धूम्रपान और हमारा स्वास्थ्य

smoking-is-a-health-hazard-blink-imagesसुरेश चंद नागर

हम में से अधिकांश लोग यह जानते हैं कि तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन फिर भी अधिकतर इसके प्रति उदासीन हैं। इसका मुख्य कारण सही जानकारी का अभाव और तंबाकू के दुष्प्रभावों का असर धीरे-धीरे होना है। यदि ये कहा जाए कि तंबाकू एक हल्का जहर है तो कोई अतिश्योक्ति नही। जैसे-जैसे इस विषय पर नये-नये शोध हो रहे हैं, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू में निकोटिन सहित लगभग 400 प्रकार के विषैले रसायन पाए गये हैं जो शरीर के लिए हानिकारक हैं। जबकि अभी एक मुख्य रूप से निकोटीन को ही हानिकारक माना गया था। अत: अब यह निर्विवाद रूप से स्पष्टहो गया है कि तंबाकू का प्रयोग, किसी भी रूप में और कितनी ही थोड़ी मात्रा में स्वास्थ्य के लिए खतरा है।

आम तौर पर हमारे समाज में निचला और मध्यम वर्ग, गांवों में और दूर दराज के इलाकों में अधिकतर व शहरी इलाकों में कम आय वर्ग व मध्यम वर्ग बीड़ी का इस्तेमाल करते हैं। जहां तक खपत की बात है लगभग एक करोड़ से भी ज्यादा मूल्य की बीड़ी पूरे हिंदुस्तान में हर रोज पी जा रही हैं। इसके दुष्प्रभाव से होने वाली बीमारियों पर होने वाला खर्च कई सौ करोड़ सालाना है। लाखों लोग जाने अनजाने, मौत के मुंह में समा रहे हैं। हम सबका कत्र्तव्य है कि इस समस्या पर गंभीरता से विचार करें और निवारण में अपना सहयोग दें।

आम जन जीवन में बीड़ी पीने को बुरा नही मानते बल्कि कहीं कहीं तो इसे स्टेसस सिंबल व मेहमानबाजी की शुरूआत माना जाता है। (हुक्का पीना भी इसी श्रेणी में आता है) उनका कहना है  गरीब आदमी के लिए आपस में मिल बैठकर गपशप करना और सुस्ताने का एक साधन है। उनकी बात कुछ हद तक सही हो सकती है लेकिन किस कीमत पर? खुद की बरबादी और परिवार बदहाली पर। उनका तर्क यह भी है कि हमने तो किसी को बीड़ी पीने से मरते नही देखा। हमारे बाप दादें और पुरखे हमेशा से बीड़ी पीते आये हैं। यह अलग है कि भले ही उनमें से कईयों ने खांसते खांसते चारपाई पर दम तोड़ दिया हो। वे लोग शायद इस बात से अनजान हैं कि पहले विज्ञान ने उतनी प्रगति नही की थी, जितनी आज हो गयी है। तब हम कई रहस्यों को नही जानते थे। आज वैज्ञानिक प्रगति ने ज्ञान, विज्ञान के कई नये द्वार खोल दिये हैं। अब हमारा कत्र्तव्य है कि समाज में फेेली भ्रांतियों और अंधविश्वासों को दूर करने में सहयोग करें और जन साधारण में जागरूकता फेेलाएं।

यह ठीक है कि बीड़ी में कम मात्रा में तंबाकू का प्रयोग होता है लेकिन तंबाकू कम मात्रा में भी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, और फिर बीड़ी में तो फिल्टर भी नही होता जो सिगरेट में आंशिक मददगार है। तंबाकू का धुंआ सबसे अधिक हमारे शरीर में फेफड़े में नुकसान पहुंचाता है। यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम कर देता है जो कई अन्य जटिलतायें पैदा करती हैं। कभी कभी कैंसर, टीबी या अल्सर इसी प्रक्रिया के घातक परिणाम हैं। क्योंकि तंबाकू धीरे धीरे असर करन्ता है इसलिए इंसान को पता ही नही चलता कि कब वह मौत के मुंह के समीप आ गया तब तक काफी देर हो चुकी होती हन्ै। तब यह कहता है यह सब तो मेरे भाग्य में लिखा था। सब भगवान की माया है। अपने बुरे कर्मों का भगवान के ऊपर दोषारोपण कितना आसान है। है ना।

मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी अंधविश्वास या भ्रांतियों में न पडक़र अपने ऊपर विश्वास करें। अपना अच्छा, बुरन, आपके अपने हाथ में है। आप चाहें तो आज ही बल्कि इसी क्षण तंबाकू का सेवन छोड़ सकते हैं। बस दृढ़ इच्छा शक्ति चाहिए। मैं एक ऐसे सज्जन को जनता हूं जो अनपढ़ होते हुए भी धर्म परायण थे। गांव में रहकर खेती करते थे। लगभग 40 की उम्र में एक दिन किसी साधू महात्मा के कहने पर हुक्का, बीडऩ्ी पीना छोड़ दिया। उसके बाद साधू को दिया वचन जीवन भर निभाया। लगभग 70-75 की आयु के बाद उनकी प्राकृतिक मौत हुई। मेरे लिखने का तात्पर्य सिर्फ इतना है यदि इच्छा शक्ति प्रबल हो तो कोई भी ऐसा कर सकता है।

केन्द्र सरकार ने भी उचित कदम उठाते हुए, 2 अक्टूबर 2008 से सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने पर रोक लगा दी है। दोषी पाये जाने पर जुर्माने, सजा का भी प्रावधान है। लेकिन इस कानून का भी कई जगह दुरूपयोग हो रहा है। सिर्फ कानून से कुछ नही होगा हमें आगे बढक़र जिम्मेदारी दिखानी होगी अभी तक आम आदमी इस बारे में लापरवाह है। तंबाकू से स्वास्थ्य के ऊपर होने वाले कुल नुकसान में 70 प्रतिशत तंबाकू का है। इस उदासीनता का मुख्य कारण जागरूकता का अभाव है। हमें कनाडा जैसे देशों से सबक लेना चाहिए जहां बीड़ी बंडल कागज के साठ प्रतिशत हिस्से पर चेतावनी व चित्र छपना अनिवार्य है। अब समय आ गया है कि सरकार आम जनता के हित में अपनी सोच बदले। राजस्व से होने वाली आय के मुकाबले बीड़ी द्वारा स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए बीड़ी बंडल के ऊपर भी प्रभावी चेतावनी, चित्र छापे जाने पर विचार करे। मीडिया, टेलीविजन, रेडियो भी निष्पक्ष रूप से बीड़ी से होने वाले नुकसान को प्रचारित, प्रसारित करें ताकि हम आने वाली पीढ़ी और विशेष रूप से अनपढ़ आदिवासी समुदाय को इस महामारी से बचा सकें।

Comment:

Latest Posts

kolaybet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vdcasino
betgaranti
betpark giriş
betpark güncel giriş
vdcasino
vdcasino
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
jojobet
jojobet
favorisen giriş
hitbet giriş
betpas giriş
restbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş