सितारे-हिन्द की हिन्दी भाग-2

Hindi starडा0 इन्द्रा देवी
हिन्दूओं में सन् 1823 ई0 में जन्मे राजा शिवप्रसाद सितारे हिन्द अंग्रेजों के उसी तरह कृपा पात्र थे। जैसे कि सर सैयद अहमद हिन्दी की रक्षा के लिए उन्हें खड़ा होना पडा। वह पहले हिन्दी संरक्षक थे। जो शिक्षा विभाग में इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुए। उस समय दूसरे विभागों की भांति शिक्षा विभाग में भी मुसलमानों का दब-दबा था। उन्हें भाषापन का डर बराबर सताता रहता था। वे इस बात से डरते थे कि कही नौकरी के लिए संस्कृत से लगाव रखने वाली हिन्दी न सीखनी पडे उन्होंने पहले तो उर्दू के अतिरिक्त हिन्दी की पढ़ाई व्यवस्था का प्रबल विरोध किया उनका कहना था कि जब प्रशासन और अदालतीय कार्यो में उर्दू ही काम में लाई जाती है। तब एक और जबान का बोझ डालने से क्या लाभ? हिन्दूओं की कथावार्ता आदि करते कहते सुन वह हिन्दी को गवॉरी बोली कहकर चिडा़ते थे। इन परिस्थितियों मे शिवप्रसाद को हिन्दी की रक्षा के लिए उसे शिक्षा का माध्यम बनाने के लिए बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जब भी वह हिन्दी पर बल देते थे तभी मुसलमान उसे मुश्किल जबान कहकर विरोध करते थे।
राजा सहाब को उस समय यह उचित लगा कि जहां तक हो सके सरल ठेठ हिन्दी का आसरा लिया जाये। जिसमे कुछ अरबी फ ारसी के चलते शब्द भी रखे जाये। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में सरकारी अधिकारी होते हुए भी प्रशासन और अदालतों पर कब्जा बैठाई उर्दू के स्थान पर उन्होने हिन्दी को प्रतिष्ठित किया और राजा सहाब ने उर्दू मिश्रित (यानी फ ारसी के तत्सम शब्दों से युक्त) हिन्दी की भाषा की वकालत  तो बहुत किन्तु अपनी गद्य रचनाओं में परिमार्जित और जन-चेतना से युक्त भाषा का प्रयोग किया राजा भोज का सपना इसका प्रमाण है। राजा साहब भी शंकराचार्य की तरह द्वैत से पीडि़त थे। शंकराचार्य अपनी दार्शनिक विचार धारा के लिए यदि अद्वैत और निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल देते है। वही अपने निजी जीवन में वे देवी के भक्त थे। उसी भॅति राजा शिव प्रसाद ने जहॉ प्रशासनिक स्तर पर फ ारसी मिश्रित गद्य भाषा की वकालत की वही साहित्यिक स्तर पर सरल बोल-चाल की भाषा का प्रयोग किया। उनकी आरम्भिक पुस्तकों में वह उर्दू पन नही भरा था। जो उनकी पिछली किताबों इतिहासतिमिरनाशक आदि में दिखाई देता है।
उस समय हिन्दी पाठ्यक्रम एवं हिन्दी साहित्य के कोर्स के लिए पुस्तके नही थी। राजा शिवप्रसाद स्वयं तो पुस्तकें तैयार करने में लग ही गए। पंडित श्री लाल और पंडित वंशीधर आदि अपने कई मित्रों को भी उन्होंने हिन्दी पाठ्य पुस्तकें लिखने के लिए प्रेरित किया। उनकी पाठ्यक्रम उपयोगी कई कहानियॉ राजा भोज का सपना, वीर सिंह का वृतांत, आलसियों को कोड़ा इत्यादि इसका प्रमाण है। यद्यपि उन्होने मानव धर्म सार नामक अपनी रचना में अधिक संस्कृत गर्भित भाषा रखी है फि र भी नि:सकोच कहा जा सकता है। कि प्रारम्भ से ही वे ऐसी ठेठ हिन्दी के पक्षपाती थे। जिसमे जनसाधारण के बीच प्रचलित अरबी फ ारसी शब्दों का स्वंतत्र प्रयोग हो। उनका उर्दू की ओर झुकाव लगातार बढता रहा। इसके दो प्रबल कारण दिखाई देते है। एक अधिकांश: उर्दू शिक्षित लोगों की प्रवृति देखकर दूसरा अंग्रेज अधिकारियों का रूख देखकर। आज का तर्कशील मनुष्य दूसरे कारण को मजबूत मानता है।
यद्यपि द्वैत का जिक्र पहले किया जा चुका है। फिर भी राजा शिव प्रसाद ने उर्दू की ओर झुकाव हो जाने पर भी हिन्दी साहित्य की प्रथम पाठ्य पुस्तक गुटका में भाषा का आदर्श हिन्दी रखा। उक्त गुटका में उन्होंने राजा भोज का सपना रानी केतकी की कहानी के साथ अपने प्रबल विरोधी राजा लक्ष्मण सिंह शकुंतला नाटक का भी बहुत सा अंश रखा। हिन्दी पाठ्य पुस्तक के रूप में प्रथम गुटका सं0 1924 में प्रकाशित हुआ। साहित्य के अतिरिक्त राजा सहाब ने इतिहास और भूगोल की पुस्तकें उर्दू मिश्रित हिन्दी में लिखने का कार्य किया।   संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) में राजा शिव प्रसाद शिक्षा विभाग में रहकर हिन्दी की किसी न किसी रूप में रक्षा करते रहें। हिन्दी बहस को निरन्तर बल देते है। इस बहस ने हिन्दी को अनायास ही एक दूसरे ढंग से लाभ पहुंचाया। हिन्दी पढ़े लिखे लोग प्रशासन से उपेक्षित थे और संदेह की दृष्टि से देखे जाते थे। हिन्दी प्रशासन के विरूद्ध पक्ष या विपक्ष से सम्बद्ध हो गयी। हिन्दी जागृत जन की सवेदनाओं से जुड़ गयी। यही कारण था कि हिन्दी स्वतन्त्रता आन्दोलन की प्रमुख भाषा बन गयी। देश के प्रत्येक कोने से हिन्दी पुकारने लगी-तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूॅगा, साइमन कमीशन वापिस जाओ, भारत छोड़ो, करो या मरो, मेरा रंग दे बसन्ती चोला, हिन्दी है हम वतन है हिन्दोस्तॉ हमारा आदि। राजा शिव प्रसाद सितारे हिन्द के भाषा द्वैत को हिन्दी का दर्पण।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
casinolevant giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
holiganbet giriş