shiv_temple_in_ratlam (1)

आकिशे तारकं लिंगं पताले हाटकेश्वरम।
भूलोके च महाकालो लिंग्गनय नमोस्तुते।।
मालवा में शैव परंपरा को जानने, पहचानने और समझने के लिए हमें पौराणिक रहस्यों के अनुशीलन की आवश्यकता है। क्योंकि शैव परंपरा हिंदू धर्म का अभिन्न अंग है और हिंदू धर्म की आधारशिला वेद और पुराण हैं। विश्व वांग्मय में वेदों और पुराणों का स्थान अप्रतिम और सर्वश्रेष्ठ है। क्योंकि लौकिक और पारलौकिक, जल- थल -नभ, जीवन और मरण से संबंधित कोई भी ऐसा प्रसंग नहीं है, जिसका भाष्य वेदों – पुराणों में नहीं हुआ हो। सार्वभौमिक एवं सनातन वेदों पुराणों में आख्यान, उपाख्यान एवं किंवदंतियों के माध्यम से हिंदू देवी – देवताओं का प्रादुर्भाव हुआ है। इसलिए वेद और पुराण हिंदू धर्म,संस्कृति और सभ्यता का भाष्य व गौरव गाथा है।
वेद -पुराण हिंदुओं की अक्षुण्ण एवं अभूतपूर्व निधि है। क्योंकि हिंदू धर्म में अवतारवाद और मूर्ति पूजा की अवधारणा प्रतिपादित है । एतिहासिक दृष्टि से भारत भू पर हिंदू धर्म जिसे सनातन धर्म के नाम से भी पुकारा जाता है, के बारे में चार युग का भाष्य प्रमाणित रुप से उपस्थित है। आदि अनादि काल अर्थात आखेट अवस्था के बाद सतयुग 1728000 वर्ष, त्रेता युग 1296000 वर्ष, द्वापर युग 864000 वर्ष और कलयुग 432000 वर्ष का व्यापक वर्णन पुराणों में मिलता है।
शिव को समझना है तो भगवान विष्णु और ब्रह्मा तथा उनके अवतारों को जानना यहां प्रासंगिक है। शिव पुराण के अनुसार शिव स्वयंभू है, लेकिन विष्णु पुराण के अनुसार शिव को विष्णु के माथे के तेज़ से उत्पन्न हुआ बताया गया है। अनादि शिव ने ही अपने शरीर पर अमृत मल कर अपने शरीर और अमृत से श्रीहरि विष्णु को उत्पन्न किया तथा श्री हरि ने अपनी नाभि से ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया।** यहां यह भी जानकारी प्रासंगिक है कि सतयुग में भारत भू को “जम्मू दीप” अर्थात ‘हमारी पृथ्वी’ (our land )की संज्ञा से पुकारा जाता था और लोक प्रकृति की पूजा करते थे। इस युग में ज्ञान और ध्यान की प्रधानता थी। प्रजा, पुरुषार्थ सिद्धि कर अपने को कृतज्ञ समझती थी। धर्म सर्वत्र सर्वोपरि एवं अपने पूर्ण रूप में था । सतयुग की सर्वश्रेष्ठ विशेषता यह थी कि जो सत्य को नहीं मानता था अथवा सत्य को मिटा देना चाहता था , उसका समाज, राष्ट्र और धर्म में कोई स्थान नहीं होता था।
पौराणिक साक्ष्य के अनुसार सतयुग के प्रथम देवता एवं राजा भगवान रामचंद्र जी माने जाते हैं । भगवान राम विष्णु के सातवें अवतार हैं। भगवान राम ने समस्त लोकों को मित्रता और मर्यादा में रहने का संदेश दिया । इसलिए वह मर्यादा पुरुषोत्तम राम हैं। तब प्रश्नोत्तर उठता है कि भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आराध्य देवता कौन थे ?
