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जब बाल ठाकरे ने किया था वीर सावरकर का बचाव

अविनाश पाण्डेय

सावरकर का हिंदू राष्ट्र का आईडिया काफी प्रभावशाली रहा था। जिसको लेकर आज भी सियासत होती रहती है। इसके अलावा मराठी भाषा के परिमार्जन के लिए किए गए उनके प्रयासों ने उन्हें राज्य में एक अहम दर्जा दिलाने के काफी मदद की थी। उन्होंने अपने समय में मंदिरों में दलितों के प्रवेश को लेकर भी आवाज उठाई थी और उसमें सुधार करने का प्रयास किया था।

महाराष्ट्र की सियासत में फिलहाल वीर सावरकर को लेकर घमासान मचा हुआ है। सावरकर को प्रखर हिंदुत्ववादी नेता माना जाता है। सावरकर के बाद बाल ठाकरे ने हिंदुत्व की लगाम अपने हाथ में लेकर अपने अंतिम समय तक उसे संभाले रखा। ऐसे में बाल ठाकरे वीर सावरकर के बारे में क्या सोचते थे, यह भी जानना दिलचस्प है। हाल में जब राहुल गांधी ने सावरकर को लेकर विवादित बयान दिया तब उद्धव ठाकरे ने खुलकर इस बात का विरोध किया और यह कहा कि वह राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बयान से सहमत नहीं है। यह भी कहा गया कि राहुल गांधी का यह बयान महाविकास अघाड़ी में फूट का सबब बन सकता है। वीर सावरकर के लिए अपने सहयोगी दल का खुलेआम विरोध करना यह बताता है कि ठाकरे परिवार सावरकर के विचारों को गंभीरता से मानता है। तो आइए जानते हैं वीर सावरकर और ठाकरे परिवार का नाता कैसा रहा है?

साल 1921 में अंडमान जेल से रिहा होने के बाद सावरकर से कई लोग मिले थे, इन्हीं में से एक थे प्रबोधनकार ठाकरे, जो बालासाहेब ठाकरे के पिता थे। वो एक जाने-माने समाज सुधारक थे। उन दिनों प्रबोधनकार ठाकरे अक्सर वीर सावरकर से सामाजिक सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर चर्चा करते थे। प्रबोधनकार ठाकरे कि उस विचारधारा को बाल ठाकरे ने भी अपने जीवन में उतारा और चार दशक बाद बाल ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की और हिंदुत्व की विचारधारा को लेकर वह आखिर तक लड़ते रहे। इसीलिए उन्हें हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे भी कहा जाता है। बाल ठाकरे ने कई मौकों पर सावरकर के विचारों का समर्थन भी किया था।

जब बाल ठाकरे ने किया था सवारकर का बचाव

आज से तकरीबन एक दशक पहले जब कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने वीर सावरकर पर निशाना साधते हुए कहा था कि सावरकर ने ही सबसे पहले दो राष्ट्रों के सिद्धांत को उठाया था। जिसकी वजह से आगे चलकर देश का विभाजन हुआ था। इस मुद्दे पर दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने तब वीर सावरकर का खुलकर बचाव किया था। ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना के जरिए लिखा था कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करके दिग्विजय सिंह मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। सावरकर अंत तक अखंड भारत के समर्थक रहे और वह पाकिस्तान के निर्माण के भी खिलाफ थे। ठाकरे ने कहा था कि 1945 के चुनाव के दौरान महात्मा गांधी आश्वस्त थे कि देश का विभाजन नहीं होगा ।

हालांकि, सावरकर को गांधी जी के विश्वास पर भरोसा नहीं था और उन्होंने बार-बार कहा कि कांग्रेस विभाजन को स्वीकार करेगी और कांग्रेस को मतदान करने का मतलब विभाजन को समर्थन देना होगा। बाल ठाकरे ने कहा कि सावरकर की बात पर किसी ने भरोसा नहीं किया और तब आरएसएस प्रमुख और हिंदू महासभा के नेता डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और कुछ अन्य ने वर्ष 1945 के चुनाव से खुद को अलग कर लिया बाद में आरएसएस प्रमुख ने अपनी गलती को स्वीकार भी किया था।

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सावरकर के साथ पारिवारिक रिश्ता
ठाकरे परिवार का सावरकर फैमिली के साथ एक पारिवारिक रिश्ता है। जिसकी वजह से उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी के बयान पर अपनी असहमति जताई थी। उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमारे दिल में वीर सावरकर के प्रति काफी आदर और सम्मान है जो कभी भी खत्म नहीं हो सकता है। साल 2003 में जब वीर सावरकर के पुतले का लोकसभा में पहली बार अनावरण किया गया तब शिवसेना के सांसदों ने इसका जश्न मनाया था। हालांकि, अब उद्धव ठाकरे के गुट खुद एनसीपी और कांग्रेस के साथ है। बावजूद इसके उद्धव अपनी हिंदुत्ववादी छवि और विचारधारा को छोड़ना नहीं चाहते है। न सिर्फ उद्धव बल्कि राज्य की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी हिंदुत्व का रास्ता पकड़कर चल रहे हैं।
वो किसी भी सेक्युलर दल के साथ गठबंधन नहीं कर रहे हैं। शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर आरोप भी लगाए थे कि उन्होंने अपने दिवंगत पिता बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्ववादी विचारों को त्याग दिया है शिंदे ने यह दावा भी किया था कि अब वही बालासाहेब ठाकरे के विचारों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

पवार भी कर चुके हैं सावरकर की तारीफ

दिसंबर 2021 में एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी वीर सावरकर की तारीफ कर चुके हैं। तब पवार ने कहा था कि सावरकर सिर्फ एक हिंदुत्ववादी नेता ही नहीं थे बल्कि हिंदुत्व के प्रति उनकी एक आधुनिक सोच भी थी। उन्होंने अपने समय में मंदिरों में दलितों के प्रवेश को लेकर भी आवाज उठाई थी और उसमें सुधार करने का प्रयास किया था। यह सावरकर ही थे जिन्होंने इस बात को भी मुक्त रूप से कहा था कि गाय का मांस और दूध मनुष्य को खाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि गाय एक दूध देने वाला जानवर है न की मां।

सावरकर पर क्या बोले थे राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मंगलवार को वाशिम जिले में विनायक दामोदर सावरकर पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सावरकर की चिट्ठी पढ़ते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजों की मदद की थी और कारागार में रहने के दौरान उन्होंने माफीनामे पर हस्ताक्षर करके महात्मा गांधी और अन्य समकालीन भारतीय नेताओं को धोखा दिया था। राहुल गांधी ने विनायक सावरकर के ‘माफीनामे’ की एक प्रति दिखाते हुए निशाना साधा। उन्होंने दावा किया, ‘सावरकर जी ने अंग्रेजों की मदद की। उन्होंने अंग्रेजों को चिट्ठी लिखकर कहा – सर, मैं आपका नौकर रहना चाहता हूं।’ राहुल गांधी ने यह भी कहा, ‘जब सावरकर जी ने माफीनामे पर हस्ताक्षर किए तो उसका कारण डर था। अगर वह डरते नहीं तो वह कभी हस्ताक्षर नहीं करते। इससे उन्होंने महात्मा गांधी और उस वक्त के नेताओं के साथ धोखा किया।

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