वर्तमान रूस-यूक्रेन संकट में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कुशल रणनीति

images (21)

मृत्युंजय दीक्षित

आज हर जगह केवल रूस -यूक्रेन संकट की चर्चा है और साथ ही पूरी दुनिया की निगाहें इस संकट पर भारत की भूमिका पर हैं । भारत सरकार ने अभी तक इस प्रकरण पर बहुत ही संतुलित व तटस्थ भूमिका का निर्वाहन किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा सहित जिन मंचों पर रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव या अन्य जितने भी प्रस्ताव पास हुए हैं उन सभी में मतदान के दौरान भारत अनुपस्थित ही रहा है। यह पंक्तियाँ लिखे जाने तक भारत के रूख से रूस और अमेरिका सहित विश्व के सभी देश खुश हैं ।
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और विदेश के बड़े नेताओं के साथ उनकही मैत्री का ही परिणाम है कि जंग के खतरनाक दौर में भी रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन जहां उनसे फोन पर बात कर रहे हैं और भरतीय छात्रों की सकुशल वापसी के लिए सुरक्षित मार्ग दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर यूक्रेन भी भारत की ओर देख रहा है और नरेंद्र मोदी से मदद की अपील कर रहा है ताकि युद्ध को रोका जा सके, यूक्रेन के पड़ोसी देश भारतीय छात्रों की वापसी में सहयोग कर रहे हैं।
आज भारत ने जो तटस्थ नीति अपनायी है जहां उसकी जहाँ पूरे विश्व में प्रशंसा हो रही है वहीं मोदी विरोधी मीडिया इस बात पर भी अपना नकारात्मक प्रवचन चला रहा हैं। पष्चिमी जगत के मीडिया की नकल करने वाला मीडिया का एक वर्ग यह भी कह रहा है कि भारत को इस युद्ध में रूस के निंदा प्रस्ताव में रूसी कार्यवाही के विरोध में अपना मत देना चाहिए था , आखिर क्यों ? भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी जो भूमिका निभायी है उसके कारण भारत के दो धुर विरोधी चीन और पाकिस्तान भी हैरान हो रहे हैं तथा वहां के टीवी चैनलों पर बड़ी बहसें हो रही हैं कि आखिर मोदी जी के दिमाग में चल क्या रहा है।
भारत की वर्तमान रणनीति की पृष्ठभूमि पर हम सभी को नजर डालनी होगी और अपना विस्मृत ज्ञान का भंडार फिर से ताजा करना होगा क्योंकि यूक्रेन एक ऐसा देश रहा है जिसने कभी भी किसी भी संकट में भारत का साथ नहीं दिया है और वह सदा ही भारत विरोध का रवैया अपानाता रहा है।। यूक्रेन की सरकार ने न तो पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी सरकार के कार्यकाल में परमाणु परीक्षण के मुददे पर भारत का साथ दिया और नहीं आतंकवाद के मुददे पर। यूक्रेन सदा पाकिस्तान व चीन के साथ खड़ा रहा है।
अमेरिका व अन्य पश्चिमी देश भारत पर इस बात का दबाव बना रहे हैं कि वह रूस के खिलाफ मतदान करे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन देशों ने आज तक आतंकवाद के मुददे पर भारत को कोई सहयोग कभी नहीं दिया। इतिहास गवाह है कि अमेरिका व ब्रिटेन जैसे देश पाकिस्तान के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर व पाक अधिकत कश्मीर को मिलाकर एक स्वतंत्र देश बनाने का सपना देख रहे हैं और कई बार उनकी यह साजिशें उन देशों के नेताओं की जुबान पर आ भी जाती हैं। जब गलवान में चीन ने सोची समझी साजिश के तहत हमला किया तब भी ये देश भारत के पक्ष में नहीं बोले तो आज भारत इन देशों का साथ क्यों दे ?
भारत में बैठे पश्चिमी मीडिया के पिछलग्गू बुद्धिजीवि सरकार से यह आशा कर रहे है कि वह यूक्रेन का साथ दे तो उनकी बुद्धि पर तरस ही आता है । वर्ष 1998 में जब भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था उस समय संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए एक प्रस्ताव आया था इस प्रस्ताव को दुनिया के जिन 25 देशों ने प्रस्तुत किया था उसमें यूक्रेन प्रमुख था। भारत के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिये यूक्रेन ने पाकिस्तान का साथ दिया था सबसे खतरनाक पहलू यह है कि पिछले तीन दशकों से पाकिस्तान को हथियार बेचने वाला सबसे बड़ा देश यूक्रेन बना हुआ है। पाकिस्तान को हथियारों की जरूरत यूक्रेन ही पूरा करता है और वह अब तक पाकिस्तान को 12 हजार करोड़ रूपये के हथियार बेच चुका है आज पाकिस्तान के पास जो 400 टैंक हैं वो यूक्रेन के द्वारा ही बेचे गये हैं। यूक्रेन पाकिस्तान की सेना को मजबूत करने में लगातार सहयोग कर रहा था और वह भारत के लिये बहुत बड़ा खतरा बन चुका था। यूक्रेन पाकिस्तान को चोरी छिपे परमाणु हथियारो की सप्लाई भी कर रहा था।
रूस -यूक्रेन संकट पर यूक्रेन के प्रति सहानुभूति दिखा रहे लोगों को यह याद रखना चाहिए कि यूक्रेन का रवैया हमेशा भारत का विरोध ही रहा है और वह कभी नहीं सुधरेगा। आज जब आपरेशन गंगा को सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है तब उस समय भी यूक्रेन की ओर से ही बाधा खड़ी की जा रही है।
