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इतिहास के पन्नों से

भीष्म के शिष्य रामचंद्र अनूठी है, यह आजादी की दास्तां

स्वर्गीय रामचंद्र विकल जी कांग्रेस के प्रथम पीढ़ी के शीर्ष दिग्गज राजनेता ही नहीं क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी भी थे। किशोरावस्था में उनकी भेंट क्रांतिकारी सन्यासी स्वामी भीष्म जी से गुरुकुल सिकंदराबाद के वार्षिकोत्सव में हुई थी विकल जी अपने चाचा फकीरा मुकदम्म जी के साथ वार्षिक उत्सव में गए थे ।विकल जी का परिवार गुरुकुल सिकंदराबाद से इसकी स्थापना वर्ष 1897 से ही जुड़ा हुआ था। आर्य समाज के जोशीले क्रांतिकारी सन्यासियों उपदेशको के संपर्क में आकर विकल जी के अंतर्मन पर देश भक्ति का रंग चढ़ गया जो फिर जीवन पर्यंत कभी नहीं उतरा। स्वामी भीष्म जी के शिष्य बन गए भीष्म जी के आदेशों पर क्रांतिकारीयो गतिविधियों का संचालन किया करेहडा गाँव हिंडन के निकट आश्रम की बागडोर भी सम्भालते थे भीष्म जी की अनुपस्थिति में । शहीद भगत सिंह रामप्रसाद बिस्मिल चंद्रशेखर आजाद बंगाल बिहार मद्रास के अनेकों क्रांतिकारी करेहड़ा आश्रम में अनेक रात्रि बिता कर जाते थे । स्वामी भीष्म जी के अनेकों शिष्य थे ।उनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दो ही नाम प्रमुखता से आते है चौधरी चरण सिंह जी, रामचंद्र विकल जी दोनों ही आर्य समाजी स्वतंत्रता सेनानी रहे… स्वामी भीष्म जी ने 124 वर्ष का दीर्घ जीवन पाया। आजादी के पश्चात प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी ने उनके आश्रम करनाल में पहुंचकर सार्वजनिक अभिनंदन सत्कार भी किया था । बात यदि गुरुकुल सिकंदराबाद( मंडी श्याम नगर) की करें तो गुरुकुल सिकंदराबाद, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है इसी गुरुकुल में शहीद भगत सिंह के गुरु आचार्य उदयवीर शास्त्री जी ने भी अध्ययन किया पंडित गणेश दत्त शर्मा मुरारी लाल शर्मा रामचंद्र विकल जी चौधरी चरण सिंह साथ ही साथ इस संस्था में पढे हुए छात्र आगे चलकर मॉरीशस व सूरीनाम देश के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री भी बने । गुरुकुल सिकंदराबाद में पढ़ने वाले छात्रों ने आगे चलकर जो नेपाल के निवासी थे नेपाल में राजतंत्र के विरुद्ध लोकतंत्र स्थापित करने के लिए निर्णायक क्रांति की थी। बहुत समृद्ध इतिहास गुरुकुल सिकंदराबाद का है। करनाल से सांसद रहे आर्य समाजी सन्यासी रामेश्वरआनंद गुरुकुल सिकंदराबाद में ही रहकर उन्होंने अध्ययन किया था। विकल जी ने आर्य समाज के कार्य जो राष्ट्र निर्माण भक्ति से ही जुड़े हुए थे भी खूब बढ़-चढ़कर किये। आजादी के बाद की राजनीतिक सेवा विकल जी की उत्कृष्ट है उन्होंने बगैर जातीय क्षेत्रीय भेदभाव के संपूर्ण उत्तर प्रदेश में अनेकों विकास कार्य किये सांसद विधायक मंत्री रहते हुए। इतना ही नहीं विकल जी ने असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को जो वयोवृद्ध हो गए थे उनको पेंशन अन्य सुवधा भी केंद्र सरकार से दिलवाई थी अपने प्रयासों से। पंडित नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी राजीव गांधी तक रामचंद्र विकल जी का विशेष सम्मान रखते थे उनकी सीधे सरल विद्वता युक्त व्यक्तित्व निष्काम सेवा भाव से प्रभावित होकर।
देश की आजादी में विकल जी के योगदान को लेकर दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार मनीष तिवारी जी की उत्कृष्ट सराहनीय संग्रहणीय स्टोरी आज दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में प्रकाशित हुई है।

नीचे फोटो में विकल जी अपने गुरु स्वामी भीष्म जी के साथ उनकी वयोवृद्ध अवस्था में । स्वामी भीष्म जी का फोटो युवा अवस्था में। विकल जी स्वतंत्रसेनानियों आर्य समाज के प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलते हुए.।

*आर्य सागर खारी* ✍✍✍

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