आर्यसमाज धामावाला, देहरादून में वेद प्रचार का आयोजन- “धर्मोपदेश सुनने का लाभ तभी है जब उन सुनी बातों को अपने जीवन का अंग बनायें: योगेन्द्र याज्ञिक”

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ओ३म
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आर्यसमाज धामावाला, देहरादून में दिनांक 22-9-2022 से 25-9-2022 तक चार दिवसीय वेद प्रचार का आयोजन किया गया। इस आयोजन में आर्यजगत के गौरव एवं युवा विद्वान श्री योगेन्द्र याज्ञिक जी वेद प्रचार हेतु होशंगाबाद से पधारे। आचार्य जी ने प्रातः व सायं सत्संगों में अपने विद्वतापूर्ण प्रवचनों से श्रोताओं को वैदिक मान्यताओं का सरल भाषा में प्रचार किया। आचार्य जी के साथ भजन के लिए अमृतसर से पंडित दिनेश पथिक जी पधारे थे। पथिक जी के भी सभी सत्संगों में भजन हुए। पथिक जी के भजनों से आर्यजगत ही नहीं अपितु देश की समस्त जनता सुपरिचित है। आपके शताधिक भजन यूट्यूब पर उपलब्ध हैं जिन्हें देश के लोग रूचि लेकर सुनते हैं। हमें भी आज आर्यसमाज धामावाला, देहरादून के वेद प्रचार आयोजन में इन दोनों अतिथि विद्वानों के व्याख्यान एवं भजनों को श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सत्संग के आरम्भ में आर्यसमाज की भव्य यज्ञशाला में आर्यसमाज के पुरोहित श्री पं. विद्यापति शास्त्री जी ने यज्ञ कराया। इसके बात सामूहिक प्रार्थना एवं कुछ भजनों की प्रस्तुति हुई। पं. दिनेश पथिक जी ने लगभग एक घण्टे तक भजनों की प्रस्तुति की। उनका एक भजन भारतीय फिल्मों के देशभक्ति गीतों को मिलाकर बनाया गया था। जिसे फिल्मी संगीत की धुनों व मधुर स्वर में सुनकर श्रोता भावविभोर हो गये। भजनों की प्रस्तुति के बाद आचार्य योगेन्द्र याज्ञिक जी का व्याख्यान हुआ। हम उनके 64 मिनट के व्याख्यान के आरम्भ के कुछ मिन्टो में प्रस्तुत विचारों को प्रस्तुत कर रहे हैं।

युवा वैदिक विद्वान आचार्य योगेन्द्र याज्ञिक जी ने कहा कि प्रातः 4.00 बजे उठना अच्छा है परन्तु यह अच्छा नहीं लगता है। मीठा खाना अच्छा लगता है परन्तु मीठा खाना अच्छा नहीं होता है। शुगर के रोगियों के लिये यह हानिकारक होता है। अच्छी चीजों में मनुष्य को अपने मन को जबरदस्ती लगाना पड़ता है। इनमें मनुष्य का मन स्वतः नहीं लगता है। आचार्य जी ने कहा कि जिन वस्तुओं में मरनुष्य का मन सहजता से लग जाये, समझ लेना कि वह ज्यादा कल्याण करने वाली नहीं हैं। जिन चीजों में हमें अपने मन को जबरस्ती लगाना पड़े, उनका विशेष लाभ होता है। आचार्य जी ने श्रोताओं को कहा कि आपको यहां सत्संग में अपने मन को लगाना है। यदि आप व्याख्यान को ध्यान से सुनेंगे तो आपको विशेष लाभ होगा।

