Categories
आओ कुछ जाने इतिहास के पन्नों से

ब्रिटिशराज ,गाँव बोडाकी और नील का कारखाना*।


नील बनाने का यह कारखाना जिसके आज अवशेष मात्र दिखाई दे रहे हैं ग्रेटर नोएडा जनपद गौतम बुध नगर उत्तर प्रदेश के बोड़ाकी – हजरतपुर गाँव के बीच नहर के पास स्थित है। यह कारखाना 200 वर्ष के ब्रिटिशराज के दमन निर्दयता का जीवंत प्रमाण है इस लघु कारखाने का निर्माण अंग्रेजों ने ही कराया था। अंग्रेज उपजाऊ नेहरी जमीन के पास ऐसे कारखाने बनाते थे।। अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने ‘नील कृषि कानून’ बनाया (इंडिगो कल्टीवेशन एक्ट) अंग्रेजों ने भारत के किसानों को जबरन नील के फूल की खेती करने के लिए विवश किया । यूरोप के कपड़ा बाजार में भारत के नींल की जबरदस्त डिमांड थी।नील रंजक के तौर पर इस्तेमाल होता था कपड़ों को रंगने के लिए। अंग्रेजों ने गेहूं की खेती पर प्रतिबंध लगा दिया भारत के किसान की कमर तोड़ दी। नील की खेती अधिक उपजाऊ जमीन में होती थी नील के फूल से नील बनाने की प्रक्रिया बेहद समय व परिश्रम साध्य थी…. नील की टिकिया का भी अंग्रेज किसानों को उचित मूल्य नहीं देते थे…. 1860 में अंग्रेजों द्वारा जबरन नील की खेती कराने के विरूद्ध बंगाल से एक क्रांति हुई जिसे ‘नीलक्रांति’ कहते हैं लोगों ने अंग्रेजों की नील के कारखानों को ध्वस्त कर दिया नील की खेती का बहिष्कार कर दिया अंग्रेजों ने क्रूरता पूर्वक इस क्रांति का दमन किया…. 18 60 के आसपास यह क्रांति कलकत्ता से दादरी तक भड़क गई । इस क्रांति का साथ देते हुए दादरी गौतम बुध नगर के गुर्जर किसान लामबंद हो गए थे अंग्रेजों के विरुद्ध….. प्रथम नील क्रांति के 57 वर्ष पश्चात महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण में 1917 में नींल की खेती कानून का बहिष्कार करते हुए चंपारण आंदोलन शुरू किया जिसे तीन कठिया आंदोलन भी कहते हैं…. अंग्रेजों को विवश होकर नील की जबरन खेती के कानून को वापिस लेना पड़ा। दादरी तहसील के बोडाकी गांव के इस ब्रिटिश कालीन नील कारखाने में नील का उत्पादन निर्माण 1860 के आस-पास ही बंद हो गया था । इस नील की लघु फैक्ट्री की दीवारें बहुत मोटी हैं कम से कम 10 फीट मोटी। पास से पानी लेने के लिए ड्रेन बनाई गई है एक मजबूत विशाल कूप आज भी मौजूद है चिमनी का कोई अवशेष अब उपलब्ध नहीं है। कामगारों के आवास के अवशेष भी समय के प्रवाह में ध्वस्त हो गए हैं ।नील निर्माण की तीन विशाल होदी बनी हुई है ।उनका फर्स आज भी पक्की मजबूत स्थिति में चूने का विशेष प्रयोग किया गया है इसके निर्माण मे। नील की इस फैक्ट्री में आज पीपल बरगद के विशाल पेड़ उगाए हैं।

आसपास दादरी के वीर क्रांतिकारियों किसानों के तेवर से भयभीत होकर अंग्रेजों ने इसे अक्रियाशील कर दिया था।

आज देश में आजादी का अमृत महोत्सव बहुत धूमधाम से बन रहा है अलग ही उमंग उत्साह है गांवों कस्बों शहरों में नजर आ रहा है दुकाने घर संस्थागत स्कूल अस्पताल भवन तिरंगे से सज गए हैं तिरंगा शान से लहरा रहा है। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सम्मान के साथ साथ हमे असंख्य वीर वीरांगनाओं स्वाभिमानी क्रांतिकारियों कृषकों कामगारों के बलिदान को भी याद करना चाहिए जिन्होंने ब्रिटिश राज का हमेशा प्रतिकार प्रतिरोध किया अपना सर्वस्व निछावर हमारी स्वाधीनता के लिए कर दिया।

आर्य सागर खारी ✍✍✍

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betlike giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betlike giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betebet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş