जब स्वामी श्रद्धानन्द 12 कोस पैदल चलकर भैंसवाल पहुंचे

images (9)

लेखक :- आचार्य विष्णुमित्र जी
पुस्तक :- भक्त फूलसिंह जीवन चरित
प्रस्तुतकर्ता :- अमित सिवाहा
गुरुकुल खोलने के लिये आप उपयुक्त स्थान देखने के लिए हरियाणा प्रान्त में तीन वर्ष तक घूमते रहे परन्तु आपको कोई उपयुक्त स्थान गुरुकुल खोलने के लिए न मिला । इसी कार्यक्रम को मन में रख कर आप आवली गांव में आये उस दिन उस गाँव के प्रतिष्ठित पुरुष चौधरी गणेशीराम जी अपने भतीजे बलदेव का दसूटन कर रहे थे ( ये बलदेव आगे चलकर गुरुकुल के योग्य स्नातक हुए ) आप भी उस उत्सव में सम्मिलित हुए । उस दसूटन में ग्रामों के लोग एकत्रित हुए थे । आपने देखा कि लोग एक स्थान पर बैठे हैं वह स्थान बहुत मलिन है तो आपने इधर – उधर दृष्टि दौड़ाई उनको एक झाड़ मिली । आपने उस झाड़ को लेकर सफाई करनी आरम्भ कर दी ।
जब लोगों ने विशेष तथा चौधरी गणेशीराम जी ने एक दाढ़ी वाले तेजस्वी पुरुष को झाड़ देते हुए देखा तो वे बड़े लज्जित हुए तथा आपसे प्रार्थना की कि आप ऐसा काम न करें इससे मेरे ऊपर पाप चढ़ता है । यों कह कर आपके हाथ से झाड़ लेकर स्वयं सफाई की । भक्त जी ने कहा कि मैं सफाई कर देता हूँ आप के ऊपर बहुत काम हैं परन्तु आपको ऐसा न करने दिया ।
उपस्थित लोगों ने आपके आने का कारण पूछा , तथा किस लक्ष्य से आप इधर उधर फिर रहे हैं इसको भी जानना चाहा । इस पर आपने उनके सामने थोड़े से शब्दों में अपने विचार प्रकट किये । जिसमें आपने बतलाया कि मेरी इच्छा है कि आने वाली सन्तान को सुधारने के लिए हरियाणा प्रान्त में बालकों के चलन की ऊँचा करने के लिए तथा उनको वेदोक्त शिक्षा दिलाने के लिए मैं गुरुकुल को खोलना चाहता हूँ । इसी लक्ष्य को लेकर मैं तीन वर्ष से इधर उधर फिर रहा हूँ । मुझे पूर्ण आशा है कि आप सब इस कार्य में मेरी तथा इस इलाके की सहायता करेंगे ।
आपने जो विचार उपस्थित जनता के सम्मुख रखे उससे सब ही बहुत प्रभावित हुए । वहां के कार्य से निवृत्त होकर आप कुछ व्यक्तियों के यह कहने पर कि चलो भैंसवाल गाँव में सम्भवतः आपकी गुरुकुल खोलने की इच्छा वहां पूर्ण हो जावे , कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों को साथ लेकर भैंसवाल गाँव में आये । वहाँ भी आपने अपनी इच्छा प्रकट की । गांव के लोगों ने आपकी इच्छा का स्वागत किया तथा आपसे कहा कि हम गुरुकुल खोलने के लिए मीठान ठोले की १५० बीघा भूमि आपको दान में देंगे । आपको यह बात बड़ी पसन्द आई । यह स्थान गांव से एक कोस दूर था । कई अन्य गांव भी इससे लगभग एक – एक कोस दूर थे। समीप ही एक जल का नाला था । इस भूमि दक्षिण की ओर दूसरे गांव आंवली की भूमि का जंगलीय स्थान था जो इस भूमि से लगा था । इस प्रकार यह स्थान गुरुकुल खोलने के लिए सर्वथा उपयुक्त था । यहां की जनता में गुरुकुल खोलने का उत्साह था । वेद धर्म के प्रचार के लिए उनमें बड़ी भारी लगन थी ।
अब आप गुरुकुल खोलने के कार्यक्रम को पूर्ण करने के लिए स्वामी श्रद्धानन्द जी महाराज के पास देहली में आये । उनके सामने अपनी गुरुकुल खोलने की इच्छा प्रकट की । स्वामी जी ने आपसे सारी बातें पूछी । आपने स्वामी जी को बतलाया कि गुरुकुल खोलने के लिए वहां भूमि भी मिल गई है तथा वहाँ की जनता गुरुकुल खोलने के लिए बहुत उत्साहित है ।
