तर्कसंगत है सपा नेता मुलायम सिंह यादव का महिलाओं के लिए आरक्षण में आरक्षण

राकेश कुमार आर्य
महिला आरक्षण विधेयक को लाकर यथाशीघ्र उसे संसद से पारित करा लेना कांग्रेस नीत यूपीए की सरकार का प्रथम लक्ष्य बनता दीख रहा है। मुलायम सिंह यादव और शरद यादव जैसे लोग इस महिला विधेयक से मतभेद रखते हैं। उनका मानना है कि इस विधेयक का वर्तमान प्रारूप ही गलत है। इसमें दलित और पिछड़े समाज की महिलाओं का आरक्षण भी होना चाहिए।
महिलाएं देश की राजनीति और संसद में प्रवेश करें यह तो सारा देश चाहता है। जब हम 21वीं सदी में जी रहे हों और प्रत्येक व्यक्ति को आत्मविकासार्थ समग्र अवसर उपलब्ध कराने की बात करते हों तो महिला भी इससे अछूती नही रह सकतीं। उन्हें भी अधिकार है अपने को प्रदर्शित करने का और अपनी प्रतिभा को मुखरित करने का। इसलिए महिला आरक्षण विधेयक का आना अच्छी बात है। उस आपत्ति में भी बल है और उसे अनसुना नही किया जाना चाहिए। वह आरक्षण में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। वह कहना चाहते हैं कि भारत के सुदूर देहात में बसने वाली महिला जो अपनी गरिमा और निजता को सुरक्षित रखने की लड़ाई लडऩा तक नही जानती और जो आज भी अन्याय, अत्याचार, अभाव और उत्पीडऩ का शिकार है, कोई उसकी प्रतिनिधि भी पार्लियामेंट में होनी चाहिए।
भारत में तीन प्रकार का भारत मिलता है, एक अमेरिकी स्टाइल पर जीने वाला भारत है, जो कि उच्च वर्गीय लोगों से बनता है, इनकी संख्या देश में लगभग बीस करोड़ है। ये विकसित भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। पश्चिमी सभ्यता के रंग में डूबे ये लोग भारतीयता और भारतीय संस्कृति को उपहास और उपेक्षा की दृष्टि से या तो देखते हैं या देखने के अभ्यासी बनते जा रहे हैं। दूसरे स्थान पर वो लोग हैं जो कि विकासशील देशों की जनता की भांति अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इनकी संख्या देश में 25-30 करोड़ है। ये मध्यम वर्गीय भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये भारतीयता से और भारतीय संस्कृति से प्रेम करते हुए भी अपने से ऊपर बैठे हुए उच्च वर्ग के अंधानुकरण में बहे जा रहे हैं जिससे समाज में नकारात्मक प्रतियोगिता और प्रतिस्पद्र्घा की आग लग रही है। उसका दुष्प्रभाव समाज पर पड़ रहा है और हम देख रहे हैं कि इस मध्यम वर्गीय समाज को जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं उपलब्ध होकर भी इसे मनोवैज्ञानिक दबाब और प्रतिस्पद्र्घा के तनाव में जीना पड़ रहा है। जिससे समाज में नास्तिकता बढ़ रही है और निरे भौतिकवादी ढंग से जीने की मानव की इच्छा बलवती होती जा रही है।
तीसरा भारत वह है जो इसके गांवों में बसता है। यह भारत वास्तविक भारत है किंतु इसकी समस्या ये है इसमें अधिकांश लोग अशिक्षित, भूखे, नंगे और दरिद्र हैं। इनकी जनसंख्या लगभग 60-70 करोड़ है। ये भारत से प्यार करते हैं किंतु अशिक्षा और भुखमरी के कारण अपनी संस्कृति और अपने धर्म से अनभिज्ञ हैं। इनकी निजता, अस्मिता और गरिमा सभी असुरक्षित हैं।
