आर्य वीर दल कल ,आज और कल*।

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लेखक आर्य सागर खारी 🖋️

( यह लेख गाजियाबाद से प्रकाशित होने वाली त्रैमासिक पत्रिका ब्रह्मज्योति के अगस्त 2023 अंक में भी प्रकाशित होगा आप वहां भी इसे पढ़ सकते हैं)

ऋषि दयानंद के निर्वाण के पश्चात उनके अनुयायियों मानस पुत्रों पंडित लेखराम, स्वामी श्रद्धानंद ,स्वामी दर्शनानंद, पंडित आत्माराम अमृतसरी, महाशय राजपाल भाई परमानंद लाला लाजपत राय सरीखे असंख्य विद्वानों के वैचारिक आंदोलन ,सुधारवादी कार्यों से,शुद्धि के कार्यों से मुसलमान, ईसाई, पौराणिक पोप व अन्य मतावलम्बियो में खलबली मच गई। आर्य समाज के विद्वानों के तर्क के तीरो के सामने विधर्मी मैदान छोड़कर भाग रहे थे। ऐसे में विद्रोहियों ने आर्य समाज के महापुरुषों के प्राण लेने का षड्यंत्र रचा अमर शहीद वीर लेखराम , स्वामी श्रद्धानंद, महाशय राजपाल इसी षड्यंत्र का शिकार हुए। इनमें से किसी के सीने में गोली तो, किसी के सीने में खंजर उतार दिया गया जिहादियों ने। कट्टर मतान्ध लोगों द्वारा अपने नेताओं के बलिदान किये जाने पर उसका प्रतिकार करने के लिए सन् 1927 में महात्मा हंसराज की अध्यक्षता में दिल्ली में एक विराट महासम्मेलन हुआ ।

