वैदिक धर्म की सार्वभौमिकता

वैदिक धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि या विश्व का प्रथम धर्म होने के साथ केवल मनुष्यों की नहीं बल्कि प्राणी मात्र के कल्याण कामना चाहता है , वेद और गीता इस बात की पुष्टि करते है , उदहारण के लिए ,

शं नो अस्तु द्विपदे शं चतुष्पदे ” यजुर्वेद 36:8
दो पैर वाले ( मनष्य ) और चार पैर वाले प्राणियों कल्याण हो

“अद्वेष्टा सर्वभूतानाम मैत्रः करुण एव च ‘- गीता -12:13

अर्थ – जो सभी प्राणियों मित्र हो , जो सबके साथ प्रेम रखे और सभी प्राणियों पर दया करे ” गीता -12:13

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए धर्मग्रंथों में कुछ ऐसे नियम निर्धारित किये हैं , जो विश्व के हरेक व्यक्ति पर लागू है , चाहे वह व्यक्ति किसी भी देश का हो , भले वह नास्तिक ही क्यों न हो , यह वैदिक धर्म की दूसरी विशेषता है , सभी प्राणियों पर दया भाव रखना और उनके प्राणों की रक्षा करने का धर्म भारत से निकल कर पूरे विश्व में स्वीकार्य है , यहाँ तक जो इस्लाम गैर मुस्लिमों की हत्या को धर्म मानता है , उसी इस्लाम की पुस्तकों में प्राणियों को सताने या मारने को गुनाह , और प्राणियों की जान बचाने वालों के लिए अल्लाह ने उत्तम बदला देने का वादा किया है , इस्लामी पुस्तकों से खोज कर यह कुछ प्रमाण दिए जा रहे हैं

1-रसूल की बिल्ली पर दया

इस्लामी इतिहास की किताबों के अनुसार मुहम्मद साहब ने एक बिल्ली पाली हुई थी ,उसका नाम ” मुइज्जा – معزة‎ “था. मुहम्मद साहब को उस बिल्ली से इतना लगाव था , की जब वह उपदेश दिया करते थे तो बिल्ली उनकी गोद(Lap) में बैठ जाती थी , कई बार मुहम्मद साहब उसी बर्तन से पानी पी लेते थे , जिस से बिल्ली ने पहले पानी पी लिया हो , यही नहीं रसूल बिल्ली के जूठे पानी से वजू भी कर लेते थे . एक बार बिल्ली रसूल के कुर्ते की बांह (sleeeve ) पर सो गयी , ,तभी अजान की आवाज सुनाई दी , रसूल को नमाज के लिए अपना चोगा ( robe ) चाहिए था ,लेकिन उन्होंने बिल्ली को जगाने की जगह अपने चोगे की बांह (sleeve) कटवा दी ,ताकि बिल्ली की नींद में कोई बाधा नहीं हो . और वह आराम से सोती रहे

2-बिल्ली को सताने की सजा
इब्ने उमर ने कहा कि रसूल ने बताया कि अल्लाह ने एक औरत को जहन्नुम भेज दिया , क्योंकि उस औरत ने अपनी बिल्ली को बांधे रखा था , और न तो उसे खाना देती थी , और न उसे बाहर जाने देती थी , जिस से वह बाहर जाकर कुछ खा लेती , आखिर बिल्ली भूख के कारण मर गयी

Narrated Ibn `Umar:
The Prophet (ﷺ) said, “A woman entered the (Hell) Fire because of a cat which she had tied, neither giving it food nor setting it free to eat from the vermin of the earth. ”

“‏ دَخَلَتِ امْرَأَةٌ النَّارَ فِي هِرَّةٍ رَبَطَتْهَا، فَلَمْ تُطْعِمْهَا، وَلَمْ تَدَعْهَا تَأْكُلُ مِنْ خِشَاشِ الأَرْضِ ‏”‏‏.‏ قَالَ وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِثْلَهُ‏.‏

Sahih al-Bukhari 3318
Book 59, Hadith 124

Vol. 4, Book 54, Hadith 535

3-कुत्ते पर दया

अबु हुरैरा की रिवायत है की रसूल ने बताया , एक व्यक्ति रास्ते में जा रहा था , उसे ज़ोर की प्यास लग रही थी , उसे एक गहरा कुंआ मिला , वह व्यक्ति कुंएं में उतरा और पानी पी लिया . जब वह बाहर निकला तो देखा कि एक कुत्ता प्यास के मारे गीली मिटटी चाट रहा है , उस व्यक्ति ने सोचा जैसे मुझे प्यास लगी थी , वैसे ही इस कूत्ते को प्यास लगी है , इसलिए वह व्यक्ति दुबारा कुंएं में उतरा , और अपने जूतों में पानी भर कर जूते मुंह से पकड़ कर बाहर आया , और कुत्ते को पानी पिला दिया ,अल्लाह ने इस सतकर्म के लिए उस व्यक्ति को धन्यवाद दिया और उसके सभी गुनाह माफ़ कर दिया ,इस पर लोगों ने रसूल से पूछा कि अगर हम भी प्राणियों की इसी तरह देखभाल करेंगे तो , क्या अल्लाह इस काम का पुरस्कार देगा ? रसूल ने कहा अल्लाह उन सभी लोगों को इनाम देगा , जिनके दिलों में प्राणियों के प्रति दया होती है ”

from Abu Hurayra that the Messenger of Allah, , said, “A man was walking on a road when he became very thirsty. He found a well and went into it and drank and came out. There was a dog panting and eating earth out of thirst. The man said, ‘This dog has become as thirsty as I was.’ He went down into the well and filled his shoe and then held it in his mouth until he climbed out and gave the dog water to drink. Allah thanked him for it and forgave him.” They said, “Messenger of Allah, do we have a reward for taking care of beasts?” He said, “There is a reward for every one with a moist liver.”

وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ سُمَىٍّ، مَوْلَى أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏”‏ بَيْنَمَا رَجُلٌ يَمْشِي بِطَرِيقٍ إِذِ اشْتَدَّ عَلَيْهِ الْعَطَشُ فَوَجَدَ بِئْرًا فَنَزَلَ فِيهَا فَشَرِبَ وَخَرَجَ فَإِذَا كَلْبٌ يَلْهَثُ يَأْكُلُ الثَّرَى مِنَ الْعَطَشِ فَقَالَ الرَّجُلُ لَقَدْ بَلَغَ هَذَا الْكَلْبَ مِنَ الْعَطَشِ مِثْلُ الَّذِي بَلَغَ مِنِّي فَنَزَلَ الْبِئْرَ فَمَلأَ خُفَّهُ ثُمَّ أَمْسَكَهُ بِفِيهِ حَتَّى رَقِيَ فَسَقَى الْكَلْبَ فَشَكَرَ اللَّهُ لَهُ فَغَفَرَ لَهُ ‏”‏ ‏.‏ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ وَإِنَّ لَنَا فِي الْبَهَائِمِ لأَجْرًا فَقَالَ ‏”‏ فِي كُلِّ ذَاتِ كَبِدٍ رَطْبَةٍ أَجْرٌ ‏”‏ ‏.‏

Muwatta Malik
(English) reference: Book 49, Hadith 23

Arabic reference Book 49, Hadith 1696

जिन लोगों का ऐसा मानना है कि वह तरह तरह की स्तुतियाँ गाकर , भजन कीर्तन करके बड़े धर्मात्मा बन गए , वास्तव वह ईश्वर से कुछ न कुछ माँगते रहते हैं , वह ईश्वर की स्तुति नहीं चमचागिरी करते हैं , जबकि चींटी जैसी छोटी जीव ईश्वर की निष्काम भाव से स्तुत्ति करती रहती है , जैसा कि इस हदीस में कहा गया है

4-चींटियां भी स्तुति करती हैं
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है , मुझ से पहले के एक नबी को एक चींटी ने काट लिया था , तब उन्हों अपने लोगों को आदेश दिया की चींटियों की पूरी बस्ती (बाम्बी ) को जला डालो , इस पर अल्लाह ने उनको वही भेजी ( revealed ) तुमने एक चींटी के कारन चींटियों की पूरी बस्ती जलवा डाली , क्या तुम्हें पता नहीं कि वह चींटियां मेरी स्तुति किया करती थी ( which sings My glory )

Abu Huraira reported Allah’s Messenger (ﷺ) as saying:
An ant had bitten a Prophet (one amongst the earlier Prophets) and he ordered that the colony of the ants should be burnt. And Allah revealed to him:” Because of an ant’s bite you have burnt a community from amongst the communities which sings My glory.”

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ “‏ أَنَّ نَمْلَةً قَرَصَتْ نَبِيًّا مِنَ الأَنْبِيَاءِ فَأَمَرَ بِقَرْيَةِ النَّمْلِ فَأُحْرِقَتْ فَأَوْحَى اللَّهُ إِلَيْهِ أَفِي أَنْ قَرَصَتْكَ نَمْلَةٌ أَهْلَكْتَ أُمَّةً مِنَ الأُمَمِ تُسَبِّحُ ‏”‏ ‏.‏ ”

सही मुस्लिम -किताब 26 हदीस 5567

5-छोटे जीवों को नहीं मारो

इब्ने अब्बास ने कहा ,इसीलिए रसूल ने छोटे छोटे प्राणी , जैसे चींटी . मधुमक्खी , हुदहुद और गौरय्या को नहीं मारने का आदेश दिया

، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنْ قَتْلِ أَرْبَعٍ مِنَ الدَّوَابِّ النَّمْلَةِ وَالنَّحْلِ وَالْهُدْهُدِ وَالصُّرَدِ ‏

narrated that Ibn ‘Abbas said:
“The Messenger of Allah (ﷺ) forbade killing four kinds of animals: Ants, bees, hoopoes and shrike

Sunan Ibn Majah-Book 28, Hadith 3345
इन में से दो पक्षियों के चित्र देखिये

3-https://encrypted-tbn0.gstatic.com/images?q=tbn:ANd9GcQgi6NzDTQZ9GVUeo1rKWEi3GIwKdQN_8yudX9jEpwV_QHbsHMk

4-https://encrypted-tbn2.gstatic.com/images?q=tbn:ANd9GcRZfmBk1ixMAt_NJmlDcNPK_tRydp-pSW_iD2b7x13uffIw-L5o

अब मुस्लमान विचार करें कि जब बिल्ली को मारने पर अल्लाह जहन्नम भेज देता है ,तो निर्दोष लोगों को मारने वाले जन्नत कैसे जा सकेंगे ? और जब प्यासे कुत्ते को पानी पिलाने पर अल्लाह सारे गुनाह माफ़ करके जन्नत भेज देता है , तो मुसलमान जन्नत जाने की यह आसान विधि क्यों नहीं अपनाते ? मेरा उन सभी मुस्लिम भाइयों से अनुरोध है , जो रसूल के नामका कलमा पढ़ते हैं ,‏वह जिहाद के नाम पर मारा मारी बंद करें और अल्लाह के बनाए प्राणियों की मदद करें , घर बैठे ही जन्नत मिल जाएगी
या फिर कह दें की रसूल की यह हदीसें झूठी है !

प्राणियों पर दया करना ही सच्चा धर्म है , क्योंकि यह सार्वभौमिक है
(320)

ब्रजनंदन शर्मा

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