तेजाब हमले में एक साल के अंदर फांसी

phanshi1979-80 में भगलपुर जेल में कैदियों की आंख में तेजाब डाल कर अंधा करने का आंखफोड़वा प्रकरण हुआ। जेल की चाहरदिवारी की यह कू्रर घटना मीडिया माध्यम से समाज तक पहुंची। देश में किसी महिला पर तेजाब फेंकने का पहला मामला 1982 में आया। तकनीक के युग में मीडिया मजबूत हुआ तो दूर दराज की तेजाब हमले की घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। खबरों से अपराधी अपराध के तरीके जानने लगे हैं। बदायूं कांड़ के बाद कई महिलाओं के शव हत्या के बाद पेड़ से लटकाएं गये। शायद अपराधियों में सजा के खौफ का सामाजिक संक्रमण की किसी पर तेजाब फेंकने के कू्रर कर्म से रोक सकें।

बीते 25 जुलाई को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की अंबाह तहसील की एक अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया। एक साल पहले तेजाब डालकर अपनी शादीशुदा कथित प्रेमिका की हत्या करने के मामले में एक युवक को फांसी की सजा सुनाई। फांसी की सजा देते वक्त कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि इस अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा पर्याप्त नहीं है, इसलिए मृत्युदंड दिया जाता है। इससे मृतक के परिजनों के साथ-साथ समाज की आत्मा भी आहत हुई है। देश में संभवत: यह पहला मामला है, जब किसी व्यक्ति पर तेजाब फेंकने वाले अपराधी को फांसी की सजा कोर्ट ने सुनाई है। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब के हमलों, विशेषकर ठुकराये हुये प्रेमियों द्वारा किये जा रहे ऐसे हमले की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि स्थिति दयनीय है। सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या से निबटने के प्रति केंद्र सरकार की सुस्ती पर सवाल उठाया। यह पहला ऐसा मामला नहीं है, जिसमें कोर्ट ने सरकार की उदासीनता पर निशाना साधते हुए उसे कटघरें में खड़ा किया हो। चाहे फटकार जितनी भी पड़े, सरकार की सुस्ती उसी बेरहमी से बनी रही है, जिस बेरहमी कोई अपराधी किसी मासूम के चेहरे पर तेजाब फेंक का उसकी जिदंगी नरक बना देता है। कोर्ट ने इसी दिन तेजाब हमलों की पीड़ितों के पुनर्वास की नीति तैयार करने का भी निर्देश दिया। यह भी कोई पहला निर्देश नहीं है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 31 मार्च तक तेजाब की खरीद-बिक्री और दूसरे विषाक्त पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए राज्य सरकारों को नियम बनाने का निर्देश दिया था। अक्सर कोर्ट के ऐसे आदेश-निर्देश और टिका-टिप्पणी संबंधित प्रकरणों के तारीख वाले दिन के अगले दिन अखबारों में होते हैं। फिर न इस पर कोई चर्चा करता है और न ही कोई पीड़िता की सुध लेता है। पीड़िता की हर दिन की जिंदगी असमान्य अवस्था में कटती है। जो निराश हो चुकी हैं, वे मौत का इंतजार कर रही हैं। जिन्हें अपराधियों को सजा दिलाने का हौसला है, वे आत्मविश्वास से लवरेज होकर बेरहम समाज में अपनी लड़ाई लड़ रही है। ऐसी पीड़िताओं में लक्ष्मी मिशाल है। उसे हर संवेदनशील सैल्यूट करता है।

देश के हर राज्य में तेजाबी हमले कई दर्दनाक कहानियों के उदाहरण हैं। विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि हर साल देश में करीब एक हजार मासूम तेजाब हमले की शिकार हो रही हैं। लेकिन सरकारी आंकड़ों में यह महज सौ, सवा सौ की होता है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो से ऐसे मामलों का स्पष्ट आंकड़ा नहीं मिल पाता क्योंकि तेजाब हमले का अधिकतर मामला आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 320 (गम्भीर चोट पहुंचाना) और धारा 326 (घातक हथियारों से जान-बूझकर प्रहार करके चोट पहुंचाने) के तहत दर्ज किए जाते हैं। लिहाजा, तेजाब हमले के सही आंकड़ें सामने नहीं आ पाते हैं। इसे घटनाओं के खिलाफ लड़ने वाले विभिन्न स्वयंसेवी संगठन उन्हीं घटनाओं का ब्यौरा जुटा पाते हैं, जो किसी तरह मीडिया में आ जाए। देश के दूर दराज में होने वाली ऐसी घटनाएं वहीं तक रह जाती है। हालांकि आजकल मीडिया की सक्रियता के चलते ऐसे मामले राष्टÑीय स्तर की मीडियों की सुर्खियों में आने लगे हैं। लेकिन इस कू्ररता को अंजाम देने वाले अपराधियों के दिन में खौफ नहीं बैठ पा रहा है।
आजाद भारत की आजादी का वर्षगांठ की 66वीं सालगिरह सामने हैं। गैर कीजिए, गुलाम भारत और आजादी भारत के अगले तीन दशक में तेजाब फेंकने की बेरहम प्रकरण सामने आने का उल्लेख नहीं मिलता है। गूगल में एशिड फैक्ट्री खोजो तो हिंदी फिल्म की कहानी मिलती है। बताया जाता है कि भारत में किसी महिला पर 1982 में भारत में तेजाब हमले का पहला मामला प्रकाश में आया था। 1979-80 में भगलपुर जेल में कैदियों की आंख में तेजाब डाल कर अंधा करने का आंखफोड़वा प्रकरण हुआ। जेल की चाहरदिवारी की यह कू्रर घटना मीडिया माध्यम से समाज तक पहुंची। संभवत समाज के कुठितज मन वाले अपराधियों ने जान लिया कि बदला लेने का यह भी एक तरीका हो सकता है। अस्सी के दशक देश का वह दौर था जब एक एक नया भारत करवट ले रहा था, धीरे-धीरे विकास की ओर अग्रसर, देश-दुनिया से कदमताल करने की बेताबी के साथ। तब स्वर्णकार तेजाब का उपयोग करते थे। मतलब तेजाब के उपभोक्ताओं का वर्ग एक ही था। धीरे-धीरे देश में वाहन चले। उसमें लगने वाली बैट्री के लिए तेजाब की खपत बढ़ी। उत्पादन भी बढ़ा। लिहाजा, विकास की गति के साथ-साथ जैसे-जैसे तेजाब सर्व सुलभ होते गया, समाज में क्रूरतम सोच रखने वाले इसे अपना हथियार बनाना शुरू किया। यह भी गौर की बात है कि जैसे-जैसे देश ने विकास किया, देश में तेजाब हमले की घटनाएं बढ़ी। तकनीक के युग में मीडिया मजबूत हुआ तो दूर दराज की तेजाब हमले की घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। समाज का संवेदनशील तबका इन खबरों से चिंता जताने लगा है।

इसके अपराधियों को कठोर सजा के लिए एकजुट स्वर भी उठने लगे हैं। लेकिन कुंठित और कू्रर मानसिकता वाला मन कहां बदल रहा है? वे खबरों से ऐसे अपराध के तरीके जानने लगे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बदायूं कांड को देंखे। दुष्कर्म के बाद हत्या कर शव को पेड़ पर लटकाने की घटना जैसे सुर्खियों में आर्इं, देश के दूसरे हिस्सों में एक के बाद इसी तरह की कई घटनाएं हुर्इं, जिसमें हत्या के बाद शव को पेड़ से लटका दिया गया। एक स्थान के अपराधी के अपराध के तरीके पढ़ कर दूसरे क्षेत्र के अपराधी उससे पे्ररित हो रहे हैं। मतलब यह बीमारी और कू्रर मानसिक का समाजिक सक्रमण है। अपराधियों में कानून की लंबी प्रक्रिया और बच कर निकलने की पूरी संभावना के कारण सजा का खौफ नहीं पल रहा है। मुरैना जिले की अंबाह तहसील कोर्ट ने घटना के एक साल के अंदर फैसला सुना कर भले ही सराहनीय कार्य किया हो, लेकिन दूसरे की जिंदगी नरक बना कर अपनी जिंदगी बचाने के लिए ये अपराधी शीर्ष कोर्ट तक न जाने कितने साल खुली हवा में मौज की सांस लेते रहेंगे और पीड़िता हर दिन नरक भोगती रहेगी। मध्यप्रदेश में 25 जुलाई को निचली अदालत ने तेजाब हमले के दोषी को फांसी की सजा सुनाई और इसके चौथे दिन 28 जुलाई को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के आरामबाग इलाके में चार लोगों ने एक कॉलेज छात्रा के उपर तेजाब का हमला कर भाग गए। शायद अपराधियों में सजा के खौफ का सामाजिक संक्रमण की किसी पर तेजाब फेंकने के कूृ्रर कर्म से रोक सकें।

संजय स्‍वदेश

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betnano
Hititbet Giriş
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
betnano
betorder giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
hititbet
hititbet
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
meritbet
bets10
meritbet
bets10
betnano
bets10
bets10
betnano
betnano
atlasbet
atlasbet
betnano
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
hititbet giriş
vdcasino
vdcasino
xslot giriş
xslot giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betkom giriş
betkom giriş