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विश्व के पहले मनु महोत्सव का ग्रेटर नोएडा में हुआ शुभारंभ: मनु की ऋणी है विश्व की सारी व्यवस्था : विनय आर्य 

ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित प्राचीन गुरुकुल सिकंदराबाद की शाखा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेरली के प्रांगण में विश्व का पहला मनु महोत्सव आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में पूरी भव्यता के साथ प्रारंभ हो गया है। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने बताया कि इस प्रथम दिवसीय सत्र में सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के महामंत्री विनय आर्य मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। जिन्होंने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा कि महर्षि मनु ऐसे वैज्ञानिक चिंतन के धनी ऋषि हुए हैं जिनके वैज्ञानिक चिंतन के बाहर जाकर कोई भी व्यवस्था अपना कार्य नहीं कर सकती और यदि करेगी तो वह विध्वंस को ही आमंत्रित करेगी। उन्होंने कहा कि संसार के जितने भर भी संविधान आज कार्य कर रहे हैं उन सब पर महर्षि मनु के चिंतन का व्यापक प्रभाव है। उन्होंने कहा कि आर्य समाज ही ऐसे मंच उपलब्ध करा सकता है जिन पर महर्षि मनु के वैज्ञानिक चिंतन का विश्लेषण समाज हित में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज महर्षि मनु के चिंतन का विस्तार करने की आवश्यकता है। यदि हम वास्तव में एक सुसंस्कृत राष्ट्र की अवधारणा को विकसित होते हुए देखना चाहते हैं तो महर्षि मनु का चिंतन ही हमारा मार्गदर्शन कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज हमें अपनी वैज्ञानिक वैदिक संस्कृति की रक्षा के लिए अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। समाज में क्या-क्या गंदी बातें परोसी जा रही हैं, इस पर ध्यान देने की बजाय हम अपने बच्चों के साथ समय देने का प्रयास करें। यदि हमने अपने बच्चों को भी अपने महर्षि मनु के चिंतन से अवगत करा दिया तो भी हम भारतीय संस्कृति की बहुत बड़ी सेवा करने में सफल हो जाएंगे।

कार्यक्रम को ऊंचाई देते हुए आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान स्वामी चेतन देव वैश्वानर ने महर्षि मनु के व्यापक चिंतन पर अपना गहन चिंतन मंथन प्रस्तुत कर सभी को गदगद कर दिया। उन्होंने महर्षि मनु की अनेक व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया कि महर्षि मनु पर लगाए गए सारे आरोप निराधार हैं। उन पर जातिवाद को बढ़ावा देने के आरोप को खारिज करते हुए पूज्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि महर्षि मनु ने वैदिक चिंतन को आगे बढ़ाया। जिसमें कहीं पर भी जातिवाद नहीं है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि जाति का निर्माण केवल ईश्वर के अधीन है। उसे किसी मनुष्य के द्वारा नहीं बनाया जा सकता।

इसी क्रम में आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान आचार्य सत्यव्रत ने भी अपना विद्वत्तापूर्ण संबोधन देते हुए कहा कि महर्षि मनु विश्व के आदि संविधान निर्माता है जिन्होंने स्वयं को भी विधि के अधीन रखकर यह सिद्ध किया कि राजा विधि से ऊपर नहीं है। कार्यक्रम में प्राचार्य गजेंद्र सिंह ने विशिष्ट वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संसार और समाज की सारी व्यवस्था महर्षि मनु के उपदेशों के अधीन ही कार्य कर रही है। कुछ स्वार्थी तत्वों ने निहित स्वार्थ में महर्षि मनु के चिंतन को भ्रष्ट करने का कार्य किया है, लेकिन आज आर्य समाज ने ऐतिहासिक पहल की है, जब महर्षि मनु को समर्पित यह मनु महोत्सव यहां आयोजित किया जा रहा है।

इससे पूर्व आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के प्रधान और सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ राकेश कुमार आर्य ने बीज भाषण में यह स्पष्ट किया कि बौद्धिक चिंतन के माध्यम से नई वैचारिक क्रांति का शुभारंभ करने के लिए आर्य समाज ने जिस ऐतिहासिक कार्य को अपने हाथों में लिया है, उसका कार्य रुकने वाला नहीं है। क्योंकि यह दयानंद के दीवानों का समाज है, जिन्होंने देश की राजनीतिक स्वाधीनता के लिए काम किया और अब वह वैचारिक क्रांति के माध्यम से बौद्धिक दासता के बंधनों को तोड़ने के लिए कृत संकल्पित हो उठा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के द्वारा किया गया। जिसे कार्यक्रम के अध्यक्ष देव मुनि जी, उगता भारत समाचार पत्र के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह आर्य, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक ओमवीर सिंह भाटी, गुरुकुल मुर्शदपुर के प्रबंधक विजेंद्र सिंह आर्य आदि द्वारा संपन्न कराया गया। इस अवसर पर आर्य वीर दल उत्तर प्रदेश के सचिव आर्य वीरेश भाटी , इंजीनियर श्यामवीर सिंह भाटी, आर्य समाज सूरजपुर के प्रधान मूलचंद शर्मा, कमल सिंह आर्य ,दिवाकर आर्य, प्रदीप आर्य, सत्यवीर सिंह आर्य, रामजस आर्य, महेंद्र सिंह आर्य, रंगीलाल आर्य, सतीश आर्य, धर्मवीर सिंह आर्य, रमेश आर्य, बाबूराम आर्य , महावीर सिंह आर्य, प्रभाकर आर्य, अनार सिंह आर्य, जीत सिंह आर्य, सुशील आर्य आदि की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन वैदिक विद्वान आर्य सागर द्वारा किया गया। उन्होंने अपने सफल संचालन में महर्षि मनु की अनेक व्यवस्थाओं का उल्लेख किया और उपस्थित मातृ शक्ति से अनुरोध किया कि वह महर्षि मनु के वास्तविक वैदिक चिंतन के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें अवश्य पढ़ें। साथ ही विद्यालयों में शिक्षिकाओं के माध्यम से उनकी वैज्ञानिक सोच को बच्चों के भीतर उतारने का कार्य किया जाए।

अपने अध्यक्षीय के भाषण में देव मुनि जी ने स्पष्ट किया कि महर्षि मनु के चिंतन को महर्षि दयानंद जी महाराज ने सत्यार्थ प्रकाश में जिस प्रकार स्थान दिया है , उससे स्पष्ट होता है कि महर्षि दयानंद जी का मनु के प्रति विशेष श्रद्धा भाव था। उन्होंने कहा कि डॉ सुरेंद्र कुमार जी द्वारा गहन परिश्रम के बाद जिस प्रकार मनुस्मृति पर शोध कार्य किया गया है, वह ऐतिहासिक कार्य है जिसे प्रत्येक नौजवान को पढ़ना चाहिए।

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