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कृषि जगत

जीवन ,जगत और जैवविविधता

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जीवन को यद्यपि चित्रित रेखित परिभाषित नहीं किया जा सकता…. लेकिन स्वभाव से जिज्ञासु मनुष्य सभ्यता के आदि से ही विविध जीवों उनके स्वभाव विचित्रता को जानने समझने का प्रयास कर रहा है ।पृथ्वी पर करोड़ों सालों से महासागरों की गहराई से लेकर पर्वतों के शिखरों मरुस्थल मैदानों नदियों के आँचल में जीवन फल फूल रहा है। पृथ्वी पर लाखों प्रकार के जीव जंतु वनस्पति जीवाणु आदि पाए जाते हैं…।

इन सभी जीवो की विविधता ही जैव विविधता कहलाती है ।

मोटे तौर पर यह तीन भागों में विभक्त है।

1प्रजातीय ,2अनुवांशिक, 3परास्थितिकी विविधता।
सरल शब्दों में ऐसे समझिए गाय ,गाय है वह हिरण नहीं है हिरण ,हिरण है वह शेर नहीं बन सकता। साथ ही मैदान का हिरन पहाड़ के हिरन से अलग खूबियों से लैस होता है तो वहीं पहाड़ के हिरन में मैदान के वातावरण के मुताबिक कुछ विशेष खूबियां होती है। जीवो के बीच उनकी विभिन्न प्रजातियों के बीच उनके आवास क्षेत्रों के बीच जो अंतर विशेषताएं हैं वह सभी जैव विविधता कहलाती है। जिस देश में जितने अधिक प्रकार के जीव जंतु पेड़ पौधे वृक्ष फल फूल लता पाए जाते हैं उसे उतना ही जैव विविधता के मामले में समृद्ध देश माना जाता है। अपने भारतवर्ष की गणना दुनिया के सर्वाधिक जैव विविधता के मामले में समृद्ध देशों में की जाती है। भारत को पुण्य भूमि पारस मणि यूं ही नहीं कहा जाता। भारत का क्षेत्रफल दुनिया के केवल 2.5% क्षेत्रफल में हिस्सेदारी रखता है लेकिन यहां दुनिया के 14% जीव जंतु वनस्पति पाए जाते हैं। भारत में 2546 प्रकार की खारे व मीठे जल की मछलियां, 198 प्रकार के उभयचर मेंढक कछुआ जैसे जीव जो जल थल दोनों में निवास कर सकते हैं, 1331 प्रकार के पक्षि 408 प्रकार के सरीसृप, 430 स्तनधारी प्रकार के जीव पाए जाते हैं साथ ही 50000 प्रकार की वनस्पति, 15000 प्रकार के फूल भारत भूमि पर पाए जाते हैं यह तो प्रजातियां है फिर इनकी उप्रजातियां तो यह संख्या लाखों करोड़ों में पहुंच जाती हैं एक धान की ही 50,000 से अधिक किस्मे भारत में उपलब्ध है गेहूं की भी इतनी प्रजातियां हैं । तोरई कद्दू आम जैसे फल सब्जियों की भी सैकड़ों हजारों प्रजातियां भारतवर्ष में पाई जाती है यह बात अलग है कि हम उनके संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है मनुष्य विज्ञान की प्रयोगशाला में जैव विविधता को घड नहीं सकता जैव विविधता का भली-भांति प्रयोग जरूर कर सकता है। उदाहरण के लिए गेहूं व धान की बोनी किस्में जो हरित क्रांति में काम आई उन्हें मूल प्राकृतिक किस्मो से ही विकसित किया गया है जेनेटिक ढांचे में बदलाव के साथ। जीवन और जैव विविधता एक दूसरे के पर्यायवाची हैं । अब जैव विविधता के महत्व पर विचार करें तो जीवन का महत्व हम सभी को मालूम है। हमारा भोजन, हमारी दवाई आवास जीने के लिए हमारी जो भी ज्ञात अज्ञात आवश्यकताएं हैं उस सभी की पूर्ति जैव विविधता से होती है। चाहे कोई शाकाहारी हो या मांसाहारी सभी भोजन के लिए जैव विविधता पर आश्रित हैं भोजन ही नहीं सारी विश्व अर्थव्यवस्था जैव विविधता के सहारे चल रही है। हम स्वयं अपने शरीर पर दृष्टिपात करें तो हमारे पाचन संस्थान विशेष तौर पर ऑतो में अरबों प्रकार के जीवाणु पाए जाते हैं जिन्हें मित्र बैक्टीरिया कहते हैं यह मित्र बैक्टीरिया आंतों की परत में डोपामाइन शेरोटीन मेलाटोनिन जैसे हार्मोन बनाते हैं… जो दिमाग के संचालन नियंत्रण के लिए बेहद जरूरी है… यही कारण है आंतों को दूसरा मस्तिष्क भी कहा जाता है… अधिकांश मानसिक रोगी पेट के रोगी भी होते हैं….. बात वनस्पति जगत की करें तो वातावरण में 78 फ़ीसदी से अधिक नाइट्रोजन गैस को पेड़ पौधों की जड ग्रंथियों में मौजूद राइजोबियम जीवाणु समूह नाइट्रोजन उर्वरक में परिवर्तित करता है जिससे पेड़ पौधों को पोषण मिलता है कितना अद्भुत है। सनातन वैदिक संस्कृति में जैव विविधता का पल-पल व पग पग- पर संरक्षण सम्मान किया गया है हमारे दो ऐतिहासिक धार्मिक ग्रंथ रामायण व महाभारत का अवलोकन करें तो सैकड़ों ऋषि मुनि व उनके आश्रमों का उल्लेख मिलता है जो अपने आश्रमों में जैव विविधता का संरक्षण करते थे। आश्रम में भांति भांति के वृक्ष वन्य जीव का पालन पोषण होता था ।यह आश्रम अपने आप में संरक्षित क्षेत्र थे। जहां कोई भी जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचाने वाला वनस्पतियों का दोहन करने वाले मनुष्य का प्रवेश वर्जित था। ऋषि मुनियों की भोजन संबंधित आवश्यकताओं की पूर्ति भी जैव विविधता से ही होती थी विविध जंगली फल फूल कंदमूल आदि के माध्यम से…. जैव विविधता के संरक्षण में भारद्वाज अगसत्य दुर्वासा ,अगीरा ,कन्व जैसे असंख्य ऋषि-मुनियों ने जो योगदान दिया वह अतुल्य अनुपम है। आज भारत में जीव जंतुओं वृक्षों के संरक्षण के लिए 89 राष्ट्रीय पार्क 500 से अधिक वन्य जीव अभ्यारण , 21 पक्षी विहार 15 जैव मंडल सुरक्षित क्षेत्र है फिर भी साल दर साल विश्व के साथ-साथ भारत की जैव विविधता का हास हो रहा है ।60,000 से अधिक पेड़ पौधे 2,000 से अधिक जीव जंतुओं की प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर है। जैव विविधता को बचाने का जो कार्य हमारे पूर्वज जंगलों में रहने वाले हमारे वनवासी जन निशुल्क करते थे
वह करोड़ों अरबों रुपए खर्च करके भी नहीं हो पा रहा। आज का मनुष्य कथित तौर पर उच्च शिक्षित है लेकिन वह संस्कारित सभ्य नहीं है… जंगलों का काटना, शिकार पर्यावरण प्रदूषण, जनसंख्या विस्फोट के कारण जैव विविधता संकटग्रस्त है ।आज का मनुज वेद की शिक्षाओं को ना जानता है ना मानता है। वेद में समस्त जीवो का पिता ईश्वर को बतलाया गया है यजुर्वेद के 23 वे अध्याय का तीसरा मंत्र इस प्रकार है।