पुराणों और वेदों में इसका प्रसंग मिलता है कि “भगवान राम शिवलिंग अर्थात शिव की पूजा- आराधना करते थे। अतः भगवान शंकर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम जी के स्वामी है। रामेश्वर अर्थात राम के ईश्वर। इसका एक और अर्थ व्याप्त है -राम है ईश्वर अर्थात वह है रामेश्वर।
मालवा और महाकाल के संदर्भ में हमारे पुराणों में एक और अद्भुत प्रसंग मिलता है।वह यह है कि ‘श्री राम शिव जी की भक्ति करते थे, लेकिन सत्य का उद्घाटन यह है कि भगवान राम ‘सदाशिव’ अर्थात महाकाल अर्थात काल के भगवान अर्थात प्रकृति की पूजा अर्चना करते थे।
अब अवतारवाद को समझने की चेष्टा करते हैं। सनातन धर्म में तीन देव प्रमुख माने जाते हैं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश अर्थात शिव। पुराणों पर से पर्दा उठाते हैं तो ज्ञात होता है कि भगवान विष्णु दशावतारी हैं। लेकिन शिव 108 नामधारी , 24 अवतारी और 19 रूद्र अवतारी हैं! पौराणिक आख्यान एवं भाष्य के अध्ययन, चिंतन और मनन से सिद्ध होता है कि सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीव जगत का निर्धारण व प्रसार किया। इसलिए शिव आदि देव हैं। आदिनाथ और आदिश है। “लिंग हस्त: स्वयं रूद्रो “अर्थात जिसके हाथ में ब्रह्मांड के भार का अवलंबन है, वह है भगवान शंकर। संस्कृत भाषा में काल का अर्थ है समय और मृत्यु। अविनाशी अर्थात अजन्मा। शिव न आदि है और न अंत। शिव विनाशक की भूमिका निभाते हैं ।जब कुछ नहीं था तब शिव थे और जब कुछ नहीं होगा तब भी शिव रहेंगे ! संहारक कहे जाने वाले भगवान शिव ने देवों की रक्षा करने हेतु जहर पिया था और नीलकंठ कहलाए। शिव के साथ-साथ ब्रह्मा और विष्णु ने भी धरती पर जीवन की उत्पत्ति और पालन का कार्य किया। इस प्रकार डार्विन के विकासवाद सिद्धांत और हिम युग सिद्धांत के अनुसार देवता,गंधर्व ,यक्ष और मनुष्य का प्रादुर्भाव धरती पर होता चला गया।
इस हिसाब से मालव अर्थात लक्ष्मी जी की निवास स्थली अर्थात मालवा का पठार।जिसका निर्माण ज्वालामुखी के उद्गार से बना है। भारत भूगर्भिक इतिहास के हिसाब से मालवा का पठार सबसे प्राचीन भूभाग है। इसके गर्भ में ठोस लावा विद्यमान है। इसलिए मालवा का पठारी इलाका भूगर्भिक हलचलों से प्रायः मुक्त माना जाता है। इस ‘मालव’ नाम से भी जाना जाता है। मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग, राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी भाग में गठित यह धन- धान्य और खनिज से परिपूर्ण क्षेत्र प्राचीन काल से ही एक स्वतंत्र राजनीतिक एवं भौगोलिक इकाई रहा है । ऐसी मान्यता है कि ‘मालव’ या “मालवी” जनजाति की बहुलता के आधार पर इसका नाम मालवा पड़ा।
730 ईसा पूर्व मालवा पर लगभग 547 वर्षों तक भील राजाओं ने शासन किया, जिसमें राजा धन्ना भील प्रमुख था। उसने आसपास के कई राजाओं को चुनौती दी थी । इस प्रकार के उपस्थित कथाओं के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि मालवा प्रांत के प्राचीन राजा प्रकृति पूजक थे। आज भी भील आदिवासी प्रकृति प्रेमी और पूजक है । पौराणिक आख्यानों में यह भी निर्विवाद सिद्ध होता है कि प्रकृति का दूसरा नाम ही भगवान ‘शिव” है ।इस हिसाब से मालवा में शिव पूजन परंपरा ईसा के 370 वर्ष पूर्व से है।
