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इतिहास के पन्नों से

महान आसुरी संस्कृति –

मुमताज महल से शाहजहाँ को इतना प्रेम था कि उसके मरने पर उसने उससे उत्पन्न १७ वर्ष की अपनी स्वयं की सगी बेटी जहाँआरा को ही अपनी बादशाह बेगम बना लिया था। यद्यपि शाहजहाँ की आठ बेगमों में से तीन जीवित थीं। किन्तु शाहजहाँ को १७ वर्ष की बेटी जहाँआरा ही “बादशाह बेगम” बनने योग्य लगी। जहाँआरा दारा शिकोह की समर्थक थी और बाप को कैद किये जाने पर बाप के साथ रही। किन्तु बाप के मरने पर औरंगजेब से दोस्ती करके अपनी छोटी बहन रोशनआरा को हटाकर औरंगजेब की “बादशाह बेगम” बन गयी। पहले अपने सगे बाप की बेगम थी फिर अपने भाई की बेगम बन गई। बाद में औरंगज़ेब ने अपनी सगी बेटी जीनत को अपनी “बादशाह बेगम” बनाया। इसी क्रम में मुगल बादशाह फर्रूखसियर ने भी अपनी ही बेटी को अपनी “बादशाह बेगम” बनाया था। शाहजहाँ ने अपनी बेटी तथा औरंगजेब ने अपनी दो बहनों और बेटी को बारी−बारी से अपनी “बादशाह बेगम” बनाया। यह मुगलों की महान सभ्यता थी। उनकी बेगमों की सूची अंतर्जाल पर उपलब्ध है। मुगलों की कब्रें खोदकर जबतक उन सबका DNA टेस्ट नहीं होता तब तक कहना कठिन है कौन अपनी बहन वा बेटी का क्या था। मुगल क्रूर थे लेकिन नालायक निकम्मे और भ्रष्ट थे। उनके दरबारी मुल्लाओं का तर्क था कि अपने द्वारा रोपे वृक्ष का फल खाने से किसी को रोकना अन्याय है। इसलिए मुगल बादशाह लोग अपनी बेटियों के साथ शादी कर लेते थे।
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औरंगजेब ने अपनी बेटी जुब्दत−उन−निसा की शादी दाराशिकोह के बेटे से करायी, किन्तु दूसरी बेटी को अपनी “बादशाह बेगम” बनाया और तीसरी को बीस वर्षों तक जेल में रखा। अकबर ने स्वयं दो मुगल शहजादियों से शादी की — रुकैया और सलमा जो उसकी बहनें थीं (कजिन)। अकबर की सभी बेटियों की शादी हुई, केवल एक के सिवा जो जहाँगीर के साथ आजीवन रही। जहाँगीर ने अपनी तीन बहनों (कजिन) से शादी की। जहाँगीर की दो बेटियाँ थीं जिनमें से एक की शादी उसकी सौतेली माँ नूरजहाँ ने वैमनस्य के कारण नहीं होने दी और दूसरी की शादी जहाँगीर के भतीजे से हुई। उस भतीजे के बाप दानियाल की माँ कौन थी इसपर सारे समकालीन लेखक मौन हैं किन्तु उसका बाप अकबर था यह सब लिखते थे। दानियाल की माँ अनारकली थी, जिससे अकबर ने दानियाल को पैदा किया और जब अनारकली से सलीम का चक्कर चला तो अकबर ने अनारकली को जीवित दीवार में चिनवा दिया।
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यह थी महान मुगलों की महान संस्कृति जिसका महिमा मंडन करते करते महाझूठे कपोल कल्पित इतिहासकार नही थकते।

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