भारत के 50 ऋषि वैज्ञानिक अध्याय – 6 महान गणितज्ञ आर्यभट्ट

images (40)

अभिनंदन के योग्य है, आर्यभट्ट महान।
गणित और खगोल का अद्भुत दीन्हों ज्ञान।।

भारतवर्ष के ऋषि वैज्ञानिकों में आर्यभट्ट का नाम एक सुप्रसिद्ध गणितज्ञ और खगोलशास्त्री के रूप में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। अपने जीवन काल में गणित और खगोल शास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण और अभिनंदनीय कार्य किया। आर्यभट्ट के महान वैज्ञानिक कार्यों का भारत के साथ-साथ संपूर्ण विश्व ऋणी है। उन्होंने संसार के लोगों को बताया कि यह सूर्य अपने स्थान पर स्थित रहता है ,जबकि अन्य ग्रह उसकी परिक्रमा लगाते हैं। शून्य का आविष्कार करने वाले भी आर्यभट्ट ही थे।
बाद में उनके इसी सिद्धांत को कॉपरनिकस नाम के विदेशी वैज्ञानिक के नाम कर दिया गया।
आर्यभट्ट के समय में गुप्त काल (450 ईसवी के लगभग) में स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय भली प्रकार अपना कार्य करना आरंभ कर चुका था, उस विश्वविद्यालय में दूर-दूर से आकर विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते थे। उसी विश्वविद्यालय की देन आर्यभट्ट थे।
गुप्त काल के महान शासक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के राजदरबार में यह उनके नवरत्नों में से एक थे। इस प्रकार इन्हें चंद्रगुप्त विक्रमादित्य का ही समकालीन माना जाता है।
23 वर्ष की अवस्था में ही इन्होंने ‘आर्यभट्टीय’ और उसके पश्चात ‘आर्य सिद्धांत’ नामक ग्रंथ लिखे। जिससे पता चलता है कि यह बहुत ही मेधावी और कुशाग्र बुद्धि वाले थे। जिससे इन्हें छोटी अवस्था में ही बहुत कीर्ति प्राप्त हुई। भारतवर्ष के तत्कालीन राजा विद्वानों का अत्यधिक सम्मान करते थे। ज्ञान विज्ञान और संस्कारों की परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भारत के आर्य राजा विद्वानों का सम्मान सत्कार करना अपना नैतिक कर्तव्य मानते थे।
गणित में उन्होंने बहुत ही मूल्यवान योगदान दिया। जिसके लिए संपूर्ण विश्व आज तक उनका ऋणी है। उन्होंने ही पाई के अनुमानित मूल्य की गणना की थी, जिसे उन्होंने 3.14 स्थापित किया था। उन्होंने त्रिभुज और वृत्त के क्षेत्रफल की गणना के लिए अकाट्य सूत्र भी खोजे।

संसार ऋणी है और रहेगा, जब तक सृष्टि जारी है।
स्थान मिले इतिहास में समुचित, बस यही तैयारी है।।