इतिहास में भील जनजाति का उल्लेख सर्वप्रथम ईसा पूर्व चौथी सदी में मिलता है । यह जाति अथवा समुदाय प्रारंभ में पंजाब और राजपूताना क्षेत्र में निवास करती थी। सिकंदर से युद्ध में पराजित हो कर दक्षिण की ओर पलायन कर गई और अवंति के आसपास के उपजाऊ क्षेत्रों में जीवन यापन करने लगी। यह जातिय समुह पंजाब के मालवा नामक स्थान से यहां आया । इसका प्रमाण यह है कि आज भी पंजाब का एक सुबा मालवा के नाम से पुकारा जाता है। पंजाब में मालवा सतलुज के दक्षिण वाले क्षेत्र को कहते हैं ।इसके अंतर्गत हरियाणा और दक्षिणी- पश्चिमी राजस्थान का मरुस्थल भाग आता है। इस क्षेत्र के लोग पंजाबी कि उप बोली मलवाई बोलते हैं। संस्कृत में ‘मालव’ का अर्थ होता है देवी लक्ष्मी के आवास का हिस्सा। मालवा का नाम नर्मदा – चंबल- क्षिप्रा-वेतवा-धसान-माही- कालीसिंध-पार्वती आदि मौजूदा नदियों वाले उपजाऊ जमीन में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौतिक क्षेत्र में बसने वाले लोगों ‘मालव’अथवा “मालवी” अथवा *मालवीय * नामक जाति के आधार पर पड़ा है, सर्वाधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। वर्तमान में मालवा लगभग 47760 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसके अंतर्गत धार, झाबुआ, रतलाम, देवास, सीहोर राजगढ़, श्योपुर, गुना, ग्वालियर ,उज्जैन, भोपाल और विदिशा आदि जिले आते हैं। जनसंख्या सर्वे के अनुसार उपरोक्त लगभग सभी जिलों में *मालवीय बलाई समाज** के लोगों की संख्या बहुतायत में है । यह जातिय समुह हिन्दू धर्मावलंबी है और भगवान शिव के परम भक्त हैं। शिव के अवतार भेरू और हनुमान मालवीय बलाई समाज के आराध्य देव हैं।
मालवा प्रांत के वर्तमान विस्तार में उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, खण्डवा जिले का ओंकारेश्वर मंदिर, आगर जिले का बैजनाथ महादेव मंदिर, महेश्वर का रावणेश्वर मंदिर और विश्व विख्यात राजा राजेश्वर मंदिर, तराना का तिलकेश्वर मंदिर, देवास का बिलावली मंदिर, ग्वालियर का मोटेश्वर महादेव मंदिर, गुना का केदारनाथ मंदिर, सारंगपुर का पिपलेश्वर महादेव मंदिर,जाटोली का शिव मंदिर, रतलाम का विरूपाक्ष महादेव मंदिर (इसे 13 वां ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है), झाबुआ का नर्मदेश्वर महादेव मंदिर,पेटलावद का नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर,बदनावर का उडनिया मंदिर,सिंदुरी और नमर्दा संगम का शूलपाणीश्वर महादेव मंदिर,नीमच काकिलेश्वर महादेव मंदिर, महिदपुर का श्रीधुर्जटेश्वर महादेव मंदिर,दंगवाडा (बड़नगर)का बोरेश्वर महादेव मंदिर, भोजपुर का शिव मंदिर, (विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग) इटारसी का तील सिंदूर मंदिर, होशंगाबाद का मौनेश्वर धाम मंदिर, सीहोर का कोटेश्वर मंदिर आष्टा का शंकर मंदिर और मंदसौर का पशुपतिनाथ
( 8 मुंह ) मंदिर आदि की उपस्थिति मालवा की दक्षिणी सीमा से लेकर दक्षिण में नर्मदा घाटी तथा पूर्व में विदिशा से लेकर राजपूताना की सीमा के मध्य का भूभाग जिसका प्रतिनिधित्व हिंदू समाज करता है। शिव ही शिव है।शैव ही शैव हैं।
इस प्रकार भौतिक रूप से पश्चिम में माही नदी से लेकर पूर्व में धसान नदी तक तथा उत्तर में चंबल नदी से लेकर दक्षिण में नर्मदा नदी तक मैदानी, पठारी, पर्वतीय,ऊंचा-नीचा सारा का सारा मालवा, मालवा के लोग और मालवा की माटी का कण कण शिवमय
होकर मातृ शक्ति और पितृ भक्ती के माध्यम से ब्रह्मा विष्णु और महेश का ऋण चुकाने में मग्न है।जन जन का महादेव। नगर नगर डगर डगर महादेव।। हर हर महादेव।।


डॉ बालाराम परमार’हंसमुख’
लेखक, स्तंभकार, शिक्षा शास्त्री,पौराणिक ग्रंथ स्वाध्यायी , कार्यकारी अध्यक्ष मालवा की माटी व स्वतंत्रता सेनानी अमर जी मालवीय विचार मंच, मालवा प्रांत एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय संगठन।
Sent from Yahoo Mail on Android

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
timebet
timebet
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
vaycasino
vaycasino giriş
gobahis giriş
gobahis giriş
vdcasino giriş
pusulabet giriş
betorder giriş
betorder giriş
ikimisli
ikimisli
ikimisli