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विशेष संपादकीय

नई संभावनाओं का प्रतीक बना योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश

आर्थिक क्षेत्र में ‘प्रिंसिपल ऑफ 4 एम’ अर्थात Man, Money, Material and Management बड़ा कारगर काम करता है। इस प्रिंसिपल की कसौटी पर उत्तर प्रदेश पहले दिन से खरा उतरने की क्षमता रखता था ,पर इसे ठीक से ‘मैनेज’ नहीं किया गया।
उसी का परिणाम था कि उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की पूर्व की सरकारों की घोषणा मात्र घोषणा बन कर रह गई। लोग उत्तम प्रदेश की बजाए उत्तर प्रदेश को ‘उल्टा प्रदेश’ कहकर सरकारों की घोषणा का उपहास करते थे। पर आज योगी आदित्यनाथ ने एक सक्षम और मजबूत मुख्यमंत्री के रूप में अपनी साख स्थापित कर उत्तर प्रदेश को वास्तव में ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ाया है।
25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश दुनिया के 6 देशों को छोड़कर सभी देशों से बड़ी आबादी वाला प्रदेश है। कहने का अभिप्राय है कि उत्तर प्रदेश की क्षमताएं और समस्याएं दोनों ही एक देश की बराबर की समस्याओं के समान समझी जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश की बराबर की ही जनसंख्या वाला पड़ोसी देश पाकिस्तान जहां बारूद की भट्टी पर दुनिया के विनाश की बात सोचता रहा, वहां उत्तर प्रदेश जैसा विशाल प्रदेश अपनी शांति और सद्भाव की नीति को अपनाकर देश की मुख्यधारा के साथ जुड़कर आगे बढ़ता रहा। योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश आज विभिन्न कंपनियों के साथ 18643 एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाला प्रदेश है। जिनके अंतर्गत 32.92 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रदेश सरकार को प्राप्त हुए हैं। फलस्वरूप आज का उत्तर प्रदेश गुजरात और मध्यप्रदेश से भी आगे निकल गया प्रदेश बन चुका है।
वास्तव में योगी आदित्यनाथ के कुशल प्रशासन के चलते प्रदेश में जिस प्रकार शांति व्यवस्था स्थापित हुई है, बदमाशी पर नियंत्रण लगा है और समाज विरोधी शक्तियों को अंकुश में रखने में मुख्यमंत्री सफल हुए हैं, उसी के परिणाम स्वरूप यह स्थिति बनी है कि आज विश्व भर के निवेशक उत्तर प्रदेश को अपने लिए सबसे सुरक्षित स्थान मान रहे हैं। निवेशकों के इस प्रकार आकर्षण का केंद्र बने उत्तर प्रदेश में 92 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावनाएं प्रबल हुई हैं। आज के सुरक्षित उत्तम प्रदेश के रूप में स्थापित हुए उत्तर प्रदेश में आम आदमी अपने आप को बहुत अधिक सुरक्षित अनुभव कर रहा है। जिन क्षेत्रों से लोगों का शाम ढलते निकलना कठिन होता था उनमें आज आधी रात को भी लोग सुरक्षित निकल कर अपने घर पहुंचते हैं।
सुरक्षा के इस भाव ने लोगों को बहुत बड़ी सीमा तक प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है ।कारोबार सुगमता के क्षेत्र में प्रदेश इस समय दूसरे स्थान पर है ,जबकि अबसे 6 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में 14 वें स्थान पर था। देश के तीव्र विकास की आवश्यकता को उत्तर प्रदेश ने बड़ी संजीदगी से अनुभव किया है, यही कारण है कि इस दिशा में उत्तर प्रदेश अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।
यह थोड़ी बात नहीं है कि अब से 6 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए लोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को ही प्राथमिकता देते थे, पर अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में निवेश हो रहा है। जिससे रोजगार की संभावनाएं प्रदेश के हर जिले में प्रबल हुई हैं। इसका एक लाभ यह भी होगा कि रोजगार की तलाश में जो लोग प्रदेश के विभिन्न जिलों से एनसीआर की ओर भागते थे वे अब अपने क्षेत्र में रुकेंगे। जिससे जनसंख्या असंतुलन को भी नियंत्रण में लाया जा सकेगा। जनसंख्या असंतुलन से हमारा अभिप्राय है कि जिस प्रकार लोग केवल एक स्थान विशेष अर्थात एनसीआर की ओर बढ़कर वहां जनसंख्या का दबाव बढ़ाते थे और प्रतिभा पलायन से प्रदेश के अन्य जिले पीड़ित चल रहे थे, उन सब स्थिति परिस्थितियों पर अब नियंत्रण लगेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएए के विरुद्ध आंदोलन के लिए भूमिका बना रहे लोगों को जिस प्रकार नियंत्रण में रखा था ,उससे उनके मजबूत और योग्य प्रशासक होने की छवि में वृद्धि हुई और प्रदेश को वे शांति पूर्वक उपद्रव और हिंसा के संभावित दौर से बचाकर निकालने में सफल हुए।
