राजस्थान में सरपंच मोनिका सिंह के विरुद्ध न्यायालय ने लिया प्रसंज्ञान : तोड़ी थी एक श्रमजीवी की कैंटीन

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पाली। ( विशेष संवाददाता ) राजनीति का अपराधीकरण रोकने की मांग वैसे तो भारत के राजनीतिक क्षेत्रों में बहुत समय से की जाती रही है परंतु सच यह है कि राजनीति का अपराधीकरण रुका नहीं है बल्कि अपराधियों का राजनीतिकरण करने की प्रक्रिया और भी अधिक तेज होती जा रही है। छोटे-छोटे लोग छोटी सोच और गैरकानूनी कार्यो में लिप्त होकर राजनीति को अपना सुरक्षा कवच बनाकर राजनीति में प्रवेश करते हैं। उसके बाद ऐसे लोग जनसाधारण को उत्पीड़ित करने के लिए अपने आप को और भी अधिक ताकतवर मान लेते हैं। वास्तव में इस समय देश में राजनीति कुछ लोगों को असहाय और निर्मल लोगों पर अत्याचार करने का एक प्रमाण पत्र बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में सफाई अभियान की बात करते हैं। परंतु सफाई अभियान का अर्थ उनकी नजर में शायद सड़क गांव गली मोहल्ला की सफाई करने तक सीमित है वास्तव में सफाई अभियान इस समय राजनीति में करने की आवश्यकता है जहां बड़े-बड़े जालिम लोग छुपे बैठे हैं।
बात राजस्थान की करें तो यहां बीजापुर सरपंच मोनिका सिंह एक ऐसा ही नाम है जो आम आदमी को उत्पीड़ित करने के लिए मशहूर है परंतु राजनीति का सुरक्षा कवच पहने हुए होने के कारण कानून की खिल्ली उड़ाना उनके बाएं हाथ का खेल है। इसका कारण केवल एक है कि मोनिका सिंह भाजपा की वसुंधरा राजे की सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे पुष्पेंद्र सिंह राणावत की के परिवार से है। बात स्पष्ट हो जाती है कि राजनीति का वरदहस्त होने के कारण सरपंच अपनी तानाशाही दिखा रही है और अपने इसी प्रकार के तालुकात के चलते हुए कानून को कुछ नहीं समझ रही हैं ।
इस संबंध में हमें जानकारी देते हुए सरपंच मोनिका सिंह द्वारा उत्पीड़ित किए गए महेंद्र सिंह राजगुरु ने हमें बताया कि श्रीमती मोनिका सिंह सरपंच पर सत्ता और शक्ति का घमंड सवार रहा है। सरपंच मोनिका सिंह पुष्पेंद्र सिंह राणावत के परिवार से हैं और अपने राजनीतिक संबंधों और पहुंच के कारण वे प्रारंभ से ही तानाशाही दृष्टिकोण की रही हैं। श्री राजगुरु का कहना है कि मोनिका सिंह उनसे केवल इस बात को लेकर रंजिश मानती हैं कि उन्होंने निर्दलीय नामांकन पिछली बार विधानसभा चुनाव में कर दिया था। उसी बात से खिन्न होकर वह कोई न कोई ऐसी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही उनके विरुद्ध करती रहती हैं जिससे उन्हें नीचा दिखाए जा सके। अब श्रीमती मोनिका सिंह ने राजनीतिक ईर्ष्या से प्रेरित होकर महेंद्र सिंह राजगुरु की चाय की थड़ी ( केंटीन ) तोड़ दी है। इस संबंध में महेंद्र सिंह राजगुरु का कहना है कि वह एक श्रमजीवी व्यक्ति हैं और श्रीमती मोनिका सिंह के इस प्रकार के गैर कानूनी कार्य से उन्हें असीम पीड़ा हुई है। क्योंकि मोनिका सिंह और उनके लोगों ने मिलकर जिस प्रकार का कार्य के साथ किया है उससे उनके परिवार की आजीविका का साधन समाप्त हो गया है। उन्हें 3 – 4 लाख रुपए का नुकसान हुआ है, क्योंकि कैंटीन के सब सामान को भी भर कर मोनिका सिंह के लोग ले गए थे। जिसके खिलाफ वह कई बार अधिकारियों से लिखत पढ़त करते रहे हैं परंतु कोई भी परिणाम सामने नहीं आया है।
सबके बावजूद यह एक शुभ संकेत है कि देश के न्यायालय फिर भी बहुत कुछ सीमा तक कानून की रक्षा करने का काम कर रहे हैं। राजनीति जहां नंगा हो चुकी है वहीं न्यायालय न्याय दिलाने में गरीब लोक के साथ खड़े हैं। यही कारण है कि उपरोक्त प्रकरण में माननीय न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बाली जिला पाली राजस्थान द्वारा निर्णय महेंद्र सिंह राजगुरु के पक्ष में सुनाया गया है। न्यायालय द्वारा अपने दिए गए आदेश के अंतर्गत मोनिका सिंह व उनके अन्य साथियों पर अंतर्गत धारा 427, 379, 461 सपठित धारा 120 बी भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत प्रसंज्ञान लिए जाने के आदेश पारित किए हैं।
जिसकी प्रति जिला सूचना और जन संपर्क अधिकारी पाली को भी दे दी गई हैं। यह ठीक है कि न्यायालय ने पीड़ित पक्ष को न्याय दिया है परंतु यहां पर यह भी देखने वाली बात है कि राजनीति क्यों अपराधियों को संरक्षण दे रही है ? क्या राजनीति अपना राजधर्म भूल चुकी है ? या फिर वह अपराधियों के साथ मिलकर उनका राजनीतिकरण करने की देश विरोधी सोच को ग्रहण कर चुकी है ? इस संबंध में समाजसेवी और पूर्व अधिकारी रहे राजपुरोहित रघुनाथ सिंह चाडवास का कहना है कि देश की राजनीति को साफ सुथरा बनाने के लिए आवश्यक है कि जो लोग अपनी राजनीतिक पहुंच का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं उनके विरुद्ध राजनीति में बैठे लोग लामबंद होकर काम करें। अन्यथा आम आदमी का जीना दूभर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान की राजनीति इस समय जिस दुर्दशा का शिकार है उसे सही राह पर लाने की आवश्यकता है।

