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सत्य सनातन संस्कृति सेवा समिति के सौजन्य से आर्य समाज सिकंदराबाद में हुई राष्ट्र चिंतन बैठक संपन्न – क्रांति से जन्मी स्वतंत्रता की रखवाली समय की आवश्यकता : डॉ आर्य

सिकंदराबाद । ( विशेष संवाददाता ) यहां स्थित आर्य समाज मंदिर में सत्य सनातन संस्कृति सेवा समिति के माध्यम से विशिष्ट चिंतनशील लोगों का चिंतन शिविर संपन्न हुआ। कार्यक्रम के संयोजक रहे आचार्य प्राण देव ने बताया कि इस चिंतन बैठक में देश के सामने खड़ी चुनौतियों और समस्याओं पर गंभीर चिंतन किया गया।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे सुप्रसिद्ध इतिहासकार एवं अंतर्राष्ट्रीय आर्य विद्यापीठ नई दिल्ली के महासचिव डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि भारत राष्ट्र की अवधारणा को लेकर प्राचीन काल से चिंतन प्रस्तुत करता रहा है। उन्होंने कहा कि मातृभूमि और पितृभूमि को पुण्य भूमि समझकर इससे मां और पुत्र का संबंध स्थापित करने का अनोखा राष्ट्र चिंतन भारत के ऋषियों ने ही प्रदान किया है। इसलिए हम बड़े प्यार से अपनी मातृभूमि को भारत माता के रूप में सम्मान देते हैं। मध्यकाल में जब भारत माता को विदेशी आक्रमणकारियों के अत्याचारों से पद दलित होना पड़ा तो हमारे अनेक वीर योद्धाओं ने उस समय भी अपना प्राण उत्सर्ग करके भारतीय धर्म और संस्कृति की रक्षा की थी। आज हमें अपने उन सभी बलिदानियों, क्रांतिकारियों और मां भारती के सच्चे सपूतों को हृदय से नमन करना चाहिए जिनके त्याग तपस्या और बलिदान के चलते हम स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक बन पाए हैं।


डॉक्टर आर्य ने कहा कि भारत के इतिहास के साथ गंभीर छेड़छाड़ हुई है। जिसे आज हमको पुरुषार्थ और उद्यम के मार्ग को अपनाकर ठीक करना चाहिए। उन्होंने अनेक उदाहरण देकर यह स्थापित करने का सफल प्रयास किया कि मां भारती के अनेक क्रांति पुत्रों ने समय-समय पर आकर हमारे स्वाभिमान की रक्षा की है। चोटी जनेऊ की संस्कृति को बचाने के लिए हमारे अनेक बलिदानी महापुरुषों ने अलग-अलग कालों में अपने बलिदान देकर इतिहास रचा है। इतना बलिदानी संघर्षपूर्ण और प्रेरणास्पद इतिहास संसार के किसी अन्य देश का नहीं है जितना कि भारत का इतिहास है।
उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद जी महाराज के द्वारा देश में क्रांति की तैयारी करवाई गई और आर्य समाज के माध्यम से अनेक क्रांतिकारी देश के स्वाधीनता आंदोलन के लिए दिए। जिनकी क्रांतिकारी विचारधारा के चलते देश आजाद हो सका। महर्षि दयानंद का चिंतन, तप, त्याग और साधना फलीभूत हुई और विदेशियों को भगाकर अपना राज्य स्थापित करने में हम सफल हुए महर्षि दयानंद जी महाराज ने सत्यार्थ प्रकाश में यह स्पष्ट घोषणा की थी कि जो स्वदेशी राज्य होता है वह सर्वोपरि उत्तम होता है, अथवा मत मतांतर के आग्रह से रहित अपने और पराए का पक्षपात शून्य प्रजा पर माता पिता के समान कृपा न्याय और दया के साथ विदेशियों का राज्य भी पूर्ण सुखदायक नहीं है।
डॉक्टर आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद जी महाराज ने यह भी कहा था कि अभाग्योदय और आर्यों के आलस्य, प्रमाद ,परस्पर के विरोध से अन्य देशों के राज्य करने की तो कथा ही क्या कहनी किंतु आर्यावर्त में भी आर्यों का अखंड, चक्रवर्ती, स्वाधीन स्वतंत्र निर्भय राज्य नहीं है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद के अखंड, चक्रवर्ती, स्वाधीन, स्वतंत्र निर्भीक राज्य के लिए आवश्यक इन 5 शब्दों पर हमें विशेष चिंतन करना चाहिए। निश्चय ही धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा ने हमारे अपने स्वराज्य के भीतर इन पांचों शब्दों को समाविष्ट नहीं होने दिया है। उसी का परिणाम है कि आज असहिष्णुता फिर सहिष्णुता पर वार कर रही है और देश लहूलुहान हो चुका है। ऐसी ही स्थिति हमने 1947 में देश के बंटवारे के समय देखी थी।
इस बैठक में सभी प्रबुद्ध लोगों ने सरकार से देश को अखंड हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग की इसके साथ ही प्रस्ताव पास कर महर्षि दयानंद जैसे क्रांतिकारियों के सपनों का भारत बनाने के लिए वैदिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से स्कूलों और विद्यालयों के पाठ्यक्रम में समाविष्ट करने पर बल दिया। डॉक्टर आर्य की ओर से रखे गए प्रस्तावों का समर्थन करते हुए सभी उपस्थित जनों ने सरकार से आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करने की भी मांग की। सभी उपस्थित लोगों ने धर्मनिरपेक्षता के अवैज्ञानिक, अतार्किक और राष्ट्रहित को आघात पहुंचाने वाले विचार को त्यागने ने का भी सरकार से आग्रह किया । हिंदी हिंदू हिंदुस्तान की पवित्र भावना को मजबूत करने और भारत भूमि को अपनी पितृभूमि और पुण्य भूमि मानने की भावना पर बल देते हुए यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि वंदे मातरम जैसे पवित्र नारों को राष्ट्रीय उद्घोष बनाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त आईएएस रघुनाथ सिंह जी राजस्थान का विशेष संदेश भी पढ़ कर सुनाया गया।
इस अवसर पर आर्य समाज सिकंदराबाद के पदाधिकारी रमेश आर्य, विनोद आर्य, रमेश योगाचार्य, नरेश आर्य, ऋषि आर्य, अनूप भाटी सहित आर्य समाज आकिलपुर के प्रधान चरण सिंह आर्य आदि उपस्थित थे। रमेश योग आचार्य को इस अवसर पर सत्य सनातन संस्कृति सेवा समिति का जिला संयोजक नियुक्त किया गया।

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