य: प्राणतो निमिषतो महित्वैक इन्द्राजा जगतो बभूव।
य ईशे अस्य द्विपदश्चतुष्पद: कस्मै देवाय हविषा विधेम ॥४॥
अर्थ- ईश्वर पिता है सभी जीवो का वह सभी जीवो का अकेला सर्वोपरि विराजमान स्वामी है। चाहे दो पद वाले हो या चार पद वाले सांस लेने वाले या पलक झपकाने वाले सभी जीवो का ईश्वर स्वामी है।

इस मंत्र का गीत के रूप में बड़ा ही सुंदर भावार्थ स्वर्गीय पंडित सत्यपाल पथिक जी ने किया है।

अनगिनत प्राणी जगत में, सबका दाता एक है ।
सब पिताओ का पिता ,जगत माता एक है।।
जर्रे जर्रे में समाया हर जगह मौजूद है।
इन सभी फूलों में हंसता मुस्कुराता एक है।।
बात इतनी सी समझ आती नहीं।
खाने वाले हैं करोड़ों, पर खिलाता एक है।।

वर्ष 1993 से पूरे विश्व में 22 मई को एक साथ विश्व ‘जैव विविधता दिवस ‘ मनाया जाता है इस वर्ष जैव विविधता दिवस की थीम है Building a shared future for all life अर्थात सभी जीवो के साझे भविष्य का निर्माण करें। जिन बातों शिक्षाओं का प्रचार प्रसार आज विश्व बिरादरी संयुक्त राष्ट्र संघ जलवायु परिवर्तन पर्यावरण संरक्षण समितियां कर रही है वह बातें हमारी संस्कृति में पल-पल पर दृष्टिगोचित होती हैं। यही तो ऋषि-मुनियों ने कहा है कि हम सभी का निर्माता एक हैं हम सभी की दुनिया एक है किसी भी एक जीव का अपना कोई एक अस्तित्व नहीं है सब मिलजुल कर अपने भोगों को भोग रहे हैं, सभी का एक भविष्य है। आओ 22 मई को मिलकर जैव विविधता को बचाने का संकल्प लें एक पेड़ भी आप लगाते हैं तो मान लीजिए आप अपना कर्तव्य के पालन की दिशा में एक पग आपने बढा दिया हैं। आप किसी चिड़िया को दाना खिला रहे हैं पानी पिला रहे हैं तो आप जैव विविधता को बचा रहे प्रत्येक व्यक्ति जैव विविधता को बचा सकता है और ऐसा कर अपने आपको भी अपनी पीढ़ी के भावी भविष्य को भी।

आर्य सागर खारी✍✍✍

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