Categories
आज का चिंतन

यजुर्वेद का साधारण परिचय

यजुर्वेद में विशेष क्या है ?

यजुर्वेद में विभिन्न प्रकार के यज्ञों की चर्चाएं हैं। कर्मकांड है।
यजुर्वेद का तात्पर्य ऋग्वेद से प्राप्त ज्ञान को, विचारों को कार्य में परिणत करके अभीष्ट की सिद्धि कैसे प्राप्त हो ? इसका विवरण है।
कर्म का सोपान चढ़ने के लिए जो प्रेरित करता है ,जो कर्म वेद है, जो कर्म में प्रवृत्त करने वाला वेद है ,वही यजुर्वेद है।
ईश्वर ने ऋग्वेद में गुण और गुणी के विज्ञान के प्रकाश के द्वारा सब पदार्थ प्रसिद्ध किए हैं ।उन मनुष्यों को पदार्थों से जिस जिस प्रकार यथा योग्य उपकार लेने के लिए क्रिया करनी चाहिए तथा उस क्रिया के जो जो अंग व साधन है सो सो यजुर्वेद में प्रकाशित किए है, क्योंकि जब तक क्रिया करने का दृढ ज्ञान नहीं तब तक उस ज्ञान से श्रेष्ठ सुख कभी नहीं हो सकता और विज्ञान होने की यह हेतु हैं कि जो क्रिया प्रकाश अविद्या की निवृत्ति, अधर्म में अप्रवृत्ति तथा धर्म और पुरुषार्थ का सन्योग करना है ।जो कर्मकांड है सो विज्ञान का निमित्त और जो विज्ञान कांड है सो क्रिया से फल देने वाला होता है।
कोई जीव ऐसा नहीं है कि जो मन, प्राण, वायु ,इंद्रिय और शरीर के चलाए विना एक क्षण भर भी रह सके, क्योंकि जीव अल्पज्ञ एकदेशवर्ती चेतन है। इसलिए जो ईश्वर ने ऋग्वेद के मंत्रों से सब पदार्थों के गुण गुणी का ज्ञान और यजुर्वेद के मंत्रों से सब क्रिया करनी प्रसिद्ध की है, क्योंकि ऋक और यजु इन शब्दों का अर्थ भी यही है जिससे मनुष्य लोग ईश्वर से लेकर पृथ्वी पर्यंत पदार्थों के ज्ञान से धार्मिक विद्वानों का संग सब शिल्पक्रिया सहित विद्याओं को सिद्धि और श्रेष्ठ विद्या ,श्रेष्ठ गुण या विद्या का दान यथा योग्य उक्त विद्या के व्यवहार से सर्व प्रकार के अनुकूल द्रव्य आदि पदार्थों का खर्च करें। इसलिए उसका नाम यजुर्वेद है।
यजुर्वेद में मुख्य रूप से कहा गया है कि सब का सृजन करने वाले देव सबको श्रेष्ठ कर्म करने के लिए प्रेरित करो।
मनुष्य शुभ कर्म करते हुए 100 वर्ष तक जीने की इच्छा रखें।
यह यजुर्वेद की प्रमुख शिक्षा है।