अबसे कुछ समय पहले सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में मुकेश अंबानी से लेकर कॉरपोरेट जगत की बड़ी बड़ी हस्तियों ने प्रदेश में कुल 33. 50 लाख करोड़ की राशि के निवेश की घोषणा की थी। इससे प्रदेश में 92 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने निश्चित हैं।
18 हजार से अधिक जिन समझौता विज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए हैं उनमें बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए 4. 28 लाख करोड रुपए और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए 9. 55 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव भी सम्मिलित हैं। सचमुच प्रदेशवासियों के लिए यह हर्ष का विषय है कि एक रोगी प्रदेश को योगी नेता ने बुरी हालत से बाहर निकाल लिया है। कभी वह भी समय था जब उत्तर प्रदेश में बहुत कम उद्योगपति निवेश करने के लिए तैयार होते थे ,पर आज का उत्तर प्रदेश उस बुरी हालत से बाहर निकल चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी को बनाया है। जिससे वह प्रदेशवासियों का मन जीतने में सफल हुए हैं। इसके अतिरिक्त निवेशकों के लिए भी यह आकर्षण का केंद्र बना है कि देश के प्रधानमंत्री प्रदेश से ही चुनकर जाते हैं। इस प्रकार की स्थिति में प्रदेश में नई संभावनाओं ने जन्म लिया है। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकेत पर 16 देशों के 21 शहरों में अंतर्राष्ट्रीय रोड शो किए हैं। पहले ऐसे रोड शो करने के लिए लोग जाते थे तो देश के लोगों की बड़ी कष्ट की कमाई को व्यर्थ में नष्ट करके चले आते थे। पर आज जिन टीमों ने इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय रोड शो में भाग लिया है, वह लगभग 7.12 लाख करोड का निवेश प्राप्त करने में सफल हुई हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने से पहले ऐसे लगता था कि जैसे शासन प्रशासन में बैठे लोग देश को भुखमरी और बेरोजगारी की हालत में ही रखने की इच्छा से प्रेरित होकर ऐसा कर रहे थे। वे चाहते थे कि यदि प्रदेश की जनता इसी प्रकार की फटेहाली की स्थिति में रहे, जिससे उन लोगों पर शासन करने का अवसर उन्हें प्राप्त होता रहे।
बिल्कुल ऐसी ही सोच को इंगित करते हुए एक बार भूटान के राजा ने कहा था कि वह अपने लोगों को इसलिए पढ़ने लिखने और आगे बढ़ने का अवसर नहीं देते कि ऐसा करने से उनके भीतर देश को छोड़कर बाहर की चमक दमक की दुनिया में जाने की प्रेरणा पैदा होती है। इसके अतिरिक्त शिक्षित लोग शासन की नीतियों के विरुद्ध उठ खड़े होने का साहस भी करने लगते हैं।
शासकों की इस प्रकार की सोच जनहितकारी सोच को प्रकट नहीं करती । ऐसी सोच से पता चलता है कि ऐसे शासक प्रजा के लिए एक बोझ हैं। यह बहुत ही प्रसन्नता का विषय है कि योगी आदित्यनाथ इस प्रकार की संकीर्ण सोच से बहुत ऊपर हैं। वे उसी राजधर्म के सम्यक निर्वाह में विश्वास रखते हैं जो इस देश के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना शक्ति से जुड़ा है।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की इस चेतना शक्ति को ही भारत ने वास्तविक प्रजातंत्र के रूप में अपनी स्वीकृति और अभिव्यक्ति प्रदान की है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना शक्ति जब जन-जन के मुंह से बोलने लगती है और जब जन-जन को इसका लाभ पहुंचने लगता है तब पता चलता है कि भारत की चेतना शक्ति किस प्रकार जन जन का विश्वास जीतकर उसको मुखरित और प्रफुल्लित करने की क्षमता रखती है ? आज हमको इसी प्रकार की चेतना शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक ‘भारत को समझो’ अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता और जाने-माने इतिहासकार एवं लेखक हैं)

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