परिणामस्वरूप 26 जनवरी 1929 को ‘आर्य रक्षा समिति ‘के सुदृढ़ अगं के रूप में आर्य वीर दल की स्थापना हो गई। उस समिति के तत्कालीन अध्यक्ष महात्मा नारायणस्वामी ने 10,000 आर्यवीर, ₹10000 एक वर्ष में एकत्रित करने की प्रतिज्ञा की ।आर्यो में इतना उत्साह था कि कुछ ही महीनों में दोनों प्रतिज्ञा पूरी हो गई। 1931 में आर्य वीर दल का दूसरा आर्य महासम्मेलन हुआ। आर्य वीरों की हुंकार के सामने गीदड़ मांद में जा छुपे। आर्य नेताओं, विद्वानों पर होने वाले आक्रमण रुक गए। शरीर ,आत्मा से बलवान चरित्रवान हजारों आर्य वीरों का निर्माण हुआ। जिन्होंने आर्य जनों के उत्सव मेलों व शोभायात्रा को निर्विघ्नम संपन्न कराया। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा ने 1936 में आर्य वीर दल के नियमों को संशोधित करते हुए उसे विधिवत स्वीकृत किया। आर्य समाज को इसका मातृ संगठन स्वीकार किया गया। इसकी कमान उत्साही वीर नवयुवक श्री ओम प्रकाश त्यागी जी को दी गई। यह होते-होते सन 1942 में 400 आर्य वीरों का प्रथम अधिकारिक शिविर बदरपुर दिल्ली में लगा जिसमें देश भर से चुने हुए 400 आर्यवीरो को 1 मास तक सघन प्रशिक्षण दिया गया। अपने स्थापना वर्ष से ही आर्यवीर प्रजा की रक्षा, गढ़मुक्तेश्वर तथा यमुना के घाटों पर मेलों के अवसर पर जनता की रक्षा, देश विभाजन के दंगों में सिख हिंदू प्रजा की रक्षा की।जहां मुस्लिम संख्या अधिक थी हिंदू सिखों पर भयानक अत्याचार हुआ उनके लिए भी, स्त्रियों के सतीत्व की रक्षा के लिए आर्यवीर ने अपने प्राण बलिदान किये। बंगाल के दंगों में भी आर्य वीरों ने असंख्य हिंदू प्रजा के प्राण बचाए है। आजादी से पूर्व आजादी के पश्चात जब जब देश में प्राकृतिक आपदाएं बाढ़ भूकंप आया आर्य वीरों ने सर्वप्रथम बढ़-चढ़कर पीड़ितों की सेवा की। आर्य वीर दल भारतवर्ष का अनोखा अनुपम संगठन रहा है जो आर्य समाज के 10 नियमों को अपना पथ प्रदर्शक मानता है। जो दिखाने के लिए नहीं कर्तव्य निष्काम भाव से नागरिक व राष्ट्र सेवा करता है। आर्य वीर दल के शिविरों में बालक, किशोरों, युवकों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया जाता है। उनकी आत्मिक सामाजिक शारीरिक मानसिक आत्मिक उन्नति को सुनिश्चित किया जाता है। उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है। यह संगठन अपने धेय वाक्य ‘अस्माकं वीरा उतरे भवन्तु’ को लेकर चलता है आर्य वीर दल का अपना विशेष ध्वज तथा ध्वज गान है जो इसके पावन वीरता युक्त उद्देश्य भावों को प्रदर्शित करते हैं। आर्य वीर दल का मुख्य उद्देश्य वैदिक धर्म ,आर्य संस्कृति आर्य सभ्यता की रक्षा, प्रचार और प्रसार करना है। साथ ही समस्त उचित उपाय द्वारा आर्य जाति में क्षात्र धर्म का प्रचार, प्रशिक्षण व राष्ट्र रक्षा, किसी भी विपत्ति का सामना करने के लिए संघर्ष करना है। जिसकी आज प्रबल आवश्यकता है। आर्य वीर दल का इतिहास बड़ा ही गौरवशाली बलिदानी है। आज भी ग्रीष्मकालीन अवकाश में देशभर के प्रांतीय, जनपद स्तरीय ,आर्य वीर दल के संगठन आर्यवीर व वीरांगनाओं के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करते हैं। शारीरिक बौद्धिक आत्मिक दृष्टि से यह शिविर बेहद उच्च कोटि के होते हैं अन्य किसी कथित देशभक्त संगठन की अपेक्षा। आर्य वीर दल को सत्ता का संरक्षण कभी नहीं मिला है यह आर्य विद्वानों सन्यासियों आर्य मिशनरी भाव से कार्य करने वाले इसके प्रशिक्षकों संचालकों शिक्षकों के तप त्याग उनकी निष्कामता से चल रहा है। यदि आर्य वीर दल को सत्ता का संरक्षण मिल जाए तो सोने पर सुहागा हो जाए फिर कोई विधर्मी एक भी राम कृष्ण ऋषि-मुनियों के वंशज हिंदुओं आम नागरिकों पर अत्याचार नहीं कर सकता समूची बस्तियों का उत्पीड़न तो दूर रहा । अपने सीमित संसाधनों में आर्य वीर दल पूरे मनोयोग से पूरी उर्जा से इस भारतवर्ष की सुप्रजा मानवीय वैदिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है । जून 2023 माह में आर्य वीर दल उत्तर प्रदेश तथा आर्य वीरदल गौतम बुध नगर के संयुक्त तत्वाधान में प्रांतीय प्रशिक्षण शिविर जनपद गौतम बुध नगर की दादरी तहसील के तिलपता गांव में भारतीय आदर्श इंटर कॉलेज में संपन्न हुआ जो लेखक का भी निज ग्राम है ।जिसमें 150 से अधिक आर्य वीरों को प्रशिक्षित किया गया जिन्हें आर्य वीर दल के पाठ्यक्रम के अनुसार आत्मरक्षा ,तलवारबाजी, क्षुरिका चालन, दंड चालन ,पादाघात, मार्शल आर्ट सहित नियुद्ध जैसी पुरातन व आधुनिक आत्मरक्षा की विधाओं में पारंगत किया गया।शिविर पूरी तरह अपने उद्देश्य में सफल सार्थक रहा। उसके लिए सभी आयोजकों को कोटि कोटि बधाइयां। हमें विशेष तौर पर आर्य को अपने बच्चे को आर्य वीर दल के शिविरों में भेजना चाहिए सुधार घर से ही चलता है। चरित्रवान वीर बलवान संतान किशोर युवक ही परिवार समाज राष्ट्र की रक्षा कर पाएंगे आपत्ति काल में ।वीर ही वसुंधरा को भोगते हैं। यह तथ्य हमारे मानस में जितनी जल्दी स्थापित हो जाए उतना ही उत्तम है। आर्य वीर दल से आर्य समाज की विचारधारा का भी प्रचार प्रसार होता है ।आर्य समाज को युवाओं का नेतृत्व मिलता है। प्राय आर्य समाज को लेकर हम देखते हैं आर्य समाज बुजुर्गों का संगठन बनता जा रहा है । आर्य समाज के कार्यक्रमों में नव युवकों की उपस्थिति नाम मात्र को होती है ।इसका समाधान आर्य वीर दल है। आर्य वीर दल से हमें योग्य आर्य युवक कार्यकर्ता भी मिलते हैं इससे संगठन भी बनता है जिसकी आज आर्य समाज को अति आवश्यकता है। आर्य समाज की आवश्यकता भारत राष्ट्र से अलग नहीं है। देश को भी ऐसे उत्तम वीरों के संगठन इसमें पैदा होने वाले आर्य वीरों की आवश्यकता है क्योंकि आर्य वीर दल संगठन का इतिहास बताता है जब-जब मा भारती वैदिक संस्कृति पर दुश्मन ने प्रहार किए हैं तब तब आर्य वीरों ने अपना सीना आगे कर दिया है ।चाहे देश का स्वाधीनता संग्राम हो ,हैदराबाद का सत्याग्रह हो ,देश विभाजन के दंगे हो या हिंदी रक्षा आंदोलन ,गौ रक्षा आंदोलन इन सभी आंदोलनों में आर्य वीरों की बढ़-चढ़कर भूमिका रही है। आर्य वीर दल का अतीत समृद्ध रहा है। वर्तमान में और अधिक संगठित सफल प्रयासों की आवश्यकता है । निसंदेह इस संगठन का भविष्य भी उज्जवल ही रहेगा आर्य वीर दल के सुखद उज्जवल भविष्य में ही अखंड विश्व गुरु विश्व की महाशक्ति भारत की सुखद संकल्पना साकार हो सकेगी । इसके लिए अधिक से अधिक देशभक्त नागरिकों अभिभावकों को अपने नौनिहालों बच्चों को आर्य वीर दल को सौंपना होगा आर्य वीर दल को तन मन धन से सहयोग करना होगा। यही हमारा राष्ट्रीय धर्म कर्तव्य है। वेद कहता है अनार्य असुरों विधर्मी दुष्ट जनों से रक्षा के लिए स्वयं ही तुम्हें सक्षम बनना होगा कोई पुलिस क बल तुम्हारी मदद रक्षा नहीं कर सकता। राजा भी पराक्रमी हो राजा की प्रजा भी वीर पराक्रमी बलवान हो, यही वेद की शिक्षा है।

आर्य सागर खारी 🖋️

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