अब अमेरिका की पृष्ठभूमि पर भी नजर डालते हैं। इतिहास गवाह है कि अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी जगत कभी नहीं चाहता कि भारत एक शक्तिशाली और आत्मनिर्भर देश बन जाये । यह सभी देश भारत को एक बाजार के नजरिये से ही देखते हैं और यही कारण है कि वह समय -समय पर भारत को धमकियां देते रहे हैं और भारत के आंतरिक मामलों में भी हस्तक्षेप करने का प्रयास करते रहते हैं। भारत के खिलाफ विषवमन करते रहते हैं। अमेरिका और ब्रिटेन के अखबारों में भारत विरोधी लेख लिखे जाते हैं उन्हीं के आधार पर भारत के विरोधी दल सरकार के खिलाफ एक माहौल बनाने का प्रयास करते रहते हैं।
जरा याद करें जब 1971 के युद्ध में अमेरिका ने भारत को युद्ध रोकने की धमकी दी थी और तब पाकिस्तान की हार आसान लग रही थी उस समय किसिंजर ने पूर्व राष्ट्रपति निक्सन को बंगाल की खाड़ी में परमाणु संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस इंटरप्राइज के नेतृत्व में यूएस 7वी फ्लीट भेजने के लिए प्रेरित किया था। उस समय यह दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत समुद्र की सतह पर चलता फिरता एक राक्षस था जबकि भारतीय नौसेना के बेड़े का नेतृत्व 20,000 टन के विमानवाहक पोत विक्रांत जिसके पास 20 हल्के लड़ाकू विमान थे ने किया था और उस समय रूस की पनडुब्बियों ने ही 1971 की जंग में अमेरिका के विरूद्ध ढाल बनकर भारतीय नौसेना की रक्षा की थी।
रूस ने हर कदम -कदम पर भारत का भरपूर सहयोग किया है जब पूर्व सोवियत संघ था तब भी और आज के समय में जब पूर्व सोवियत संघ खंड- खंड हो चुका है उस समय भी रूस भारत के साथ खड़ा दिखाई देता रहा हैं। जम्मू -कश्मीर के मुददे पर तो रूस ने सदा हर मंच पर भारत का ही साथ दिया है और वह कई बार पाकिस्तान को कड़ी फटकार भी लगाता रहा है। पूर्व सोवियत संघ ने भारत के परमाणु परीक्षण के समय भी भारत का खुलकर विरोध नहीं किया था। अफगानिस्तान में भारत की भूमिका पर भी वह भारत के ही साथ रहा है। आज अगर रूस यूक्रेन को कमजोर कर रहा है और उसकी सेना की कमर को ध्वस्त कर रहा है तो फिर परोक्ष रूप से पाकिस्तान की ताकत को भी कमजोर कर रहा है। वैसे भी पाकिस्तान की हालत बहुत दयनीय हो चुकी है और वह बहुत दबाव में है तथा खिसियाहट में वह भी कोई बड़ी गलती करने का दुस्साहस कर सकता है ।
उन सभी लोगों को जो लोग आज यह कह रहे हैं कि भारत को यूक्रेन का समर्थन करना चाहिए अगर कल को भारत की ओर से पाकिस्तान की धरती पर चल रहे भारत विरोधी आतंकी ठिकानों पर कार्यवाही करनी पड़ जाये तब यह सभी देश क्या करेंगे? अभी भारत को पाक अधिकृत कश्मीर भी आजाद कराना है जबकि पाकिस्तान कश्मीर का राग अलाप रहा है और चीन की नजर अरूणांचल व लददाख में लगी हुयी है तथा वह कई बार सीमा का उल्लघन भी कर चुका है यह तो बहुत अच्छा है कि इस समय एक देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक मजबूत सरकार चल रही है और देशहित में बड़े फैसले कर रही है।
रूस- यूक्रेन विवाद के बीच एक बड़ी खबर यह भी आ गयी कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने रूस की निंदा वाले प्रस्ताव से एक बार फिर दूरी बनाकर सभी को चौका दिया है । यह प्रस्ताव रूस की सैन्य कार्रवाइयों में मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में लाया गया था। यहां पर 32 सदस्यों ने रूस के निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया और भारत सहित 13 देशों ने हिस्सा नहीं लिया। वहीं दो देषों ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। इसी के साथ मानवाधिकार उल्लंघन की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच आयोग के गठन पर मुहर लग गयी। यूक्रेन पर हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र के अलग अलग निकाय रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला चुके हैं।
जबकि वास्तविकता यह है कि मानवाधिकार परिषद कई मामलों में चुप्पी साध जाती है। यह वही मानवाधिकर परिषद है जिसमें आज तक कश्मीर में आतंकवाद पर चर्चा नहीं की गयी और नहीं कश्मीर पंडितो पर हुए अत्याचारों की जांच के लिए कभी कोई किसी प्रकार की पहल की गयी। हां, अगर भारत में किसी अल्पसंख्यक पर कोई आंच आती है तो यह सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। मानवाधिकार परिषद ने आज तक पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में वहां की सेना जो अत्याचार कर रही है और पाकिस्तान व बांग्लादेश में जिस प्रकार से अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं तथा उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है उस पर यह सभी संस्थायें मौन हो जाती हैं।
यही कारण है कि आज भारत रूस- यूक्रेन संकट पर तटस्थ रणनीति अपना रहा है और यह अब तक कि सबसे सफल रणनीति मानी जायेगी वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहुत मजबूत स्थिति में खड़ा है जबकि चीन और पाकिस्तान सहित भारत विरोधी एजेंडा चलाने वाले लोग हैरान और परेशान है। यही कारण है कि आज भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
holiganbet
sahabet
bets10
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
grandpashabet giriş
bettilt giriş
jojobet giriş
bettilt giriş
onwin
onwin
onwin
sahabet
onwin
sahabet
bettilt giriş