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शंकराचार्य के समर्थन में आई हिंदू महासभा

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साईं बाबा को भगवान मानने का मामला

मुंबई। साई बाबा को भगवान के रूप में मान्यता का विरोध कर रहे द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद अब अकेले नहीं हैं। अखिल भारत हिंदू महासभा ने शंकराचार्य को अपना समर्थन जाहिर किया है। हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेता डॉ. संतोष राय ने कहा है कि शंकराचार्य ने शिर्ड़ी के सांई बाबा को भगवान की तरह पूजने और उनके मंदिर बनाने को धर्म के विरुद्ध आचरण बताया है, वह बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा है कि शंकराचार्य द्वारा उठाए गए हिंदू धर्म के अपमान के इस मामले में विश्व हिंदू परिषद, संघ परिवार जैसी हिंदू समाज की राष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी के रहस्य को भी समझने की जरूरत है। हिंदू महासभा पहली संस्था है, जो साई बाबा के मामले में शंकराचार्य के समर्थन में खुलकर मैदान में आई हैं।
हिंदू महासभा का कहना है कि वैदिक ग्रंथों और और किसी भी सनातन धर्म ग्रंथ में साई बाबा का किसी भी तरह का कोई उल्लेख ही नहीं है। डॉ. राय ने कहा कि सांई बाबा को भगवान मानने के विरोध के मामले में वे पूरी तरह शंकराचार्य के साथ है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने बिल्कुल सही कहा है कि सांई बाबा केवल एक आदमी थे, भगवान नहीं। इसलिए किसी आदमी को भगवान बनाकर उसके मंदिर बनाना और भगवीन की तरह से उसे पूजना एक तरह से भगवान का अपमान है। हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेता डॉ. राय ने कहा है कि भगवान विष्षु के 24 अवतारों में सांई बाबा है ही नहीं फिर भी उनको भगवान राम की बराबरी में खड़ा करके साई राम के रूप में पूजा करना हिंदू, वैदिक और सनातन परंपराओं के विरूद्ध है। हिंदू महासभा ने यह भी कहा है कि साई बाबा सिर्फ एक वर्ग विशेष में जन्मे धार्मिक नेता थे, और उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों में लोगों की सेवा के काम किए होंगे। लेकिन हमें इस बात का भी खयाल रखना चाहिए कि इस तरह से हर किसी को भगवान राम के साथ जोड़कर सांईराम कहना भगवान राम का अपमान है। डॉ. राय ने कहा है कि भगवान राम का यह अपमान असहनीय है। उल्लेखनीय है कि हिन्दू महासभा के वरिष्ठ नेता डॉ. राय सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि मामले में वादी भी हैं। सांई बाबा का इतिहास बताते हुए वहारुद्दीन नामक एक मुसलिम अफगानिस्तान से अहमदनगर आया, जिसके एक बेटा और एक बेटी थी। बेटे का नाम चांद मिलान था, जो बाद में सांई बाबा बन गया।
हिंदू महासभा ने कहा है कि सनातन धर्म से जुड़ा मामला होने के बावजूद संघ परिवार, विश्व हिंदू परिषद एवं अन्य धार्मिक संस्थाओं का शंकराचार्य की बात को अनसुना कर देना किसी रहस्य से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की नीति से धर्म नहीं बच सकता। बल्कि इस तरह से भगवान की बराबरी में लोगों को पूजने से घर्म का अपमान हो रहा है। डॉ. राय ने साईं बाबा को भगवान मानने पर शंकराचार्य के विरोध को जायज ठहराते हुए देश भर में हिंदू महासभा की तरफ से समर्थन घोषित किया है।

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