अपने देश की संस्कृति और धर्म को बचाकर रखने का अधिकार हर देश के निवासियों को है। हर देश मानवतावाद में विश्वास रखता है और उसे विश्व के लिए उपयोगी भी मानता है, पर जब उसे कोई संप्रदाय इस प्रकार की चुनौती देता है कि उसके अपने देश की संस्कृति और धर्म को ही अस्तित्व के संकट से जूझना पड़ जाए तो उसके लिए मानवतावाद बाद की चीज हो जाता है-पहले उसके लिए अस्तित्व बचाना आवश्यक और अपरिहार्य हो जाता है। अस्तित्व का यह संकट उसके देश के निवासियों के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ की प्राणदायिनी शिक्षा देता है और वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए उठ खड़ा होता है। तब कुछ तथाकथित मानवतावादी और मानवाधिकारवादी खड़े होते हैं और वे खोखले राग से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने का अतार्किक प्रयास करते हुए कहते हैं कि एक ही संप्रदाय के विरूद्घ इस प्रकार का हिंसक वातावरण बनाना अमानवीय है। उन अज्ञानियों को कौन समझाये कि जब एक संप्रदाय विशेष के लोग इस देश का जीना हराम कर रहे थे, तब तुम कहां सो रहे थे? तुम्हारी नींद उस समय क्यों नहीं टूटी जब कुछ मुट्ठी भर लोग किसी देश के इतिहास को ही मिटाने के षडय़ंत्र रच रहे थे? आज जब चोरों की खनखनाहट को सुनकर घर का स्वामी ही जाग गया है और उसने चोरों को रंगे हाथों पकड़ लिया है तब तुम चोरों के समर्थन में आकर घडिय़ाली आंसू बहा रहे हों। ऐसे तथाकथित अज्ञानी मानवतावादियों को लज्जा आनी चाहिए जो मानवतावाद का अर्थ तक नहीं जानते और मानवतावादी बने घूमते हैं।
अपने पड़ोसी देश म्यांमार में आज जो कुछ भी हो रहा है वह कुछ ऐसा ही है जो हमने ऊपर वर्णन किया है। वहां के रोहिंग्या मुसलमान उस देश के लिए शरणार्थी रहे हैं और आज वही शरणार्थी वहां के निवासियों के लिए एक समस्या बन गये हैं। महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं वहां आम हो गयीं, लोगों को लूटना पीटना हर दिन की बात हो गयी। तब म्यांमार क्या करता? उसने इस प्रश्न का उत्तर यही खोजा कि अब-
विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत।
लक्ष्मण बाण संभाले हुं भय बिन होई न प्रीत।।
रामचंद्रजी लक्ष्मण से कह रहे हैं कि इस समुद्र से मार्ग देने के लिए याचना करते-करते तीन दिन हो चुके हैं और यह अपनी प्रकृति से बाज नही आ रहा है, इसलिए लक्ष्मण संसार के इस नियम को याद कर कि भय के बिना प्रीति होती ही नहीं है, इसलिए अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए हथियार उठा और उस मानवतावाद को थोड़ी देर के लिए भूल जा जो इस समय हमारे लिए घातक सिद्घ हो सकता है। म्यांमार ने यही किया। उसने अपने आदर्श धर्म सूत्र ‘जीओ और जाने दो’ को भी अस्तित्व की रक्षा के लिए या तो कहिये कि आत्मघाती मानकर देश, काल, परिस्थिति के अनुसार भुला दिया या फिर रोहिंग्या मुसलमानों को यह बता दिया कि ‘जीओ और जाने दो’ का एक अर्थ यह भी है कि निज अस्तित्व की रक्षा के लिए यदि संघर्ष भी करना पड़े या अहिंसा की रक्षार्थ हिंसा भी करनी पड़े तो वह भी उचित ही है। फलस्वरूप विश्व के शान्तिप्रिय धर्मों से एक बौद्घ धर्म के अनुयायियोंं ने हथियार उठा लिये और रोहिंग्या शरणार्थियों को यह कड़ा संदेश देना आरंभ कर दिया कि अब या तो तुम नहीं या हम नहीं। अप्रत्याशित रूप से जब रोहिंग्या मुसलमानों पर मार पडऩी आरंभ हुई तो वहां से वे भागने लगे। भागकर बांग्लादेश में पहुंचे, भारत की ओर भी बढऩे का प्रयास किया। यद्यपि 40000 रोहिंग्या मुसलमान भारत में किसी न किसी प्रकार पूर्व से ही पहुंचने में सफल हो गये हैं।
अब भारत में भी कुछ राष्ट्रविरोधियों को गला साफ करने का अवसर उपलब्ध हो गया है। यहां तो मानवाधिकार छद्म धर्मनिरपेक्षतावादियों के रूप में बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। इनका कहना है कि जब तिब्बती यहां आ सकते हैं तो रोहिंग्या मुसलमानों के आने पर आपत्ति क्यों हो रही है? ऐसे में रोहिंग्या मुस्लिमों के इन शुभचिंतकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि तिब्बती लोग जब भाारत आये थे तो उस समय उनका देश एक पड़ोसी साम्राज्यवादी देश चीन ने उनसे छीन लिया था। जबकि रोहिंग्या मुसलमान एक देश की शांति व्यवस्था को बिगाड़ते पाये गये और जब उसने उनके साथ सख्ती की तो वह एक चोर-उचक्के के रूप में वहां भागे हैं। इस प्रकार की प्रकृति के लोगों का भारत तो क्या कोई अन्य देश भी शरण देने को तैयार नहीं है। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के शब्दों में भारत तो वैसे भी मुसलमानों के लिए इस समय सुरक्षित नही रह गया है तो भारत पर इन रोहिंग्या मुसलिमों को जबरन शरण दिलाने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है? हमें स्मरण रखना चाहिए कि भारत में पंथनिरपेक्षता का विचार तभी तक जीवित है जब तक यहां हिन्दू बहुसंख्यक है। हिन्दू जैसे ही अल्पसंख्यक होगा वैसे ही यह देश (हिंदू राष्ट्र तो नहीं बन सका-हमारी मूर्खताओं के कारण) मुस्लिम राष्ट्र हो जाएगा। पश्चिम बंगाल में दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन एक मुस्लिम त्यौहार के कारण अगले दिन कराने की घोषणा ममता सरकार करती है-यह घोषणा वहां हिंदुओं की स्थिति परिस्थिति को बयान करती है कि ऐसा उन मुस्लिम कट्टर पंथियों के कारण हो रहा है जो 1947 में देश विभाजन के समय उस समय के कुछ मानवतावादियों ने देश में रख लिये थे और उन्हें पूर्वी पाकिस्तान में (आज का बांग्लादेश) में नहीं धकेलने दिया था। यदि वे उस समय उनके मुंह मांगे देश में भेज दिये जाते तो आज के नये पाकिस्तान की मांग करने की स्थिति में पहुंचे पश्चिम बंगाल की विस्फोटक परिस्थितियों को हम न झेल रहे होते।
केन्द्र की वर्तमान मोदी सरकार ने उचित ही कहा है कि रोहिंग्या मुसलिमों से देश की सुरक्षा को खतरा है। हम 1947 की गलती को पुन: दोहराकर इतिहास की सुई को 70 वर्ष पूर्व में ले जाकर नहीं घुमा सकते। 70 वर्षों ने हमें कई अनुभव दिये हैं, और यह बताया है कि देश की संस्कृति और धर्म में अनास्था रखने वाले लोग ही देश के विखण्डन की बात करते हैं। इससे पहले कि हमें इतिहास कूड़ेदान में फेंके हम इतिहास की मौन आवाज को सुन लें। वह हमें बता रहा है-
”मैं ही रूका न वक्त की रफ्तार देखकर, कहता रहा वह मुझसे खबरदार देखकर
यूं पढक़र उसने मुझे रख दिया एक तरफ, कि फेंक दे जैसे कोई अखबार देखकर।।”
भारत ‘अतिथि देवोभव’ की परम्परा का देश है। पर इस परम्परा की अपनी सीमाएं हैं। हर ऐरा गैरा नत्थू खैरा अतिथि नहीं होता है। अतिथि वह होता है जो विद्वान आप्त पुरूष हो और जो लोककल्याण के लिए अपने ज्ञान को संसार में बांटने का संकल्प लेकर लोगों का उद्घार करने के लिए संन्यासी हो गया हो। ऐसे लोग बिना किसी पूर्व सूचना के बिना तिथि निश्चय किये जब घर में आ जाते थे, तो लोग उनकी सेवा करना अपना धर्म मानते थे। ‘बीमार मानसिकता’ से प्रवेश पाना अलग चीज है और बीमारी को गले अलग चीज है, और बीमारी को भगाना चाहिए, ‘कल्याण’ को प्रवेश देकर सम्मानित करना चाहिए। भारत को ‘कल्याण’ ही देवता स्वरूप लगता है, बीमारी से तो वह दूर रहता है, यही भारत का धर्म है। इस धर्म को भारत स्वयं निभाना जानता है। इसे कोई उसे समझा नहीं सकता।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
otobet giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
otobet giriş
otobet giriş
otobet giriş
betyap giriş
betyap giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
betpark giriş
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
betpark giriş