आर्यभट्ट ही ऐसे पहले महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने निर्धारित किया था कि एक सौर वर्ष में 365.8586805 दिन होते हैं। वास्तव में यह उनका बहुत ही गहन अध्ययन था, जिसे शेष संसार को समझने में बहुत अधिक समय लगा। उस समय ईसाई देशों का ईसवी कैलेंडर 10 महीने का होता था। आर्यभट्ट की इस खोज के बाद भी सैकड़ों वर्ष तक ईसाइयों का वही कैलेंडर काम करता रहा। आर्यभट्ट के देहांत के सैकड़ों वर्ष पश्चात जब ग्रेगोरियन कैलेंडर में 12 महीनों का प्रावधान किया गया तो उस घटना के संदर्भ में हमें यह मानना चाहिए कि यूरोप वालों को यह ज्ञान निश्चय ही आर्यभट्ट के अनुसंधान से ही मिला होगा। पर वे इसे अपनाने में बहुत अधिक देर तक संकोच करते रहे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी मान्यताओं को धक्का लगे और भारत के इस महान आचार्य की मान्यता को उन्हें स्वीकार करना पड़े, परंतु में उन्हें हमारे इस ऋषि के समक्ष घुटने टेकने पड़े। तभी तो उन्होंने अपने वर्ष में 10 महीने के स्थान पर 12 महीने घोषित किए।
‘आर्यभटीय’, उनका एक ऐसा महान ग्रंथ है जिसे उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में मान्यता प्राप्त है। महान ग्रंथ के गणित भाग में 33 श्लोकों में 66 गणितीय नियम प्रस्तुत किए गए हैं।
इस ग्रंथ में गीतिकापाद (13 छंद), गणितपाद (33 छंद), कालक्रियापाद (25 छंद), और गोलापाद (50 छंद) चार अध्याय हैं। इसी ग्रंथ के अध्ययन से हमें सौर मंडल की संरचना, सौर मंडल के ग्रहों की प्रकृति, और सूर्य व चंद्र ग्रहणों के कारणों की सुंदर और सटीक जानकारी प्राप्त होती है।
आर्यभटीय के गणितीय खंड में अंकगणित, बीजगणित, समतल त्रिकोणमिति और गोलीय त्रिकोणमिति को सम्मिलित किया गया है , जिससे आर्यभट्ट के महान बौद्धिक ज्ञान का पता चलता है। इस प्रकार गणित के अन्य अनेक नियमों, सिद्धांतों और सूत्रों की जानकारी देने वाला यह ग्रंथ भारत के गौरव को प्रकट करने वाला ग्रंथ है।
‘सूर्य सिद्धांत’ नामक अपने ग्रंथ के माध्यम से आर्यभट्ट ने सौर ग्रहणों के वास्तविक कारण को प्रकट किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चंद्रमा सहित अन्य कई ग्रह सूर्य के प्रकाश से ही चमकते हैं। आर्यभट्ट के इन महान वैज्ञानिक कार्यों से स्पष्ट होता है कि भारतवर्ष में वैज्ञानिक परंपरा को ही प्रधानता दी जाती रही है। यदि इसके उपरांत भी चंद्र ग्रहण के समय राहु-केतु वाली कहानी को दोहराया जाता है तो यह पूर्णतया अवैज्ञानिक है, जिसे भारत की मूल वैज्ञानिक चिंतनधारा द्वारा कभी भी मान्यता प्रदान नहीं की गई। धरती के अपनी धुरी पर घूमने के भारत के प्राचीन सिद्धांत की पुष्टि भी आर्यभट्ट द्वारा की गई।
उन्होंने स्थानीय मान प्रणाली को विकसित करने और शून्य की पहचान करने के साथ साथ वर्गमूल और घनमूल योग पर भी स्पष्ट चिंतन और सिद्धांत प्रतिपादित किया। उन्हें स्थान मूल्य प्रणाली में सबसे पहले शून्य का प्रयोग भी उन्होंने ही किया।
आर्यभट्ट के विषय में कुछ विद्वानों की मान्यता है कि उनका जन्म 476 ई. में अश्मक में हुआ था। इस पर हमारी असहमति है, क्योंकि यदि उनका जन्म 476 ई0 में होना माना जाएगा तो फिर वह चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के समकालीन नहीं हो सकते।
आर्यभट्ट अपने टीकाकार भास्कर प्रथम के साथ पाटलिपुत्र में अधिक समय रहे। उनके विषय में यह भी मान्यता है कि वे मगध में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे थे।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि आर्यभट्ट भारतीय मनीषा और ज्ञान परम्परा के दैदीप्यमान नक्षत्र हैं। जिन्होंने अपनी महामेधा से और ज्ञान से संसार का ज्ञानकोष समृद्ध किया।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betnano
Hititbet Giriş
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet
betgaranti giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betgaranti giriş
sahabet
sahabet
meritbet
bets10
meritbet
bets10
betnano
bets10
bets10
betnano
betnano
atlasbet
atlasbet
betnano
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
solobet giriş
solobet giriş
hititbet giriş