Categories
भारतीय संस्कृति

धर्म और सनातन धर्म*

Dr DK Garg

भाग 4

धर्म और पंथ में अंतर् :
धर्म संस्कृत भाषा का शब्द हैं जोकि धारण करने वाली धृ धातु से बना हैं। “धार्यते इति धर्म:” अर्थात जो धारण किया जाये वह धर्म हैं। अथवा लोक परलोक के सुखों की सिद्धि के हेतु सार्वजानिक पवित्र गुणों और कर्मों का धारण व सेवन करना धर्म हैं। क्या धारण करना है ,ये कोई गुरु ,कथावाचक स्पष्ट रूप से नहीं बताता अपनी सुविधा अनुसार गोल गोल जलेबी बनाते है।
इसका स्पष्ट उत्तर महर्षि मनु ने दिया है की धर्म में धारण करने के लिए १० नियम है ,जिनमें एक भी काम करोगे तो अधर्म की तरफ जाओगे। इसका वर्णन भाग एक में कर चुके है।

इसलिए धर्म और पंथ की तुलना करना गलत है। धर्म का उल्टा अधर्म होता है। पंथ को धर्म कहना ठीक नहीं है।
पन्थ का शाब्दिक अर्थ विचारधारा , पथ या रास्ता है जिस पर हम किसी लक्ष्य को पाने के लिए अपने जीवन में चलते हैं ।

उदाहरण के लिए समाज की तरक्की के लिए राजनीति में वामपंथी या दक्षिणपंथी हो सकता है ।
ईश्वर को पाने के लिए कोई कबीरपंथी, नानकपंथी, ईसापंथी ( ईसाई) , मोहम्मदपंथी ( मोहम्मडन) हो सकता है जिसका अर्थ यह हुआ कि इन लोगों का सोचना है कि कबीर, नानक, ईसा, मोहम्मद के बताए रास्ते पर चलने से ईश्वर मिलेगा । इसके अतरिक्त वाम-पंथ, दक्षिण-पंथ भी पंथ हैं तो सारे वाद जैसे अस्तित्ववाद, पूँजीवाद, साम्यवाद, जैसे तमाम तरीके/ जरिये जो इंसान अपने जीवन, परिवार, और अपने समाज के लिए चुनता है उसे भी पंथ कहा जा सकता है। जबसे अंग्रेजी के रिलिजन शब्द का अनुवाद धर्म हुआ है , पंथ शब्द का प्रयोग बंद हो गया है और पंथों ने धर्म शब्द ओढ़ लिया है । वास्तविक धर्म शब्द कहीं गायब हो गया है
पंथ का दूसरा नाम मजहब भी है जो किसी व्यक्ति द्वारा निर्मित /रचित मार्ग है।

धर्म वेद में उल्लेखित है। ऋषि दयानन्द का कहना है की वेद सब सत्य विद्याओ की पुस्तक है ,वेद का पढ़ना ,पढ़ाना और सुनना और सुनाना सब श्रेष्ठ पुरुषो का परम धर्म है ,यानि धर्म से भी बढ़कर परम धर्म कहा है।
प्रश्न= क्या हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि धर्म सभी समान हैं अथवा भिन्न है? धर्म और मत अथवा पंथ में क्या अंतर हैं?
उत्तर: -हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि धर्म नहीं अपितु मत अथवा पंथ हैं। धर्म और मत में अनेक भेद हैं।
1. धर्म ईश्वर प्रदत हैं और जिसे ऊपर बताया गया हैं, बाकि मत मतान्तर हैं जो मनुष्य कृत है।
2. धर्म लोगो को जोड़ता हैं जबकि मत विशेष लोगो में अन्तर को बढ़ाकर दूरियों को बढ़ावा देते है।
3. धर्म का पालन करने से समाज में प्रेम और सोहार्द बढ़ता है, मत विशेष का पालन करने से व्यक्ति अपने मत वाले को मित्र और दूसरे मत वाले को शत्रु मानने लगता है।
4. धर्म क्रियात्मक वस्तु हैं मत विश्वासात्मक वस्तु हैं।
5. धर्म का आधार ईश्वरीय अथवा सृष्टि नियम है परन्तु मत मनुष्य कृत होने से अप्राकृतिक अथवा अस्वाभाविक है।
6. धर्म एक ही हो सकता हैं, मत अनेक होते हैं।
7. धर्म सदाचार रूप हैं अत: धर्मात्मा होने के लिये सदाचारी होना अनिवार्य है। परन्तु मत अथवा पंथ में सदाचारी होना अनिवार्य नहीं है।
8. धर्म ही मनुष्य को मनुष्य बनाता है , जबकि मत मनुष्य को केवल पन्थाई या मज़हबी अथवा अन्धविश्वासी बनाता है।

  1. धर्म में बाहर के चिन्हों का कोई स्थान नहीं है क्यूंकि धर्म लिंगात्मक नहीं है -न लिंगम धर्मकारणं अर्थात लिंग (बाहरी चिन्ह) धर्म का कारण नहीं है। परन्तु मत के लिए बाहरी चिन्हों का रखना अनिवार्य है जैसे एक मुस्लमान के लिए जालीदार टोपी और दाड़ी रखना अनिवार्य है।
  2. धर्म दूसरों के हितों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक देना सिखाता है जबकि मज़हब अपने हित के लिए अन्य मनुष्यों और पशुयों की प्राण हरने के लिए हिंसा रुपी क़ुरबानी का सन्देश देता है।

भाग 5

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş
holiganbet giriş
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
holiganbet