आखिर राजस्थान कांग्रेस का घमासान कहां जाकर रुकेगा ?

राजस्थान कांग्रेस का घमासान

-रमेश सर्राफ धमोरा

राजस्थान कांग्रेस में मचा घमासान थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पिछले 25 सितंबर को जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक का पार्टी विधायकों द्वारा बहिष्कार करने की घटना के बाद राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई हैं। पार्टी के नेता एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर बयान बाजी कर रहे हैं। पार्टी में अनुशासन नाम मात्र का भी नहीं बचा है। कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के उपरांत भी नेता एक दूसरे की टांग खिंचाई कर मनमाने बयान दे रहे हैं। इससे आम जन में कांग्रेस की नकारात्मक छवि बन रही है।

25 सितंबर को जिस तरह से गहलोत समर्थक विधायकों ने गुटबाजी कर पार्टी आलाकमान के पर्यवेक्षक व वर्तमान में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे व कांग्रेस स्टेरिंग कमेटी के सदस्य तथा तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अजय माकन द्वारा बुलाई गई विधायक दल की बैठक का बहिष्कार किया था। उसका परिणाम कांग्रेस को आने वाले लंबे समय तक भुगतना पड़ेगा। उस घटना से जहां पार्टी का अनुशासन तो तार-तार हुआ ही था। वही नेताओं में आपसी गुटबाजी भी इस कदर बढ़ गई कि एक गुट के नेता दूसरे गुट के नेता को देखना भी पसंद नहीं कर रहे हैं। सचिन पायलट समर्थक नेता जहां आगामी चुनाव को देखते हुए पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। वही अशोक गहलोत समर्थक नेता किसी भी सूरत में पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनने देने का प्रयास कर रहे हैं।

गहलोत समर्थक विधायकों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी से बगावत कर सचिन पायलट व उनके समर्थक विधायक गद्दारों की श्रेणी में आ चुके हैं। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री कैसे बनाया जा सकता है। उस समय यदि अशोक गहलोत सतर्क रहकर विधायकों को एकजुट नहीं करते तो पायलट समर्थक विधायक राजस्थान में भाजपा से मिलकर कांग्रेस की सरकार गिरा चुके होते। मगर मुख्यमंत्री गहलोत की सतर्कता के चलते ही सरकार बच पाई थी।
राजस्थान में सरकार गिराने का प्रयास करने वाले विधायक ही अब अपने नेता सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जिसे किसी भी स्थिति में पूरा नहीं होने दिया जाएगा। 25 सितंबर को भी पायलट को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए ही पूरा ड्रामा रचा गया था। हालांकि उस दिन गहलोत समर्थक विधायक ऐसी हिमाकत कर बैठे जो अब उनके गले पड़ गई है। जिसे गहलोत समर्थक ना निगल सकते हैं ना उगल सकते हैं। उस घटना के बाद जहां पायलट समर्थक विधायक फ्रंट फुट पर आकर खेल रहे हैं। वहीं गहलोत समर्थक विधायक बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं।
25 सितंबर की घटना के मुख्य सूत्रधार रहे कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी व पर्यटन निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ को कांग्रेस अनुशासन समिति द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जिसका तीनों नेताओं ने जवाब भी दे दिया था। मगर लंबे समय तक अनुशासन समिति द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने व अनुशासन समिति के निशाने पर आए तीनो नेताओं को प्रदेश सरकार व संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने के विरोध में राजस्थान के प्रभारी महासचिव अजय माकन ने कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा भेजकर किसी अन्य को राजस्थान का प्रभारी बनाने की मांग से राजस्थान की राजनीति में फिर से एक नया बवंडर उठ गया है।

माकन ने अपने इस्तीफे में लिखा है की जब आलाकमान के निर्देश की अवहेलना के मामले में जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है तो नैतिक आधार पर उन्हें इस पद पर रहने का अधिकार नहीं है। माकन के इस्तीफे को गहलोत गुट पर दबाव के रूप में देखा जा रहा है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि राजस्थान के प्रकरण में कांग्रेस आलाकमान द्वारा कोई कार्यवाही नहीं कर उसे ठंडे बस्ते में डाले जाने के कारण माकन ने इस्तीफा देकर पूरे प्रकरण को एक बार फिर नए सिरे से जिंदा कर दिया है।

यहां खास बात यह है कि अगले महीने के प्रारंभ में ही राहुल गांधी द्वारा निकाली जा रही भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान से होकर गुजरेगी। माकन के इस्तीफे से अनुशासन समिति को गहलोत समर्थक तीनों नेताओं पर कार्यवाही करनी होगी। माकन के स्तीफे की घोषणा के बाद ही तीनों नेताओं को राहुल गांधी के यात्रा कार्यक्रम के लिए बनी कमेटी से भी हटा दिया गया है। इन्हें सरदार शहर विधानसभा उपचुनाव में भी कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। इतना ही नहीं इन तीनों नेताओं को गुजरात विधानसभा चुनाव से भी अलग कर दिया गया है।

राजस्थान में एक साल बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में जहां पार्टी के सभी नेताओं को एकजुट होकर अगले विधानसभा चुनाव जीतने की तैयारी करनी चाहिए थी। वहीं राजस्थान कांग्रेस में इसका उल्टा हो रहा है। यहां कांग्रेस के सभी नेता गुटों में बंटे हुए हैं तथा एक दूसरे को नीचा दिखाने व एक दूसरे की टांग खिंचाई करने में लगे हुए हैं। गहलोत पायलट विवाद एक बार फिर नए सिरे से उठ खड़ा हुआ है। पहले जहां गहलोत समर्थक पायलट गुट के नेताओं को बगावत करने वाला कहकर उनको पार्टी की मुख्यधारा से अलग-थलग रखते थे। वही 25 सितंबर की घटना के बाद पायलट गुट गहलोत गुट पर हमलावर है।

पायलट गुट के नेता मुख्यमंत्री गहलोत पर पार्टी आलाकमान की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हैं। पायलट समर्थक मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा तो खुलेआम कह रहे हैं कि यदि पायलट को शीघ्र ही मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो अशोक गहलोत के नेतृत्व में चुनाव जीतना मुश्किल ही नहीं असंभव है। गुढ़ा ने तो यहां तक कह दिया है कि यदि गहलोत के नेतृत्व में ही पार्टी चुनाव लड़ती है तो विधायकों की संख्या दहाई के आंकड़े तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगी। इतने ही विधायक जीत पाएंगे जो एक फॉर्च्यूनर गाड़ी में बैठ कर यात्रा कर सकें। कांग्रेस के लिए इससे हल्की बात और क्या होगी।

पार्टी विधायक दिव्या मदेरणा लगातार गहलोत सरकार के मंत्रियों को कटघरे में खड़ा कर रही हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ओबीसी के आरक्षण के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर वादा खिलाफी का आरोप लगा रहे हैं। कई विधायक नए जिलों के गठन को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देशों की कोई भी पार्टी नेता परवाह नहीं कर रहा है। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास विभागीय सचिवों की गोपनीय रिपोर्ट भरने को लेकर मंत्रियों को अधिकार देने की मांग कर रहे हैं। गहलोत समर्थक मंत्री महेश जोशी, ममता भूपेश, परसादी लाल मीणा खाचरियावास के बयानों को गैरजरूरी बताकर खारिज कर रहें है। पायलट गुट के नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी की राजस्थान यात्रा से पहले राजस्थान को लेकर पार्टी आलाकमान ऐसा कोई फैसला करें जिससे दोनों गुट संतुष्ट हो सके और राजस्थान में चल रहा आपसी विवाद समाप्त हो सके। यदि राजस्थान कांग्रेस में चल रहे विवाद पर शीघ्र ही काबू नहीं पाया गया तो अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ सकता है। पार्टी के नए अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे जिनकी मौजूदगी में जयपुर में 25 सितंबर की घटना घटित हुई थी। उनको आगे बढ़कर दोषी नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए। पार्टी के सभी नेताओं को संतुष्ट कर एकजुट करना चाहिए। ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस फिर से सरकार बनाने की दिशा में एकजुटता से काम कर सके।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
orisbet giriş
orisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
milanobet giriş
hiltonbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hititbet
hititbet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino
vdcasino
hititbet
hititbet
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
betmarino
betmarino