1 thought on “राजस्थान में सरपंच मोनिका सिंह के विरुद्ध न्यायालय ने लिया प्रसंज्ञान : तोड़ी थी एक श्रमजीवी की कैंटीन

  1. हाल ही दिनाँक 26अगस्त 2022 को संपन्न हुए जिसमें छात्र संघ चुनाव में राजकीय महाविद्यालय सुमेरपुर ( पाली )में स्थानीय प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया तथा मतगणना में भारी धांधली करते हुए विविध पदों के उम्मीदवारों के साथ धोखा किया है l चुनाव अधिकारी ने चुनाव पूर्व जारी मतपत्रों के अनुसार चुनाव नहीं कराके चुनाव के दिन प्रयुक्त मतपत्रों में प्रत्याशियों के क्रमांक बदल दिए जिससे सम्पूर्ण चुनाव प्रक्रिया अनियमितता के भेंट चढ़ गयी l इतना ही नहीं मतगणना के दौरान उम्मीदवारों को गणना स्थान से दूर रखा गया l विजेता उम्मीदवारों के मत पत्र खारिज नहीं करके प्रतिद्वंद्वियों के मतपत्रों को खारिज किए ऐसे में प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशियों ने खारिज मत पत्रों को दिखा कर पुनः मतगणना की मांग की मगर किसी भी अधिकारी ने छात्र दल की मांग पर न्याय संगत कार्यवाही नहीं की और छल पूर्वक नतीजों को बदला जिसकी संपूर्ण जानकारी से स्थानीय उपखंड अधिकारी एवं मीडिया को अवगत कराया I चुनाव दिनाँक से आज तक स्थानीय कोलेज प्रशासन एवं उपखंड अधिकारी को चार बार ज्ञापन दिया जा चुका है मगर किसी ने छात्रों को न्याय दिलाने में सहयोग नहीं किया जो कानून व्यवस्था पर प्रश्नवाचक लगाता है I इससे विद्यार्थियों में भारी रोष है यदि समय रहते उचित कार्यवाही नहीं की गयी तो न्याय की मांग के लिए छात्र संगठन आंदोलन करेंगे I

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