निर्भया फिल्म : फिजूल की बौखलाहट

निर्भया कांड पर बनी फिल्म पर हमारे नेताओं की बौखलाहट मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आई। यह पूछना तो ठीक है कि ‘इंडियाज़ डॉटर’ फिल्म की निर्माता लेस्ली उडविन ने जेल में बंद बलात्कारी का इंटरव्यू कैसे ले लिया और उसे अधिकारियों को दिखाया क्यों नहीं लेकिन यह कह देना कि यह फिल्म भारत को बदनाम करने के लिए बनाई गई है या बलात्कारी बस ड्राइवर की राय को सही ठहराने के लिए बनाई गई है, बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है। इस फिल्म पर संसद में प्रतिबंध की मांग की गई और सरकार ने घुटने टेक दिए। आखिर क्यों?

इस फिल्म पर प्रतिबंध क्या सिर्फ इसलिए लगा दिया जाना चाहिए कि इसमें उस बलात्कारी ड्राइवर मुकेश का इंटरव्यू है? यदि मुकेश का इंटरव्यू है तो निर्भया के माता—पिता का भी है। निर्भया के पक्ष में लड़ने वाले वकीलों का भी है। सारी फिल्म का जोर इस बात पर है कि वह बलात्कार नृशंस था, पाशविक था और उसने सारे भारत का दिल दहला दिया था। जिस महिला, लेस्ली ने यह फिल्म बनाई है, वह खुद 18 वर्ष की आयु में बलात्कार का शिकार हुई थी। भला, वह बलात्कार का महिमा  मंडन कैसे कर सकती है? यदि उसने बलात्कार का महिमा मंडन किया है तो उसे कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए। जिन लोगों ने उस फिल्म को देखे बिना उस पर आग बरसाई है, उन्होंने अपने हल्केपन और गैर—जिम्मेदाराना रवैए को प्रमाणित किया है। उनसे कोई पूछे कि क्या रावण के बिना राम पर कोई फिल्म बन सकती है?

 हत्यारे मुकेश ने बलात्कार के लिए औरतों को दोषी ठहराया है। उस पापी आदमी से आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं? लेकिन उसने जो कुछ कहा है, वह हमारे कई नामी—गिरामी नेता और अफसर उसके बहुत पहले ही कह चुके हैं। उसने कहा है कि जवान लड़कियां उत्तेजक कपड़े क्यों पहनती हैं और रात को 11 बजे फिल्में क्यों देखती फिरती हैं? उसका दिमाग और उसके जैसे हजारों बलात्कारियों का दिमाग कैसे काम करता है, यह उजागर करके लेस्ली उडविन ने एक उत्तम फिल्मकर्मी का कर्तव्य निभाया है। यह फिल्म तो किसी भारतीय को बनानी चाहिए थी लेकिन एक अंग्रेज महिला ने बाजी मार ली। जब तक बलात्कारियों के चेतन, अचेतन और अवचेतन मन की गहरी खुदाई नहीं होगी, सरकार द्वारा अरबों रु. का कोश बना देने का पूरा फायदा नहीं होगा।

 जहां तक इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का प्रश्न है, ठीक है, आप भारत में लगा दीजिए लेकिन इसे आप दूसरे देशों में कैसे रोकेंगे? इसके अलावा यदि यह बीबीसी, सीएनएन और अन्य विदेशी चैनलों पर दिखाई जाएगी तो आप क्या करेंगे? इतना ही नहीं इंटरनेट और यू—ट्यूब पर अब करोड़ों लोग इसे देखेंगे, क्योंकि हमने इसको लेकर इतना हल्ला मचा दिया है। पता नहीं, हमारे नेतागण कब अपने सोच—विचार में गंभीरता लाएंगे?

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