Categories
इतिहास के पन्नों से

मदर टेरेसा (भाग 1)

भारत में गरीबों और बीमारों की सेवा के नाम पर धर्मांतरण कराने वाली ईसाई एजेंट एग्नेस गोंक्सा बोयाजियू उर्फ मदर टेरेसा के नाम के आगे ‘संत’ जोड़ा जा रहा है। पिछले आधी से ज्यादा सदी से भारत और दुनिया भर में मदर टेरेसा का महिमामंडन होता रहा है। जबकि यह बात लगातार सामने आती रही है कि मदर टेरेसा सेवा जरूर करती थीं, लेकिन इसके बदले में वो गरीबों को बहला-फुसलाकर उनको ईसाई बनाया करती थीं। यही वजह थी कि मशहूर लेखक क्रिस्टोफर हिचेंस ने 2003 में ही मदर टेरेसा को ‘फ्रॉड’ की उपाधि दे दी थी। हम आपको 3 लेखों में वे 10 बातें बताते हैं जिन्हें जानकर आपको मदर टेरेसा से नफरत हो जाएगी। पहले 3 कारण क्रमशः है –

  1. नॉर्थ-ईस्ट की ‘आजादी’ चाहती थीं टेरेसा
    नॉर्थ-ईस्ट में अलगाववादी आंदोलनों में मदर टेरेसा की संस्था का बड़ा हाथ माना जाता है। इस इलाके में बरसों से सक्रिय ईसाई संगठनों ने स्थानीय आदिवासियों का धर्म परिवर्तन करवाया। जिसके कारण यहां बसे तमाम समुदायों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई। आरोप तो यहां तक लगते हैं मदर टेरेसा ने यहां के लोगों में यह भावना भरी कि भारतीय सरकार उन पर अत्याचार कर रही है। आदिवासी के तौर पर इन लोगों को आरक्षण मिला करता था, लेकिन ईसाई बनने के बाद आरक्षण बंद हो गया। मदर टेरेसा ने लोगों को बताया कि जीसस के करीब जाने के कारण भारतीय सरकार उनकी दुश्मन बन गई है।
  2. जादू-टोने से गरीबों का इलाज करती थीं
    मदर टेरेसा कहा करती थीं कि पीड़ा आपको जीसस के करीब लाती है। वो गरीब-बीमार लोगों के इलाज के लिए चमत्कार और दुआओं का सहारा लिया करती थीं। लेकिन जब खुद बीमार होती थीं तो दुनिया के सबसे महंगे अस्पतालों में इलाज कराने चली जाती थीं। 1991 में बीमार पड़ने पर वो अमेरिका के कैलीफोर्निया में इलाज कराने चली गई थीं, जबकि भारत में भी अच्छी मेडिकल सर्विस उपलब्ध थी। मदर टेरेसा के पास दुनिया भर से करोड़ों रुपये का फंड आता था, लेकिन उन्होंने कोलकाता में कभी एक ढंग का अस्पताल तक नहीं बनवाया। जबकि इतने पैसे में कई अस्पताल बनवाए जा सकते थे।

  3. बीमारों की सेवा कम, प्रोपोगेंडा ज्यादा
    मदर टेरेसा कहा करती थीं कि वो कलकत्ता की सड़कों और गलियों से बीमार पड़े लोगों को उठाकर अपने सेंटर में लाती हैं। जबकि यह बात पूरी तरह झूठ पाई गई थी। मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी में काम कर चुके डॉक्टर अरूप चटर्जी ने अपनी किताब ‘मदर टेरेसा: द फाइनल वरडिक्ट’ में बताया है कि यह दावा गलत था। जब कोई फोन करके बताता था कि फलां जगह कोई बीमार पड़ा है तो ऑफिस से जवाब दिया जाता था कि 102 नंबर पर फोन कर लो।

चटर्जी के मुताबिक संस्था के पास कई एंबुलेंस थीं, लेकिन इनमें ननों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता था। मदर टेरेसा हमेशा दावा करती रहीं कि उनकी संस्था कलकत्ता में रोज हजारों गरीबों को खाना खिलाती है। लेकिन यह बात भी समय के साथ फर्जी साबित हो गई थी। दरअसल संस्था के किचन में एक दिन में सिर्फ 300 लोगों का ही खाना बनता था। इतने के लिए ही राशन भी मंगाया जाता था। यह खाना सिर्फ उन लोगों को मिलता था जिन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया हो।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betebet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pusulabet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betnano giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betparibu giriş
betlike giriş
parmabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
parmabet giriş
betlike giriş
vaycasino giriş
betparibu giriş
klasbahis giriş