आचार्य योगेन्द्र याज्ञिक जी ने कहा कि हम वर्षों से प्रवचन सुनते चले आ रहे हैं परन्तु हमारे जीवन में उसके अनुरूप परिवर्तन नहीं आया है। उन्होंने कहा कि हमें कहने का चस्का है और तुम्हें सुनने का चस्का है। न कुछ मेरे बस का है और न कुछ आपके बस का है। आचार्य जी ने कहा कि हमें सुनने की आदत सी पड़ गई है। विद्वान आचार्य जी ने कहा कि सुनने की आदत बुरी आदत नहीं है। सुनने का लाभ तभी है जब मनुष्य उन सुनी बातों पर विचार करे और उन सुनी लाभकारी बातों को अपने जीवन का अंग बनाये।

आचार्य योगेन्द्र याज्ञिक जी ने आगे कहा कि जो रोगी डाक्टर को अपना पूरा रोग नहीं बताता वह जल्दी ठीक नहीं हो पाता। जो व्याक्ति अपना पूरा रोग बता देता है तथा डाक्टर उसका ठीक से इलाज करता है, वह रोगी ठीक हो जाता है। आचार्य जी ने कहा कि वह श्रोताओं की स्थिति को जानने का प्रयास करेंगे और उनकी आवश्यकता के अनुरूप उपदेश करेंगे जिससे उनको लाभ हो। आचार्य जी ने यह भी कहा कि हम सब आर्यों के घरों में अपना निजी पुस्तकालय होना चाहिये। ऐसे पुस्तकालय बहुत कम लोगों के यहां होते हैं। आचार्य जी ने लोगों से हाथ खड़े करने को कहा जिनके अपने पास पुस्तकालय हैं और जिनमें वेद, उपवेद, ब्राह्मण ग्रन्थ, आरण्यक ग्रन्थ, स्मृमियां आदि वैदिक साहित्य है। इस प्रश्न के उत्तर में कुछ ही लोगों ने अपने हाथ उठाये। आचार्य जी ने कहा कि यदि हम 15 से 20 हजार रुपये खर्च करें तो हम यह आवश्यक साहित्य क्रय करके अपना निजी पुस्तकालय बना सकते हैं। आचार्य जी ने अपने निजी पुस्तकालय और नियमित स्वाध्याय करने के लाभ भी श्रोताओं को बताये और इससे सम्बन्धित कुछ उदाहरण भी प्रस्तुत किये। आचार्य जी ने विस्तार से चर्चा कर वैदिक संस्कृति को अपनाने व उस पर गौरव करने की बात कही। उन्होंने विस्तार में जाकर इससे सम्बन्धित महत्वपूर्ण घटनायें प्रस्तुत की। हमने आचार्य जी के इस व्याख्यान को अपने मोबाइल में आडियों रिकार्ड किया है। व्याख्यान में अनेक महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा है। अपने व्याख्यान के बाद आचार्य जी ने शंका समाधान किया। अनेक लोगों ने मुख्यतः कर्म फल व्यवस्था पर अनेक प्रश्न किये जिनका आचार्य जी ने युक्तिसंगत समाधान किया।

आयोजन में प्रधान श्री सुधीर गुलाटी जी, युवा मंत्री श्री नवीन भट्ट जी तथा कोषाध्यक्ष श्री नारायण दत्त पांचाल जी उपस्थित थे। आर्यसमाज के सभासद, सदस्यगण एवं अन्य आर्यसमाजों के सदस्यगण भी इस वेद प्रचार आयोजन में उपस्थित थे। आज इस आयोजन में हमें समाज में अपने पुराने सहयोगियों से मिलकर और उनका हालचाल जानकर प्रसन्नता हुई। आयोजन में श्री राजेन्द्र कुमार काम्बोज, श्री पवन कुमार, डा. विनीत कुमार जी, श्री कठपालिया जी, श्री अशोक आर्य जी, पूर्व प्रधान श्री महेश कुमार शर्मा जी आदि से भेंट हुई। आर्यसमाज के पुरोहित श्री विद्यापति शास्त्री जी से मिलकर भी प्रसन्नता हुई। कार्यक्रम सफल रहा। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

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