खरगोन में जिस धन्नालाल के घर में घुसे थे दंगाई, उन्होंने बताया किसके पास थे कैसे हथियार

खरगोन में हिंसा के बाद मंदिर के बाहर पड़े पत्थर और शहर में पसरा सन्नाटा (फोटो साभार- दैनिक भास्कर)
रामनवमी के मौके पर रविवार (10 अप्रैल 2022) को कई राज्यों में हिंसा की घटना सामने आई। ऐसी ही एक घटना मध्य प्रदेश से भी सामने आई। राज्य के खरगोन में रामनवमी जुलूस पर पथराव और आगजनी की घटनाओं के बाद पूरे शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस मौजूद है। हालाँकि लोगों ने जिस तरह के दहशत को झेला, वह उनसे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
कुछ चश्मदीदों के हवाले से दैनिक भास्कर ने बताया है कि उस दिन हिंसा कैसे भड़की। इन्हीं लोगों में से एक हैं धन्नालाल पंवार। वह शीतला माता मंदिर के पास रहते हैं। उस दिन उपद्रवी उनके घर में भी घुस आए थे। रिपोर्ट में धन्नालाल के हवाले से बताया गया है कि 300-400 लोगों की भीड़ अचानक से आ गई थी। वे चिल्ला रहे थे- सब जला दो। काटो, मारो, छोड़ो मत…

उन्होंने बताया कि पहले मस्जिद में नमाज पढ़कर लोग शोभा यात्रा के मार्ग से निकले। फिर अचानक पथराव शुरू हुआ और देखते ही देखते यह हिंसक हो गया। इसमें मस्जिद में नमाज पढ़ रहे लोग भी इसमें शामिल हो गए। किसी के हाथ में पत्थर, किसी के हाथ में फरसे तो किसी के पास अन्य हथियार थे। भीड़ ने उनके घर में भी घुस कर तांडव मचाया। गाड़ी में आग लगा दी और पेट्रोल बम फेंके। यह सब देख उनकी 10 साल की बेटी बेहोश हो गई। पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला।

त्रिलोक जाधव नाम के अन्य चश्मदीद ने बताया कि मंदिर में काफी तोड़फोड़ की गई। भगवान श्रीराम के पोस्टर को फेंक दिया गया। बच्चों को भी नहीं छोड़ा। दंगाइयों को जो भी दिखा सब पर पत्थरबाजी की। गाड़ियों में आग लगा दी। त्रिलोक ने बताया कि दंगाई यह कहते हुए हमला कर रहे थे कि जो भी दिखे, उसे मार डालो।

इसी तरह खरगोन के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ चौधरी ने बताया था कि एक दंगाई तलवार लेकर हिंदुओं की ओर दौड़ा था। उसे पकड़ने के दौरान उन्हें किसी ने पीछे से गोली मार दी, जो उनके बाएँ पैर में लगी थी। उन्होंने भी बताया था कि झाँकी निकलने के दौरान ही नमाज का समय हो गया था, जिसके बाद हालात बिगड़ गए।

10 अप्रैल को खरगोन के तालाब चौक इलाके में रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा के दौरान कुछ लोगों ने पथराव किया। 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। एक रिपोर्ट के अनुसार यह घटना अचानक नहीं घटी। यह पूर्व नियोजित हमला था। उपद्रवियों ने पहले से ही छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा कर रखे थे।

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