images - 2023-03-07T152649.856

कोरोना एक महामारी : षड्यंत्र …
यह एक फ्लू की बीमारी है जो RNA वायरस से फैलती है ! इस वायरस का नाम कोरोना रख दिया है ! यह कोरोना वायरस हज़ारों साल पहले भी था आज भी है और हज़ारों साल तक रहेगा !!! RΝΑ प्रकार का वायरस अपना रूप बदलता रहता है म्यूट होता रहता है| इसलिए इसकी कोई विशेष दवाई या वैक्सीन नहीं बन सकती – जैसे एड्स,जुखाम ,फ्लू आदि अनेक बीमारियाँ हैं कि जिनकी कोई दवाई/वैक्सीन नहीं बन सकती |
यह बीमारी चीन के वूहान शहर में शुरू हुई – भारत में सबसे पहले मोबाइल में आई और फिर दिल्ली आदि शहरों में बहने लगी – इस बीमारी को लाने में तबलीकी जमात का नाम दिया गया क्योंकि हिन्दू मुस्लिम आपस में भिड़ें और नज़र चुरा कर , ध्यान भटका कर इस बीमारी को अंजाम दिया जाय – लोगों को सबसे पहले विडिओ दिखा दिखा कर सारे मिडिया माध्यम से डराया गया और लोग बुरी तरह से डरे भी – लोग इसे सामान्य सर्दी जुखाम न समझ लें इसलिए सबसे पहले आयुर्वेदिक , नेचरोपेथी , होमियोपेथी , हकीमी आदि को नोटिस भेजा गया कि ये लोग इस बीमारी का इलाज न करें – यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है कि इन्हें इलाज करने से क्यों रोका गया ???
इसे असिमटोमेटिक – लक्षण रहित रोग भी कहने लगे – ताकि जिन्हें सर्दी जुखाम न हो वे भी डरें – इतने घंटे तक यह वायरस जमीन पर रहता है – इतने घंटे तक लोहे पर रहता है – इतने घंटे तक कार्टून बॉक्स पर रहता है – जिसको लेकर व्यवसाय बंद – डर से कोई बच न पाए |
और फिर RT – PCR टेस्ट – जो बिलकुल ही अविश्वसनीय है – इस टेस्ट के शोधकर्ता कैरी म्युलस ने खुद कहा है कि उन्होंने भार पूर्वक कहा कि यह एक रिसर्च टूल है – डायग्नोस्टिक (निदान ) टूल बिलकुल भी नहीं है , अर्थात इससे पता लगाया जा सकता है कि यहाँ वायरस है लेकिन यह पता नहीं लगाया जा सकता कि कौन सा वायरस है , हमारे शरीर में हज़ारों प्रकार के वायरस होते ही हैं ..- जितनी बार आवर्तन किया जायेगा उतनी बार अलग अलग परिणाम मिलेंगे | जो लोग पॉजिटिव पाए गए उन्हें क्वारेंटाइन किया जाय ( रोगी आधा तो इसी कारण से मानसिक प्रतिकार क्षमता खो बैठता है ) फिर उन रोगियों का इलाज के नाम पर भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता – जो दवाई दी जाती उस पर मौत ही लिखा होता था – इस बीमारी का जब कोई इलाज ही नहीं है – कोई दवाई भी नहीं है तो फिर अस्पतालों में ले जा कर किस बीमारी का इलाज किया जाता था – क्वारेंटाइन में कोई मरा हो ऐसा कोई एक भी उदहारण नहीं है लेकिन जो भी डॉक्टर के पास गया वह ही मरा है – लाशों को शील पैक करके जलाने के लिए दी जातीं थी तो कुछ लाशें खून से सनी क्यों दिखती थीं ??? …
