अधूरी सड़क से पूरा विकास संभव नहीं

images (36)

हरीश कुमार

पुंछ, जम्मू

केंद्र प्रशासित जम्मू कश्मीर बदलाव की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है. यदि अशांति के कुछ मामलों को छोड़ दिया जाए तो पहले की अपेक्षा इस केंद्र शासित क्षेत्र में विकास के कई स्वरुप देखने को मिले है. बड़ी संख्या में निवेशकों के यहां रुचि दिखाने से रोज़गार के अवसर बढ़ने की संभावना बन रही है. कई स्तरों पर विकास का काम जोरों शोरों से किये जा रहे हैं. चाहे फ्लाईओवर हो या रोड कनेक्टिविटी, ऐसा कोई जिला नहीं है, जहां काम में तेजी ना आए हों. पिछले कुछ सालों में इस काम में सबसे अधिक तेज़ी आई है. इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार का वह महत्वाकांक्षी विज़न है जिसके तहत इस क्षेत्र को पर्यटन के साथ साथ उद्योग के दृष्टिकोण से भी विकसित करना है.

परंतु विकास के इस दौर में केंद्र शासित क्षेत्र में कुछ इलाके ऐसे भी हैं जो इसमें पीछे छूटते जा रहे हैं. इन्हीं में एक जम्मू के सीमावर्ती जिला पुंछ का एक गांव मंगनाड भी है. जहां पहुंचने का रास्ता इतना जर्जर है कि वह सड़क कम पगडंडी अधिक नज़र आता है. यह लोगों की आवाजाही और उनकी जमीनों से जोड़ने के लिए एकमात्र रास्ता माना जाता है. यह रतोरा मोहल्ला से लोपारा तक लगभग 3 से 4 किमी तक है. इसकी महत्ता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि यह मंगनाड को शहर से जोड़ने का एकमात्र रास्ता है. कुछ वर्ष पूर्व सरकार ने इस रास्ते को मुख्य सड़क घोषित कर फंड भी जारी किया था ताकि इसकी हालत को सुधारा जा सके. इसके लिए सड़क के चौड़ीकरण के उद्देश्य से लोगों की निजी ज़मीनों का अधिग्रहण भी किया गया. लेकिन दो साल बाद भी आज तक इसका काम मुकम्मल नहीं हो पाया है.

ऐसे में स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर लोगों की जमीनों का अधिग्रहण करने के दो साल बाद भी सड़क मुकम्मल नहीं हो सकी है तो इस सड़क का क्या फायदा? इस संबंध में स्थानीय निवासी बाबूराम का कहना है कि यह सड़क केवल आवागमन का रास्ता मात्र नहीं है बल्कि विकास का पथ भी साबित होगा. यदि यह सड़क मुकम्मल होती है तो न केवल खेतों तक ट्रैक्टर का पहुंचना आसान हो जाएगा बल्कि फसलों को मंडियों तक भी आसानी से पहुंचाया जा सकेगा. वर्तमान में जब फसल तैयार हो जाती है तो किसान उसे अपने कंधों पर उठा कर काफी ऊंचाई वाला रास्ता तय करके मुख्य सड़क तक लाते हैं. इससे समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है. यदि यह रोड मुकम्मल हो जाए तो हमारी जमीनों तक सीधे ट्रैक्टर पहुंच सकेगा. इससे किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचेगा.

वहीं एक और स्थानीय नागरिक सोहनलाल वर्मा का कहना है कि सड़क के विकास की घोषणा के बाद दो वर्ष पूर्व काफी ज़ोरों शोर से इसका काम शुरू हुआ था. जेसीबी लगा कर इसे ठीक किया जाने लगा था. इससे हमें उम्मीद बंधी थी कि विकास में हमारी भागीदारी भी सुनिश्चित हो सकेगी. गांव और क्षेत्र के विकास में हमारा भी बराबर का योगदान होगा. लेकिन हमारी आशाएं आज तक पूरी नहीं हो सकी. अचानक ही सड़क का काम बंद हो गया और फिर आज तक यह मुकम्मल नहीं हो सका. धीरे धीरे हमारी उम्मीदें टूटती जा रही हैं. फिर भी आशा की एक किरण बाकी है और ऐसा लगता है कि कभी तो सरकार और स्थानीय प्रशासन हमारी उम्मीदों को पूरा करेगी और यह सड़क मुकम्मल होगा.

एक स्थानीय बुज़ुर्ग सुखचैन लाल कहते हैं कि हमारी तीन पीढ़ियां गुजर चुकी हैं जिन्होंने अपने कंधे पर फसल उठाकर एक लंबा सफर तय करके उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाते रहे हैं. फिर वहां से गाड़ी का इंतजाम करके मंडी पहुंचाते थे. सड़क बनाने का काम शुरू होने पर आस जगी थी कि अब नई पीढ़ी को वह दुःख झेलना नहीं पड़ेगा जो कष्ट हमने सहे हैं. लेकिन यह सड़क अभी भी पूरी तरह मुकम्मल नहीं हो पाई है.मैं उम्मीद कर रहा था कि अपने जीवनकाल में इस सड़क को मुकम्मल होते और विकास की लौ जलते देखूंगा, लेकिन शायद यह मुमकिन नहीं होगा.

कुछ अन्य ग्रामीणों का मानना है कि कच्ची सड़क से बुज़ुर्गों के साथ साथ गर्भवती महिलाओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. प्रसव पीड़ा के समय उचित समय पर एम्बुलेंस पहुंच नहीं पाती है. ऐसे में यदि यह सड़क बन जाती है तो गांव के अंदर तक गाड़ियों की आवाजाही आसानी से हो सकती है. वहीं लोपारा के सरपंच परमजीत बताते हैं कि यह रास्ता रोड एंड ब्रिज डिपार्टमेंट के अंतर्गत आता है. ऐसे में उन्होंने डिपार्टमेंट के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से मुलाकात कर उन्हें अधूरी सड़क से होने वाली कठिनाइयों से अवगत कराया है.

परमजीत के अनुसार एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने उन्हें बताया कि इसके निर्माण के लिए पांच करोड़ 62 लाख का प्लान तैयार करके वित्त विभाग की मंज़ूरी के लिए भेजा जा चुका है. जैसे ही अनुमति मिलेगी सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया जायेगा. इसके बन जाने से आम लोगों के साथ साथ स्कूली बच्चों को भी लाभ होगा जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रतिदिन दूर जाना होता है, लेकिन जर्जर सड़क के कारण अक्सर उनकी गाड़ी छूट जाती है. बहरहाल, इस सड़क के निर्माण से न केवल गांव में विकास के नए द्वार खुल जाएंगे बल्कि आम लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा क्योंकि अधूरी सड़क से विकास का पूरा खाका तैयार करना मुमकिन नहीं है. (चरखा फीचर)

Comment:

betpark
mavibet giriş
betpark giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet güncel
imajbet güncel giriş
imajbet giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
safirbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano güncel
betnano güncel giriş
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet güncel giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
Grandpashabet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
norabahis giriş
artemisbet giriş
imajbet giriş
holiganbet güncel
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet
safirbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
holiganbet giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
betpark giriş