डॉक्टर अंबेडकर ने भी बताया था गांधी हत्या को देश के लिए ‘अच्छा’

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महात्मा गाँधी पर अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद महाराज कालीचरण को आज (दिसंबर 30, 2021) खजुराहो से मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस को सूचित किये बिना गिरफ्तार कर लिया गया है। जो बहुत ही निंदनीय और आपत्तिजनक है। अगर गाँधी भक्तो को महाराज कालीचरण द्वारा गाँधी के विरुद्ध कहे शब्दों से इतना ऐतराज है, फिर क्यों नहीं नाथूराम गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयानों को सार्वजनिक किया जाता, ताकि जनता को मालूम हो कि गोडसे सही था या गाँधी। आखिर कब तक महात्मा गाँधी की हिन्दू विरोधी नीतियों को छुपाया जाता रहेगा? जनता को भी पक्ष एवं विपक्ष नेताओं से पूछना चाहिए कि “गोडसे के बयानों को अपने घोषणा पत्र के साथ घर-घर वितरित किये जाते? पब्लिक अड्रेस सिस्टम से सुनाये गोडसे के बयानों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रतिबंधित किया था, जिसे गोडसे के भ्राता विजय गोडसे ने अपनी आजीवन सजा पूरी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से उस प्रतिबन्ध हटवाया था।” 

डॉ आनंद रंगनाथन ने इस गिरफ्तारी पर अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देकर डॉ अंबेडकर के विचार पेश किए हैं जहाँ डॉ अंबेडकर गाँधी के व्यवहार में ‘चालाकी’ की बात करते हैं। साथ ही ‘बगल में छूरी मुँह में राम’ वाली कहावत का उदाहरण देकर गाँधी को महात्मा मानने से इनकार कर कहते हैं कि उनके लिए गाँधी सिर्फ मोहन दास करमचंद गाँधी हैं। वह गाँधी की राजनीति को भारतीय इतिहास की राजनीति की सबसे बेईमान राजनीति बताते हैं और राजनीति में से नैतिकता खत्म करवाने का जिम्मेदार भी गाँधी को बताते हैं।

उक्त बातें डॉ अंबेडकर ने गाँधी को ‘महात्मा’ बुलाए जाने के संबंध में कही थीं। इसके अलावा उन्होंने 8 फरवरी 1948 को अंबेडकर ने अपनी पत्नी सविता अंबेडकर को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में वो अपनी पत्नी सविता को समझा रहे थे कि वो उनसे सहमत हैं कि गाँधी की मौत इस तरह नहीं होनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने अपने इस पत्र में ये भी साफ कहा था कि उनका अस्तित्व गौतम बुद्ध के अलावा किसी से प्रेरित नहीं है।

इस पत्र में उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि महापुरुष अपने देश की महान सेवा करते हैं। लेकिन एक समय आता है जब वे अपने देश की प्रगति में एक बाधा भी बन जाते हैं।” इस पत्र में उन्होंने लिखा था कि गाँधी इस देश के लिए एक पॉजिटिव खतरा थे। उन्होंने सभी स्वतंत्र विचारों का गला घोंट दिया। वह कांग्रेस को साथ पकड़े हुए थे, जो समाज में सभी बुरे और स्वार्थी तत्वों का मिश्रण है और जो किसी सामाजिक और नैतिक सिद्धांत को लेकर सहमति नहीं देते केवल गाँधी की चापलूसी के अलावा। ये निकाय देश को चलाने में बिलकुल सही नहीं है।

इसी पत्र के अंत में डॉ अंबेडकर ने कहा, “जैसा कि बाइबल में लिखा है कि कई बार कुछ अच्छी चीज किसी बुरी चीज से ही बाहर आती हैं। मुझे लगता है कि गाँधी की मौत से भी कुछ अच्छा ही होगा। ये लोगों को महान व्यक्ति के बंधन से मुक्त करेगा। यह उन्हें अपने लिए सोचने पर मजबूर करेगा कि उनके फायदे में क्या है।
उल्लेखनीय है कि कालीचरण महाराज पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित ‘धर्म संसद’ में महात्मा गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। इसको लेकर उन पर रायपुर और महाराष्ट्र के पुणे में मामला दर्ज किया गया था। अपने खिलाफ केस दर्ज होने के बाद कालीचरण महाराज ने YouTube चैनल के जरिए स्पष्टीकरण दिया था। इसमें कहा था कि उन्हें महात्मा गाँधी के लिए कहे गए अपशब्दों का कोई पश्चाताप नहीं है। उन्होंने पूछा था कि महात्मा गाँधी ने हिन्दुओं के लिए किया ही क्या है? उन्होंने बताया कि किस तरह 14 वोट प्रधानमंत्री पद के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल को मिले, लेकिन शून्य वोट वाले जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बना कर उन्होंने वंशवाद फैलाया।

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