इस काल में पढ़े-लिखे लोगों का कॉमन-सेन्स हाइजेक ! हो गया था ,उनकी बुद्धि कमजोर हो गई थी ऐसा मुझे लगा | WHO CDC CDA ICMR आदि की गाइड लाइन आने लगीं , सेनिटाइज़र से दिन भर हाथ धोइये ,मास्क पहनिए ,दो गज की दूरी बनाएँ आदि … लोग लीटर की लीटर और बोतलों पर बोतलें खरीद कर घर में लाने लगे | कुछ पढ़े-लिखे लोग तो सेनिटाइज़र छिड़कने की मशीन भी ले आये | किसीने भी सेनिटाइज़र क्या काम करता है ?, – इससे क्या लाभ है- ये सोचने की कोशिश भी नहीं की | मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री ,संत्री ,तंत्री लोग विज्ञापन कर रहे हैं …इसलिए खरीद खरीद कर दिन भर हाथ धोने लगे | सेनिटाइज़र की प्रत्येक बोतल पर साफ़ साफ़ लिखा रहता है – it kills 99.99% germs – किसीने यह भी नहीं पढ़ा कि ये germs है क्या ??? germs = bacteria , ये सेनिटाइज़र बैक्टीरिया को मारता है लेकिन कोरोना तो वायरस है भाई !!! सेनिटाइज़र वायरस को नहीं मारता !!! कंपनियों ने हमें निरा मूर्ख बना कर विज्ञापन करवा करवा कर लाखों करोड़ों रुपये कमा लिए और हम तथाकथित पढ़े-लिखे लोग सेनिटाइज़र से हाथ मलते रह गए – सेनिटाइज़र में कुछ हिस्सा अल्कोहल का होता है ज्यादा मात्रा में हम जब हमारी चमड़ी पर अल्कोहल लगाते हैं तो हमारे शरीर के टी-सेल नष्ट होने लगते हैं टी – सेल के नष्ट होने से हमारी रोग प्रतिकारक क्षमता नष्ट होने लगती है ( हमारी रोग प्रतिकारक क्षमता को घटाना ही – इन सीक्रेट सोसाइटियों का हमेशा उद्देश्य रहा है )
इसी तरह मास्क पहना कर इंसान को सूअर जैसा दिखाई पड़ने वाला ग़ुलाम बनाने की एक कोशिश है – मास्क से कोरोना वायरस से रक्षा मिलती है इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है – N95 सर्जिकल मास्क को सबसे उत्तम मास्क माना जाता है N95 मास्क की pore size ( ताने बाने के बीच की दूरी – छिद्र का नाप ) माइक्रोन में होता है जबकि वायरस का नाप नैनोमीटर में होता है – N95 मास्क की pore size 0. 3 माइक्रोन से लेकर 0.1 माइक्रोन होती है
1 माइक्रोन = 1000 नेनो मीटर अर्थात मास्क के एक छिद्र में से सैकड़ों वायरस निकल सकते हैं – इसलिए मास्क कोरोना के वायरस से बचाता है यह बात बिलकुल भी वैज्ञानिक नहीं है – मूर्ख बनाने की ही बात है – और उल्टे मास्क पहनने से हमारे शरीर में ऑक्सीजन कम जाएगा और हमें ऑक्सीजन की कमी होने लगेगी – जिसे इन फार्मा माफियाओं ने कोरोना का लक्षण बताया है और फिर हमें कोरोना ग्रसित घोषित करके कोरेन्टाइन कर देंगे फिर हम उनके हाथों में – और फिर भगवान् के हाथों में ( यही उनका लक्ष्य है ) …

99.999 % लोगों ने वैक्सीन कंपनियों की फैक्ट शीट नहीं पढ़ी होगी !!! जिसमें पढ़े लिखे 100 % लोगों ने तो बिलकुल ही ध्यान ही नहीं दिया … – देखिये कंपनियों ने कितना स्पष्ट लिखा है कि यह वैक्सीन केवल आपातकालीन उपयोग के लिए ही है – साथ ही लिखा है कि वैक्सीन लेना अनिवार्य नहीं है – फिर भी लोगों ने लाइन में लग लग कर वैक्सीन ली – मानों ज्योनार में हलुआ बँट रहा हो – सरकार के साथ मिल कर इन फार्मा माफिया – दवाई डकैतों ने लोगों को मूर्ख समझ कर – मूर्ख बना कर अपना कई हज़ार करोड़ का धंधा कर लिया – और बे रोज़गार हो कर भोली जनता मास्क में अपना – सा मुँह लिए – सैनिटाइज़र से हाथ मलती रह गई …

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
sahabet giriş