Categories
डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से राजनीति समाज

संभल विवाद की वास्तविकता

1947 में जब देश आजाद हुआ तो एक मिथक कांग्रेस की ओर से गढ़ा गया कि देश को आजाद कराने में हिंदू – मुस्लिम दोनों समुदायों का बराबर का योगदान है । यद्यपि मुस्लिम अपने लिए अलग देश लेने में सफल हो गए थे, परन्तु जो मुसलमान उस समय देश में रह गए थे, उनका तुष्टिकरण करने के लिए इस मिथक को तेजी से स्थापित किया गया। ऐसा करने से मुस्लिम समाज के देशविरोधी अराजक तत्त्वों वे सारे पाप धुल गए जो आजादी से पहले उन्होंने मुस्लिम लीग को अपना समर्थन देकर और उसके इशारे पर अनेक अवसरों पर हिंदू समाज के खिलाफ ‘ सीधी कार्यवाही दिवस ‘ जैसे नरसंहारों में भाग लिया था। फिर भी हिंदू समाज ने कांग्रेस की इस हरकत को इसलिए सहन कर लिया कि बहुत संभव है कि अब मुस्लिम समाज का कट्टरवादी तबका अपनी प्रकृति और प्रवृत्ति दोनों में सुधार करेगा , परन्तु ऐसा न तो होना था और न हुआ। वोट की राजनीति ने मामले को और भी अधिक उलझा दिया। आजादी की प्रभात में यह बात भी स्पष्ट होनी चाहिए थी कि मुस्लिम समाज ने हिंदू धर्म स्थलों पर जिस प्रकार कब्जा किया था, उन्हें हिंदू समाज को लौटा दिया जाएगा।

जब हम देश में नया परिवेश बनाने के लिए कृतसंकल्पित हुए थे और देश के संविधान के माध्यम से अपना यह संकल्प व्यक्त किया था कि हम भारत की सामासिक संस्कृति के प्रति समर्पित रहेंगे तो इसका अभिप्राय यह था कि अतीत में हिंदू समाज की उदारता के साथ खिलवाड़ करते हुए उसे जो घाव दिए गए हैं, उन घावों का उपचार किया जाएगा। इसे प्रतिशोध की भावना से नहीं अपितु वैर विरोध को शांत करने के दृष्टिकोण से किया जाना अपेक्षित था। परंतु कांग्रेस की तुष्टिकरण और वोट की राजनीति के चलते ऐसी सद्भावना का परिवेश सृजित करने में राजनीतिक स्तर पर उदासीनता बरती गई। इसी का परिणाम यह हुआ कि चाहे राम जन्मभूमि हो, चाहे कृष्ण जन्म भूमि हो या वाराणसी स्थित हिंदुओं के धर्म स्थल हों या इसी प्रकार देश में अन्यत्र प्रमुख स्थानों पर हिंदुओं के धर्मस्थलों पर खड़े मुसलमानों के धर्मस्थल हों, कांग्रेस की सरकारों की ओर से उन सब पर मौन साध लेना ही उपाय मान लिया गया। कांग्रेस की सरकारों की इस प्रकार की उदासीनता की नीतियों को देखकर लोगों में भीतर ही भीतर एक बेचैनी बनी रही।

जो लोग अपने धर्मस्थलों के इतिहास के बारे में गहराई से जानते थे, वे इन चीजों पर लिखा पढ़ी करते रहे या न्यायालय में जाकर अपने धर्मस्थलों को वापस लेने के लिए कार्यवाही करने लगे। जब यह सब कुछ हो रहा था तब भी कांग्रेस की सरकारें और कांग्रेस के नेता सचेत नहीं हुए और वे लोकतांत्रिक देश में हिंदू समाज के लोगों के द्वारा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किये जा रहे इन उपायों को भी उनकी कट्टरता कहकर मुसलमानों के मध्य प्रचारित करते रहे । साथ ही उनके वोट प्राप्त करने के लिए उनसे यह भी कहते रहे कि हम आपके साथ हैं और यदि कोई हिंदू या हिंदूवादी संगठन इस प्रकार की कट्टरता दिखाएगा तो उससे कानून अपने ढंग से निपटेगा। हिंदू समाज की इस बेचैनी के भाव को भारतीय जनता पार्टी ने अपने जन्म काल से ही समझा और कांग्रेस की रीति नीति के चलते जितनी अब तक हिंदू समाज की क्षति हो चुकी थी, उसकी पूर्ति के लिए उसने राजनीति को नई धार देनी आरंभ की। जिसके परिणामस्वरूप देश में नया राजनीतिक विमर्श बना और उस विमर्श का परिणाम हमने देखा कि श्री राम जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर खड़ा हो गया।

इस घटना से प्रेरित होकर हिंदू समाज ने इतिहास को सही ढंग से पढ़ते हुए, उसकी सही परिभाषा और उसके सही तथ्य न्यायालयों के सामने लाने आरंभ किये। जिससे इस्लाम के उन कट्टरपंथी तत्वों को पसीना आने लगा जो यह भली प्रकार जानते रहे हैं कि हमने हिंदुओं के धर्मस्थलों पर ही अपने धर्मस्थलों का निर्माण किया हुआ है। इसके उपरांत भी इन्होंने मुस्लिम समाज के लोगों को अपने साथ लगाए रखने के लिए नए-नए नाटक करने आरंभ किये जो इतिहास की सच्चाई से अछूते रखे गए हैं।
अपने पापों को छुपाने के लिए इस्लामी कट्टरपंथी तत्व कभी किसी सनातनी धर्मस्थल में फव्वारे की कल्पना करते हुए अपनी स्थिति को हास्यास्पद बनाते हैं तो कभी किसी दूसरे बहाने से मामले को लटकाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। वे किसी भी स्थिति में इतिहास के सच को सामने आने देना नहीं चाहते हैं।

इस्लामी कटरपंथियों की इसी प्रकार की मानसिकता का परिणाम है, संभल की मस्जिद में हुआ अभी हाल ही का विवाद। यहां पर भी संभल के जिला न्यायालय के समक्ष हिंदुओं की ओर से एक याचिका दायर कर यह दावा किया गया था कि संभल की शाही जामा मस्जिद वास्तव में शाही मस्जिद न होकर हिंदुओं का एक धर्म स्थल है, जहां पर कभी एक भव्य मंदिर हुआ करता था। इस पर समदर्शी दृष्टिकोण अपनाते हुए जिला न्यायालय ने सर्वे के आदेश पारित किये। जिसका मुस्लिम समाज ने पहले दिन से विरोध करना आरंभ कर दिया। घटनाओं ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि पहले से ही तैयारी कर ली गई थी कि यदि सर्वेक्षण टीम उक्त जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए आती है तो उसका डटकर विरोध किया जाएगा।

संभल के सिविल जज के न्यायालय में विष्णु शंकर जैन की ओर से जामा मस्जिद को लेकर वाद दायर किया गया है। सारे मामले को भटकाने और मुस्लिम समाज को भड़काने के उद्देश्य से प्रेरित होकर सर्वेक्षण टीम का विरोध हिंसक ढंग से भी करने की तैयारी मुस्लिम कट्टरपंथी तत्वों ने कर ली थी। यह कहना कि जब सर्वेक्षण टीम वहां पहुंची तो मामला गरमागरम बहस से आगे बढ़कर हिंसा में परिवर्तित हो गया, तथ्यों से मुंह फेर लेने वाली बात होगी। वास्तविकता यह है कि प्रदर्शनकारियों ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए पुलिस बल पर भी हमला किया। इसके साथ ही सर्वेक्षण टीम के सदस्यों को भी उन्होंने हिंसा के माध्यम से भगाने का प्रयास किया। जिसके कारण कानून प्रवर्तन अधिकारियों को भी चोटें आई हैं और मौत भी हुई हैं।

हम और आप सभी टी0वी0 चैनलों पर मुस्लिम समाज के प्रवक्ताओं को बार-बार यह कहते सुनते हैं कि मुस्लिम समाज का देश के संविधान में पूरा-पूरा विश्वास है। अब जो लोग भारतवर्ष के संविधान में अपनी निष्ठा व्यक्त करते हैं, क्या वह इतने भोले हैं कि वे यह नहीं जानते कि यदि कोई सर्वेक्षण टीम न्यायालय के आदेश के उपरांत आ रही है तो वह देश के संविधान द्वारा स्थापित न्यायिक प्रक्रिया का एक अंग है ? और इसका विरोध करना देश के संविधान का विरोध करने के समान है ? सच यह है कि ये लोग सभी कुछ भली प्रकार जानते हैं। देश के संविधान में बार-बार आस्था व्यक्त करना स्वयं अपनी आस्था पर प्रश्नचिह्न लगाना है। यदि इनसे ईमानदारी से यह पूछ लिया जाए कि तुम्हारी आस्था देश के संविधान के प्रति है या फिर शरीयत के प्रति है तो ऐसी स्थिति में प्रश्न का उत्तर यही आएगा कि सरिया उनके लिए पहले है। इसका अभिप्राय है कि केवल मूर्ख बनाने के लिए इस बात को बार-बार दोहराया जाता है कि हमारा देश के संविधान में पूरा-पूरा विश्वास है।

इस मामले के संबंध में दायर की गई याचिका में कहा गया कि -‘मस्जिद मूल रूप से एक हरिहर मंदिर था, जिसे 1529 में मस्जिद में बदल दिया गया। मंदिर को मुगल सम्राट बाबर ने 1529 में ध्वस्त कराया था। बाबरनामा और आइन-ए-अकबरी किताब में इस बात का उल्लेख है कि जिस जगह पर जामा मस्जिद बनी है, वहाँ कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था।’

अब इस तथ्य की पुष्टि के लिए न्यायालय को सर्वेक्षण तो करना ही था। उस सर्वेक्षण में मुस्लिम पक्ष भी उपस्थित रहना था । सच्चाई को जानने के लिए चीजों का उसी प्रकार परीक्षण निरीक्षण किया जाना था, जिस प्रकार कानूनी प्रक्रिया में निर्धारित किया गया है। अब जो कुछ भी सच्चाई आती, वह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दी जाती। यदि दोनों पक्षों की ही भारत के संविधान में आस्था है और कानूनी प्रक्रिया को वे सही मानते हैं तो उन्हें किसी भी स्थिति में हिंसा का सहारा नहीं देना चाहिए था। मुस्लिम समाज को चाहिए कि वह राजनीतिक लोगों की दोरंगी चालों में न फंसे। उसे भारत के हिंदू समाज के साथ मिलकर रहना है , इसलिए जिससे भाईचारा वास्तव में बढ़े ,वही काम उसे करना चाहिए। इसी प्रकार हिंदू समाज के लोगों को भी चाहिए कि वह भी अनावश्यक किसी भी प्रकार की उत्तेजना से बचें और देश के भविष्य के निर्माण के दृष्टिगत विवेकपूर्ण निर्णय लेने का काम करें। संवैधानिक उपायों के माध्यम से ही अपने अधिकारों के लिए लड़ा जाना उचित होता है।

– डॉ राकेश कुमार आर्य

( लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है )

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
klasbahis
holiganbet güncel
imajbet güncel
bettilt giriş
bettilt giriş
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
Casinolevant Giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş