया। तैमूर लंग जैसे विदेशी क्रूर आक्रमणकारी को कौन नहीं जानता ? इसी के जमाने में सूफी संत शाह मदार वादी उद्दीन हुए जो कि इस विदेशी आतंकवादी आक्रमणकारी के आक्रमण के समय में अर्थात 1398 ईस्वी में 88 वर्ष के थे। उन्होंने तैमूर के दिल्ली आक्रमण, हत्या तथा लूटपाट के काले कारनामों को देखा तो उनका हृदय चीत्कार कर उठा। तब उन्होंने एक पत्र तैमूर लंग के पास भिजवाया था।
इस पत्र को ‘सर्वखाप पंचायत का राष्ट्रीय पराक्रम’ नामक अपनी पुस्तक में निहाल सिंह आर्य जी अध्यापक ने पृष्ठ संख्या 146 पर उद्धृत किया है। उन्होंने लिखा था “तैमूर तू जालिम और लुटेरा है। तूने मुल्क हिंद के लोगों को निहत्थे और गरीब मजदूरों को लूटा है तथा लूट रहा है। कत्ल कर रहा है । तू बादशाह नहीं है। तू है डाकू, लुटेरा, जालिम और कातिल। जाबिर, बेरहम, बेदीन, बेहया नापाक है। तू अल्लाह के इस दुनियावी चमन को उजाड़ रहा है। ऐ जालिम ! तू अपनी हरकतों से रुक जा वरना तेरी नस्ल में आगे चलकर कत्ल और बेरहमी होती रहेगी। तेरी नस्ल में सगे भाई को भाई मारेगा और बाप की हुकूमत को तेरी नस्ल जबरदस्ती छीनने की कोशिश करेगी। तुझे कोई बादशाह नहीं कहेगा सब तुझे जालिम, लुटेरा ही कहेंगे। बादशाह कहलाने की या अच्छे काम करने की तेरे अंदर कुव्वत नहीं है। न तू मुसलमान है ना तू कुरान की नसीहतों को मानता है। तेरे ऊपर शैतान का गरबा सवार है। तू गांव के गांवों को फूंक रहा है। निहत्थों का खून बहा रहा है।
याद रख ! तू किसी की नस्ल को नहीं मिटा सकेगा लेकिन तू ही मिट जाएगा। आने वाली नस्लें तेरे इन जुल्मों को याद करके तुझे लानत देंगी और तेरे बुरे कामों को याद करके तुझे शैतान का बाबा रहेगी। तेरी नस्ल के लोगों को तेरी शर्मनाक कामों पर दुख होगा।”
मदार साहब अपने जमाने में जीव जंतुओं पर दया करते थे। बंदर, भालू , रीछ जैसे प्राणियों को वे संरक्षण देते थे। उनके अनुयायी लोग आज भी इन पशुओं को विशेष रूप से संरक्षण देकर उनके खेल दिखाने के लिए गांव – गांव घूमते देखे जाते हैं। जिन्हें लोग ‘मदारी बाबा’ कहते हैं। पर वास्तविक ‘मदारी बाबा’ इतिहास और परंपरा दोनों से मिट गया। जो अच्छे लोग होते हैं उन्हें परंपरा से मिटा देना शायद हमारी नियति बन चुकी है और जो क्रूर और निन्दनीय लोग होते हैं उन्हें हम ‘हीरो’ बनकर पूजते हैं। आज के उस प्रत्येक ‘तैमूर’ के खिलाफ ‘मदारी बाबा’ बनने की आवश्यकता है जो देश में किसी भी प्रकार से अराजकता फैलाने के कामों में लगा हुआ है। इसके लिए सरकार को भी कठोर कानून बनाने चाहिए और देश के लोगों को भी आगे आना चाहिए। सबसे बड़ी बात होगी कि इस्लाम के धर्मगुरु ‘मदारी बाबा’ के रूप में सामने आएं।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक सुविख्यात इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं। )

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betamiral giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betkare giriş
noktabet giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
galabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betasus giriş
betplay giriş
betplay giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betasus giriş
betkare giriş
betkare giriş
noktabet giriş
restbet güncel
imajbet giriş
imajbet güncel giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betnano giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
fikstürbet giriş
fiksturbet giriş
fiksturbet
betplay giriş
betplay
betplay giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betplay giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betkare giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
biabet giriş
betnano giriş
betparibu giriş