यजुर्वेद का साधारण परिचय

इस यजुर्वेद में कुल अध्याय 40 हैं। प्रत्येक अध्याय में कितने मंत्र हैं इन सब का विवरण निम्न प्रकार है :
अध्याय 1 में 31 मंत्र, अध्याय 2 में 34 मंत्र ,अध्याय 3 में 63मंत्र, अध्याय 4 में 37 मंत्र, अध्याय 5 में 43 मंत्र ,अध्याय 6 में 37 मंत्र, अध्याय 7 में 48 मंत्र, अध्याय 8 मत 63मंत्र, 9 में 40 मंत्र ,अध्याय 10 में 34 मंत्र, अध्याय 11 में 83 मंत्र ,अध्याय 12 में 117 मंत्र, अध्याय 13 में 58 मंत्र, अध्याय 14 में 31 मंत्र, अध्याय 15 में 65 मंत्र ,अध्याय 16 में 66 मंत्र, अध्याय 17 में 99 मंत्र, अध्याय 18 में 77 मंत्र, अध्याय 19 में 95मंत्र ,अध्याय 20 में 90 मंत्र, अध्याय 21 में 61 मंत्र, अध्याय 22 में 34 मंत्र ,अध्याय 23 में 65 मंत्र ,अध्याय 24 में 40 मंत्र, अध्याय 25 में 47 ,अध्याय 26 में 26 ,अध्याय 27 में 45, अध्याय 28 में 46, अध्याय 29 में 60 मंत्र, अध्याय 30 में 22 मंत्र, अध्याय 31 में 22 मंत्र, अध्याय 32 में 16 मंत्र, अध्याय 33 में 97 मंत्र ,अध्याय 34 में 58 ,अध्याय 35 में 22 मंत्र, अध्याय 36 में 24, अध्याय 37 में21, अध्याय 38 में 28 मंत्र, अध्याय 39 में 13 मंत्र तथाअध्याय 40 में 17 मंत्र कुल 1975 मंत्र हैं।
यजुर्वेद की अन्य मुख्य शिक्षा है कि मानव को अज्ञानी नहीं रहना चाहिए ,अपनी शक्ति को पहचान कर निर्भय रहना चाहिए, अध्यात्म मार्ग अपनाकर मोक्ष को प्राप्त करना चाहिए। दुराचरण को छोड़कर उत्तम आचरण करना चाहिए। संसार में व्यवहार के लिए, आचरण के लिए आदान-प्रदान भी आवश्यक है। किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। वीर पुरुष को भी अपनी बुद्धि का सदुपयोग अच्छे कार्य के लिए करना चाहिए। संसार में उदासीन हो कर के हम न रहे।
संसार में रहकर संसार से पार होना हमको आना चाहिए संसार को संसार इसलिए कहते हैं उसमें सभी संग संग चलें इसी में सार है। अपनी धारणा और बुद्धि से निरंतर उन्नति प्राप्त करते रहें। समान रूप से हम सभी ज्ञान प्राप्त करते हुए एक दूसरे मनुष्य से सदैव जुड़े रहें ।औषधियों का सेवन अपने प्राणों की रक्षा के लिए किस प्रकार करना है हमें यह विद्या एवं ज्ञान आना चाहिए। अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होना है ।सभी के लिए श्रेष्ठ कर्म करते हुए वाणी भी हितकारी , उपकारी सुखकारी रखें ।जो ज्ञानी पुरुष हैं, जो विद्वान लोग हैं उनकी संगति करें और सत्कर्म करने की प्रेरणा ऐसे ज्ञानियों से प्राप्त करें। परंतु कर्म करते हुए कर्म में लिप्त नहीं रहे। हमारे व्यवहार में आचरण में कुटिलता नहीं होनी चाहिए बल्कि सरलता एवं उत्तमता होनी चाहिए। हमें सदैव ही देने की संस्कृति में जीना चाहिए अर्थात देव गुणों से हमें आपूरित होना चाहिए। संयमता से अर्थात लंपटता अथवा कामुकता से दूर रहते हुए पत्नी के साथ उत्तम संबंध बनाए रखना एक अच्छे मनुष्य का कर्तव्य है।
जिससे परिवार में हमेशा शांति एवं सुख प्राप्त होता रहेगा। वही समाज में परिवार की स्त्रियां भी अनुशासन में रहकर अपने परिवार को और पति को सुख प्रदान करती रहे। ज्ञान से ज्ञान मिलकर और तेज से तेज मिलकर वृद्धि करते रहें।
तू कुटिल न बन। तेरा यज्ञपति भी कुटिल न बने। सुकर्म करने के लिए एक अकुटिल होना अति आवश्यक है।
मनुष्य को असत्य को त्याग कर सत्य का ग्रहण करते रहना चाहिए।
वेद सब का ज्ञाता है जिस प्रकार वेद देवताओं के लिए ज्ञानदाता हुआ उसी प्रकार मुझे भी ज्ञान देने वाला हो। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि ज्ञान प्राप्ति के लिए वेदों का अध्ययन करें।
हम दोनों पति-पत्नी गृहस्थी संबंधी कार्य 100 बर्ष तक निभाते रहें।
अग्नि शरीर का रक्षक है । अतः अग्नि मेरे शरीर रक्षा के लिए तू आयु देने वाला है ।इसलिए दीर्घायु दे, तेजस्विता दे।
कर्म करने वाला, पुरुषार्थ करने वाला ,सुवचन बोलते हुए कर्म करें जिससे सुनने वाला भी प्रसन्न हो और सुमार्ग की ओर प्रवृत्त हो। कठोर और अशुभ वचन नहीं बोलना चाहिए चित्त् में मलीनता और दुख का आधिपत्य कठोर और अशुभ वचन बोलने से होता है। हमारा मन सुकर्म, बल ,दीर्घायु व चिरकाल तक सूर्य दर्शन के लिए पुनः पुनः प्रवृत्त हो।
मृत्यु से मुक्त हो,बंधनों से फल की तरह पक कर मुक्त हो।
हे अग्नि! दोष युक्त आचरण से मुझे निवृत्त कर और उत्तम आचरण में मुझे रख।सुख सहित जिस पथ का अनुगमन किया जा सकता है और जिस में विनाश का भय नहीं है ऐसे पथ पर चलकर उन्नति प्राप्त करें।

देवेंद्र सिंह आर्य
चेयरमैन : उगता भारत

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark
mavibet giriş
imajbet güncel
betpark giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet güncel
imajbet güncel giriş
imajbet giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
safirbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano güncel
betnano güncel giriş
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet güncel giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
Grandpashabet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
holiganbet güncel
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş