सर्वांतर्यामी ओम ही सर्वोपरि है

images (14)


स्वामी विद्यानंद सरस्वती (पूर्व नाम प्रिंसिपल लक्ष्मी दत्त दीक्षित जी हैं ), ने अपनी पुस्तक “खट्टी मीठी यादें” में पृष्ठ 95 से 97 तक इस विषय पर लिखा है, “मेरे प्रिंसिपल बनने के बाद सन 1959 ईस्वी में कॉलेज का पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया । परंपरा के अनुसार उस दिन राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है । यह व्यवस्था एनसीसी द्वारा होती है । कॉलेज के हाल पर ओ३म् का झंडा सदा लहराता रहता है, तब भी लहरा रहा था । एनसीसी के अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा कोई ध्वज नहीं हो सकता इसलिए पहले ओम का झंडा उतारा जाए तत्पश्चात राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा । मैंने कहा यह शर्त राजनीतिक और सांप्रदायिक झंडे पर लागू होती है ओम के झंडे पर नहीं क्योंकि यह संसार के सभी झंडों से बड़ा है । किसी भी अवस्था में ओम का झंडा नहीं उतारा जा सकता । वह जहां है वही रहेगा । एनसीसी अधिकारी अपनी वर्दी उतारकर एक तरफ खड़े हो गए । समय की परिस्थिति को देखते हुए गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज को स्थानीय आर्य समाज के प्रधान श्री जय भगवान दास जी के हाथों विधिवत यथा स्थान से लहरा दिया गया ।

उसी वर्ष कॉलेज में दीक्षांत भाषण के लिए पंजाब के गवर्नर श्री नरहरि विष्णु गाडगिल को आमंत्रित किया गया था । उन्होंने सहर्ष आना स्वीकार कर लिया था । जब मैं उन्हें स्मरण कराने व कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के विचार से उनसे मिला तो उन्होंने बड़े सहज भाव से कह दिया कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर आपके कॉलेज में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान हुआ है इसलिए आपके यहां दीक्षांत भाषण के लिए मैं नहीं जाऊंगा । श्री गाडगिल ने स्पष्ट कह दिया कि जब तक केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस बात का कोई निर्णय नहीं हो जाता तब तक आपके यहां मेरा आना संभव नहीं होगा । तब मुझे पता चला कि पानीपत के कुछ कांग्रेसियों ने इस मामले को कितना विकृत रूप दिया है । मुझे विश्वास था कि ओम का झंडा सबसे ऊंचा रह सकता है अर्थात सर्वोपरि है । आर्य समाज के माननीय नेता श्री घनश्याम सिंह गुप्त विधान परिषद के महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक थे, जिसने राष्ट्रीय झंडे के संबंध में अपेक्षित निश्चित किए थे । उनकी सहायता से मैंने उस समय की कार्रवाई की छानबीन करवाई । पंडित गोविंद बल्लभ पंत केंद्रीय गृहमंत्री थे । उन्होंने यह मामला निर्णय के लिए भारत सरकार के विधि मंत्रालय को सौंप रखा था अंततः विधि मंत्रालय ने निर्णय कॉलेज के पक्ष में दिया कि ओम का झंडा राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा फहराया जा सकता है । श्री गाडगिल दीक्षांत भाषण के लिए कॉलेज में आए । गवर्नर महोदय के कॉलेज में आने पर नियमानुसार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया । ओम का ध्वज पूर्ववत सदा की भांति हाल पर ही लहरा रहा था ।
जानकारी हेतु निवेदन किया जाता है कि उक्त कॉलेज पानीपत (हरियाणा ) का आर्य कॉलेज है, जहां आज भी ओम ध्वज सदा की भांति यथावत लहरा रहा है ।

ओम ध्वज संबंधी एक दूसरी घटना का उल्लेख करना भी आवश्यक है । हरियाणा से लोकसभा चुनाव में 1962 ईस्वी में आर्य समाज के नेता श्री जगदेव सिंह सिद्धांती विजयी हुए थे । उनके विरुद्ध पराजित प्रत्याशी श्री प्रताप सिंह दौलता ने उनके निर्वाचन को इस आधार पर चुनौती दी कि चुनाव में किसी संप्रदाय की धार्मिक भावनाओं को भड़काना नियम विरुद्ध है । श्री सिद्धांती ने अपनी जीप पर ओम का झंडा लगाकर इस नियम का उल्लंघन किया है इसलिए उनके चुनाव को अवैध घोषित किया जाए । इस पर पंजाब हाई कोर्ट ने और फिर सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि ओम का झंडा सांप्रदायिक नहीं है । सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ज्यों का तयों अंग्रेजी में और हिंदी में एक पुस्तक में आज भी उपलब्ध है और उस पुस्तक का नाम है “ओम ध्वज ही सार्वभौमिक एवं सर्वोपरि है” जो कि अमर स्वामी प्रकाशन विभाग गाजियाबाद से प्रकाशित है ।

साभार:सुभाष दुआ, फेसबुक

Comment:

Latest Posts

kolaybet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
jojobet
jojobet
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet giriş
betpark giriş
hitbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
bettilt giriş
hitbet giriş
hitbet
interbahis giriş
hitbet giriş
betgaranti giriş
grandpashabet
jojobet
betgaranti giriş
jojobet