मुलायम सिंह यादव और शरद यादव इसी भारत को बदलना चाहते हैं। जिसके लिए उनका कहना है कि इस भारत में रहने वाली महिला आज भी दलन, दमन और उत्पीडऩ का जीवन जी रही है। क्या हम इस तीसरे भारत की महिला का प्रतिनिधित्व पहले नंबर के भारत की महिला को करने दे सकते हैं ? सेवा को नारी जीवन की सुंदरता और लज्जा को उसका आभूषण माना जाता है। किंतु जब ये दोनों चीजें ही नदारद हों तो क्या किया जा सकता है? इसलिए हमारा मानना है कि ये पहले भारत की महिला, तीसरे भारत की महिला की सेवा नही कर पाएगी। हमें ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि तीसरे भारत की महिला यदि उच्च शैक्षणिक डिग्रियां प्राप्त कर गयी हैं तो इस तीसरे भारत को साक्षरता पर लाकर उसके झूठे आंकड़ों को प्रचारित, प्रसारित कराके समस्या का समाधान नही होगा। इससे भी यही लगता है कि हम तीसरे भारत का उपहास कर रहे हैं क्योंकि एक ओर महिला के पास उच्च डिग्रियां और दूसरी ओर उसे टीवी आदि पर क, ख, ग लिखाते दिखाकर उसे बड़ी उपलबिध के रूप में दिखाना हास्यास्पद है। इसलिए हमें ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि तीसरे भारत की नारी भी शिक्षित हो। उसे अपने अधिकारों से पहले, अपने कत्र्तव्यों का ज्ञान हो। पुरूष समाज को अपनी उदारता का परिचय देना चाहिए और महिला को आगे बढऩे में सहयोग देना चाहिए। हम बीते हुए समय की दुर्गंध को अपने साथ साथ लेकर और अधिक नही चल सकते हैं। क्योंकि हमें स्मरण रखना चाहिए कि बीते कल की दुर्गंध को ढोते रहने से हमारा जीवन दुर्गंध युक्त होता है और हम असमय ही काल के विकराल गाल में चले जाते हैं। हमें भारतीय समाज को मरने नही देना है, अपितु इसमें जीवन्तता का संचार करना है।
आरक्षण की व्यवस्था के हम समर्थक नही हैं। यह व्यवस्था वहां तक ही लागू रहनी चाहिए जहां तक हम इस विचारधारा को अपनाने में समर्थ और सक्षम नही हो जाते हैं कि संसार में सभी प्राणी समान हैं और सबको अपने जीवन की गरिमा तथा अस्तित्व को बचाये रखने का अधिकार है। इसलिए नारी को भी यह अधिकार सहज रूप में ही उपलब्ध है।
अत: मनमोहन सिंह सरकार को नारी की गरिमा और सम्मान को बचाए रखने के लिए विशेष रक्षोपाय करने होंगे। आरक्षण की व्यवस्था को देर तक चालू रखा गया तो नारी पुरूष का संघर्ष भी सामने आएगा। जैसा कि हमने जातिगत आरक्षण का स्वाभाविक परिणाम देख लिया है। इस आरक्षण ने देश में जातीय द्वेष को जन्म दिया है। जातिवाद जिसे कि समाज से मिट जाना चाहिए था, वह अब हमारे समाज की एक आवश्यक विसंगति बनकर रह गया है। ऐसी ही एक विसंगति हम महिला आरक्षण विधेयक में आरक्षण में आरक्षण देकर भी उत्पन्न कर सकते हैं। इसलिए वोट प्राप्त करना ही कांग्रेस का लक्ष्य नही होना चाहिए अपितु राजनीतिक इच्छा शक्ति का सफल प्रयोग कर राष्ट्रहित में ऐसी व्यवस्था की जाए कि देर सवेर महिला आरक्षण समाप्त करके भी पुरूष समाज नारी की गरिमा और अस्तित्व का सहज ध्यान रखने का अभ्यासी बन जाए। इस व्यवस्था के निस्संदेह शुभ परिणाम आएंगे। तब तक हम आरक्षण में आरक्षण की मुलायम सिंह यादव की व्यवस्था को बनाए रख सकते हैं।


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