स्वामी जी आपकी बातों को सुनकर बड़े प्रसन्न हुए । स्वामी जी ने आने की तिथि बतला दी । निश्चित तिथि पर आप स्वामी जी को लेने जन – समूह के साथ सोनीपत पहुँचे । स्वामी जी को गुरुकुल में ले जाने के लिए सोनीपत एक रथ लाया गया । स्वामी जी ने जब देखा कि जनसमूह उनको लेने आया हुआ है तब वे बड़े प्रसन्न हुए । वे उस रथ पर न बैठे । उन्होंने कहा कि मैं भी आप लोगों के साथ पैदल ही भैंसवाल तक चलूंगा । उन दिनों बारह – बारह कोस तक गुरुकुल में जाने के लिए न रेल गाड़ी थी तथा न कोई मोटर की पक्की सड़क थी । इस लिए स्वामी जी के साथ यह जनसमूह १२ कोस तक भैंसवाल पहुँचने के लिए स्वामी जी के पीछे – पीछे पैदल चला । जो भी सुनता वह ही स्वामी जी के साथ हो लेता । इस प्रकार प्रातः चलकर स्वामी जी उस जनसमूह के साथ दोपहर गुरुकुल भूमि में पधारे ।
वहां आगे और भी बड़ा भारी जनसमूह उपस्थित था । उसने स्वामी जी को देख कर ” स्वामी श्रद्धानन्द जी की जय हो , स्वामी दयानन्द जी की जय हो , वैदिक धर्म की जय हो ” के नारे लगाये । उस अभूतपूर्व जनता के उत्साह को देख कर स्वामी जी अत्यन्त प्रभावित हुए । वहां का प्राकृतिक दृश्य भी आपको बड़ा पसन्द आया । तब स्वामी जी महाराज ने इस मन्त्र से उपस्थित जनता के सामने अपने विचार रखे :
उपह्नरे गिरिरणां संगमे च नदीनाम् धिया विप्रो अजायत।
॥ यजुर्वेद |
मेरे प्रिय बन्धुओं ! मैं आज इस स्थान को तथा आपके प्रेम को देख कर आनन्द विभोर हो गया हूँ । वेद में लिखा है कि जंगल की गिरि कन्दराओं में तथा नदियों के संगम में विद्वान् , धर्मात्मा , तपस्वी विद्वान् पैदा होते हैं । यद्यपि यहां पहाड़ नहीं हैं , नदियाँ भी नहीं हैं तो भी जो एकान्तता तथा पवित्रता ऐसे स्थलों पर होती है उसको मैं यहाँ देख रहा हूँ । हरियाणे के विशेषतया जाट जन्म से ही आर्य होते हैं । वस्तुतः हरियाणे की भूमि आर्य भूमि कहलाने की अधिकारी है । यहां के मनुष्य मांस मदिरा आदि से सर्वथा दूर हैं यहां का भोजन दूध , दही तथा शुद्ध सतोगुणी होता है । मैंने जो उत्साह आप में देखा है वैसा उत्साह दूसरे स्थानों पर मिलना कठिन है । मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि यह भूमि हरियाणे के आर्यों के नेतृत्व का स्थल होगा । धैर्य , उत्साह , विश्वास से कार्य करते रहें , भगवान् आपके इस महान उद्देश्य को अवश्य पूरा करेंगे ।
इसके अनन्तर पूज्य स्वामी जी के हाथों गुरुकुल की आधार शिला गुरुकुल भूमि में रखवाई गई । आधारशिला जब रखी जा रही थी तब जय – जयकारों की ध्वनि चारों ओर सुनाई दे रही थी । गांवों के लोग सैकड़ों मन दूध उस अवसर पर अपने घरों से लेकर उपस्थित जनता को पिलाने के लिए लाये थे । सब लोगों को खूब दूध पिलाया गया फिर भी बहुत सा दूध बच गया । इसपर ग्राम वालों ने यह कह कर ‘ इस भूमि मैं सदैव दूध की नदी बहती रहे जिस तरह से अब बह रही है ‘ वह दूध वहीं पर बहा दिया । यह सब प्रताप या प्रभाव हमारे चरित्र नायक महात्मा फूलसिंह का था । गुरुकुल की आधार शिला १९१९ में रखी गई थी । वह दिन हरियाणा प्रान्त के लिए विशेष तथा भैंसवाल गांव के लिए सौभाग्य का दिन था जिस दिन उस जंगल में मंगल हुआ । जब तक यह गुरुकुल रहेगा तब तक भैंसवाल गांव का नाम भी अमर रहेगा ।
1919 में जंगल में मंगल कर दिया,
भैंसवाल का गुरुकुल देखो बस निशानी याद है।
क्या तुम्हें भक्त फूल सिंह की वो कहानी याद है?

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino
vdcasino
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
betnano
betnano
betnano