Categories
विशेष संपादकीय

रोको: किस ओर जा रहा है आदमी

अलीगढ़ के डॉ. नजमुद्दीन अंसारी और उनके कुछ जागरूक मुस्लिम साथियों ने देश में गोवध और दुधारू पशुओं को काटकर विदेशों में मांस भेजने और बेचने पर गहरी चिंता प्रकट की है। उन लोगों ने मानवता और प्राणीमात्र के हित में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाकर भारत सरकार को सावधान किया है। उनका कहना है कि दुधारू पशुओं को काटकर विदेशों में मांस बेचना तुरंत बंद किया जाए। इस पर सरकार तुरंत प्रतिबंध लगाये। 80 प्रतिशत गरीब दलित किसान जो दूध बेचकर अपना जीवन यापन करते थे, वो आज बेरोजगार हो गये हैं। हमारे देश के पशुओं का मांस 240 देशों को बेचा जा रहा है। दुधारू पशुओं की कमी होने की वजह से खाद्य पदार्थ प्रदूषित हो रहे हैं। बाजार में नकली दूध, नकली घी, नकली खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं। जिसकी वजह से खतरनाक बीमारियां फैल रही हैं। उत्तर प्रदेश के शहर अलीगढ़ में पशुओं को काटने की बारह फैक्ट्रियाँ हैं, जबकि खुर्जा में दस, मेरठ में सोलह, गाजियाबाद में चौदह और साहिबाबाद में दस फैक्ट्रियाँ हैं। इसके अलावा रामपुर, मुरादाबाद, बाराबंकी, उन्नाव, मुजफ्फरनगर, आगरा, बिजनौर, सहारनपुर, सिकंद्राराऊ, कानपुर, बुलंदशहर, कायमगंज आदि स्थानों पर कितनी ही अवैध पशु वधशालाएं खुली हुई हैं। प्रत्येक फैक्ट्री में प्रतिदिन लगभग एक हजार से लेकर तीन हजार तक दुधारू पशु व उनके बच्चे काटकर उनका मांस विदेशों के लिए निर्यात किया जा रहा है। यह देश के लिए चिंता जनक स्थिति है, क्योंकि दुधारू पशुओं को चुग-चुगकर खत्म किया जा रहा है।
एक सर्वे के अनुसार अलीगढ़ में 15 हजार दुधारू पशुओं को प्रतिदिन के हिसाब से रोज काट काटकर मांस निर्यात किया जा रहा है। इसी तरह प्रदेश के 80 जिलों व भारत के अन्य 28 राज्यों में किस प्रकार पशु धन की हानि हो रही है, इसकी कल्पना मात्र से ही दिल कांप उठता है। आखिर आदमी जा किधर रहा है? पशुओं की कमी होने के कारण जमीन को गोबर की खाद नही मिल पा रही है। यूरिया खाद की वजह से अनाज एवं खाद्य पदार्थ प्रदूषित हो रहे हैं और हमारी भूमि ऊसर व बंजर होती जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक 65 हजार जमीन के नमूने लिये गये जो सब फेल पाये गये हैं। अगर दुनिया में दुधारू पशु नही रहे तो यह भी सत्य है कि मनुष्य भी नही रहेगा। बिना दूध घी के इंसानों में बीमारियां बढ़ जाएंगी, मानव शरीर दुर्बल हो जाएगा। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाएगी और मनुष्य छोटी छोटी बीमारियों के हमलों से भी बच नही पाएगा। आज भी चालीस प्रतिशत बच्चे अनीमिया और कमजोरी की वजह से जल्दी ही दम तोड़ जाते हैं। इसी तरह और बीमारियां जैसे टी.बी. से प्रत्येक सैकंड में एक मौत तड़प तड़प कर हो जाती है। डेरी वाले लोग तथा दुधारू पशु पालने वाले लोग पशुओं के बच्चों को बड़ा होने से पहले ही मांस काटने वालों को बेच देते हैं और पशुओं को इंजेक्शन लगाकर दूध निकालते हैं, जो मानवीय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सर्वे में देखा गया है कि भैंसों, गायों के बच्चे दिखाई नही पड़ते उनको पैदा होने के कुछ ही दिन बाद बेच दिया जाता है। जिससे पशुधन की बड़े पैमाने पर हानि हो रही है और पशुओं की आने वाली नस्लें समाप्त होती जा रही हैं। डॉ. अंसारी का कहना है कि अलीगढ़ में एक बहुत बड़ी फेेक्टरी बन चुकी है जिसमें बड़े स्तर पर पशु कटान होगा। इस फैक्ट्री में हमारे दुधारू पशुओं को काटकर विदेशों के पालतू कुत्तों के लिए मांस निर्यात किया जाएगा। यहां पर पशुओं का कटान बड़े पैमाने पर होगा, इसी अलाना गु्रप कंपनी की पहले से ही उत्तर प्रदेश में बारह फैक्ट्रियाँ हैं, जो दुधारू पशुओं का वध कर विदेशों में मांस निर्यात कर रही हैं। इसी तरह पूरे भारत में यह कार्य वैध और अवैध रूप से चल रहा है। अगर इसको नही रोका गया तो गाय, भैंस, बकरी आदि जानवर सिर्फ किताबों या चिडिय़ाघरों में ही देखने को मिलेंगे। इन पशु वधशालाओं के कारण शहर का यह हाल है कि चारों तरफ दस किलोमीटर के दायरे में रहना मुश्किल हो गया है। बदबू की वजह से सांस, त्वचा, कैंसर, खाज, खुजली व पीलिया जैसी तमाम अन्य बीमारियां बड़े पैमाने पर पनप रही हैं। इन पशु वध शालाओं का गंदा खून व पानी तथा अन्य गंदगी ये फैक्ट्री वाले मशीनों के माध्यम से जमीन के नीचे पहुंचा रहे हैं जिससे जमीन के नीचे का पानी प्रदूषित हो रहा है, और पीलिया, कैंसर, लीवर जैसी घातक बीमारियां पैदा हो रही हैं। फलस्वरूप हजारों की संख्या में लोग बीमार व मृत्यु का शिकार हो रहे हैं। लेकिन शासन प्रशासन कोई भी देखने वाला नही है। अलीगढ़ के लोगों के लिए विशेष सूचना ये है कि यहां जितनी पशु वध शालायें हैं उनमें अधिकतर बाहर के लोगों की हैं। कोई मुंबई का रहने वाला सेठ है तो कोई दिल्ली और गुजरात का। आज की इन परिस्थितियों के दृष्टिïगत बहुत जल्द ही वह समय आने वाला है जब पूरे देश में दुधारू पशु समाप्त हो जाएंगे। उस परिस्थिति में मनुष्य सारे पशुओं को खाकर फिर क्या खाएगा? क्या खूनी बना मानव, मानव को ही खाना शुरू कर देगा? विदेशों में बहुत से होटलों पर महिलाओं के कच्चे भू्रण निकालकर उन्हें पकौड़े की तरह तलकर मनुष्य के लिए परोसा जा रहा है। यह स्थिति खुद बयान कर रही है कि इंसान जिधर जा रहा है उधर अंधेरा ही अंधेरा है, फिर भी मनुष्य अपने आपको सभ्य मानव कहकर अपनी पीठ अपने आप थपथपाता है तो इसे इसका अज्ञान कहना ही उचित होगा, क्योंकि ज्ञानवान व्यक्ति ऐसा नही कर सकता। इस भयानक स्थिति को देखकर आदमी की बुद्घि पर तरस आता है।
आज मनुष्य अपने आपको सभ्य कहता है और सभ्य समाज की डींगें मार-मारकर ऐसा एहसास कराने का प्रयास करता है जैसे उसने बहुत प्रगति कर ली हो, लेकिन यदि प्रगति अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाली स्थिति पैदा कर रही है तो इसे प्रगति नही बल्कि दुर्गति कहा जाएगा। दुर्गति पर डींगें मारना मनुष्य की बौद्घिक विकलांगता का प्रतीक है। यह कालिदास वाली स्थिति है कि जिस शाख पर मनुष्य बैठा है उसी को काट रहा है। अपने आप मरने के लिए अपने आप स्थितियां पैदा कर रहा है। डॉ अंसारी पशुओं के लिए कहते हैं कि तभी यह चिडिय़ाघरों में या पुस्तकों में देखने को मिलेंगे, पर हम कहते हैं कि यदि मनुष्य नही संभला तो यह भी धरती पर देखने को नही मिलेगा। फिर कौन होगा-इस धरती पर? यह बात आज पूरे मानव समाज के लिए बहुत ही विचारणीय है कि आदमी जिधर जा रहा है उधर से तुरंत रोका जाए।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis