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विश्व का सबसे बेहतरीन और अनोखा संगठन है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

ललित गर्ग

सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस 5 दिसंबर को प्रतिवर्ष दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। यह दिवस सभी व्यक्तिगत स्वयंसेवकों और स्वयंसेवकों के संगठनों को अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तरों पर उनके योगदान को दिखाने का एक बड़ा अवसर प्रदान करता है। यह दिन हर साल हजारों स्वयंसेवकों को जुटाने के साथ, विकास कार्यक्रम का समर्थन करके शांति और विकास को भी बढ़ावा देता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 17 दिसंबर, 1985 को हर वर्ष 5 दिसंबर को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। तब से, अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस संयुक्त राष्ट्र प्रणाली, सरकारों, नागरिक समाज संगठनों आदि द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाने लगा।
आज देश एवं दुनिया के विभिन्न विश्वविद्यालयों में जिस स्वयंसेवक संगठन की विलक्षणताओं एवं विशेषताओं पर शोध हो रहा है, वह है भारत का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जो दुनिया सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। इसकी स्थापना सन् 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन मोहिते के बाड़े नामक स्थान पर डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ के 5 स्वयंसेवकों के साथ शुरू हुई विश्व की पहली शाखा आज 50 हजार से अधिक शाखाओ में बदल गई और ये 5 स्वयंसेवक आज करोड़ों स्वयंसेवकों के रूप में हमारे समाने हैं, जो स्वयं में एक विलक्षण एवं अद्भूत उदाहरण है। संघ की विचारधारा में राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, हिंदू राष्ट्र, राम जन्मभूमि, अखंड भारत, समान नागरिक संहिता जैसे विषय हैं, जो देशवासियोें को देश की समरसता की ओर ले जाते हैं। 1975 के बाद से धीरे-धीरे इस संगठन का न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक महत्व बढ़ता गया और इसकी परिणति भाजपा जैसे राजनीतिक दल के रूप में हुई जिसे आमतौर पर संघ की राजनीतिक शाखा के रूप में देखा जाता है। संघ की स्थापना के 75 वर्ष बाद सन् 2000 में प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन की सरकार भारत की केन्द्रीय सत्ता पर आसीन हुई। इसके पश्चात 2014 एवं 2019 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री नेतृत्व इसकी सरकार बनी हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संघ या आरएसएस के नाम से अधिक लोकप्रिय है। इसका मुख्यालय महाराष्ट्र के नागपुर में है। संघ के छोटे बड़े लगभग 55 स्वस्थ समाज निर्माण में जुटे संगठन एवं गतिविधियां हैं जो संसारभर में फैले हैं। जिनमें सेवा भारती, विद्या भारती, संस्कार भारती, मजदूर संघ, बजरंग दल, राष्ट्र सेविका समिति, अखिल भारतीय शिक्षण मंडल, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, संस्कृत भारती, भारत विकास परिषद, दीनदयाल शोध संस्थान, विश्व हिन्दू परिषद, वनवासी कल्याण परिषद, विज्ञान भारती, पूर्व सैनिक सेवा परिषद, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद, अखिल भारतीय सहकार समिति, प्रज्ञा प्रवाह, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ, लघु उद्योग भारती, भारतीय इतिहास संकलन योजना, हिन्दू जागरण मंच, आरोग्य भारती, राष्ट्रीय सिख संगत, विवेकानन्द केन्द्र, हिन्दुस्तान समाचार, गोसेवा एवं संवर्धन, परिवार प्रबोधन और भारतीय कुष्ठ निवारक संघ जैसे बड़े संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ही घटक हैं। महात्मा गाँधी ने 1934 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिविर की यात्रा के दौरान वहाँ पूर्ण अनुशासन, समर्पण देखा और छुआछूत की अनुपस्थिति पायी। इससे प्रभावित होकर उन्होंने संघ की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संसार का अकेला ऐसा संगठन है जिसमें आज तक भ्रष्टाचार, पदलिप्सा या अनैतिकता की स्थिति नहीं आई। इस समय संघ द्वारा करीब 25,028 सेवा-प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। ये प्रकल्प देश के 30 प्रांतों में 11,498 स्थानों पर चल रहे हैं। ये सेवा कार्य भिन्न-भिन्न क्षेत्रों पर केन्द्रित हैं, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक विकास, कौशल विकास, गोसेवा आदि। भौगोलिक दृष्टि से 16,101 सेवा कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में, 4,266 वनवासी क्षेत्रों में, 3,412 सेवा बस्तियों में और शेष स्थानों पर 1,249 सेवा कार्य चल रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस मनाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थितियों का आकलन इस दिवस की सार्थकता को व्यक्त करता है। आरएसएस में स्वयंसेवक इस शब्द का अर्थ होता है- स्वेच्छा से काम करने वाला। संघ के विचारों को मानने वाले और नियमित तौर पर शाखा में जाने वाले लोगों को संघ का स्वयंसेवक कहा जाता है। प्रचारक-ये संघ के लिए पूर्णकालिक तौर पर काम करते हैं। संघ के लिए काम करने के दौरान इन्हें अविवाहित रहना होता है। ये किसी भी पारिवारिक जिम्मेदारी से दूर रहते हैं। विस्तारक-ये ऐसे स्वयंसेवक होते हैं जो गृहस्थ जीवन में रहकर ही संगठन के विस्तार की दिशा में काम करते हैं। इनका काम किशोरों को संघ के साथ जोड़ने का होता है। सरसंघचालक-संघ का सबसे बड़ा पदाधिकारी सरसंघचालक कहलाता है। वर्तमान में मोहन भागवत आरएसएस के सरसंघचालक हैं। सरसंघचालक की नियुक्ति मनोनयन द्वारा होती है। प्रत्येक सरसंघचालक अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रमुख शैक्षणिक प्रवृत्ति एवं संगठनात्मक उपक्रम है विद्या भारती। जो आज 20 हजार से ज्यादा स्कूल चलाता है, लगभग दो दर्जन शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज, डेढ़ दर्जन कॉलेज, 10 से ज्यादा रोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थाएं चलाता है। शिक्षा के साथ संस्कार देने के लिए विद्या भारती संचालित “सरस्वती शिशु मंदिर” की आधारशिला गोरखपुर में पांच रुपये मासिक किराये के भवन में रखी गयी थी। शिशु मंदिर प्रणाली से सम्पूर्ण भारत में 86 प्रांतीय एवं क्षेत्रीय समितियाँ विद्या भारती से संलग्न हैं। केन्द्र और राज्य सरकारों से मान्यता प्राप्त इन सरस्वती शिशु मंदिरों में लगभग 30 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और 1 लाख से अधिक शिक्षक पढ़ाते हैं। इसी भांति सेवा का विशेष आयाम है सेवा भारती। सेवा भारती देश भर के दूरदराज़ के और दुर्गम इलाक़ों में सेवा के एक लाख से ज़्यादा काम कर रहा है। लगभग 35 हज़ार एकल विद्यालयों में 10 लाख से ज़्यादा छात्र अपना जीवन संवार रहे हैं। सेवा भारती ने जम्मू कश्मीर से आतंकवाद से अनाथ हुए 57 बच्चों को गोद लिया है जिनमें 38 मुस्लिम और 19 हिंदू बच्चे हैं। दिल्ली में सेवा भारती 250 बालवाड़ियों का संचालन करती है, जिनमें 7 वर्ष तक की आयु के 10 हजार बच्चे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को विश्व के सबसे बड़ा छात्र संगठन के रूप में भी जाना जाता है। विद्यार्थी परिषद का नारा है- ज्ञान, शील और एकता। संघ द्वारा देश में सात रक्त संग्रह केन्द्र चलाए जा रहे हैं, जिनमें से एक बंगलौर में है और छह महाराष्ट्र में। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुल प्रकल्पों की संख्या 3,112 है। भारतीय किसान संघ की स्थापना 4 मार्च 1979 को राजस्थान के कोटा शहर में महान भारतीय तत्त्वचिंतक, आंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मजदूर नेता श्री दत्तोपंतजी ठेंगडी ने भारतीय किसानों के उत्थान हेतु की। स्वयंसेवा की अवधारणा से जुड़े हुए शब्द स्वयंसेवक एवं स्वयंसेवी संगठन वक्त के साथ-साथ आरएसएस में विकसित हुए हैं। इस सम्पूर्ण संगठन के पीछे की मूल भावना यह है कि निहित स्वार्थों की जगह सामूहिक हित, राष्ट्रीयता की भावना, स्व-संस्कृति एवं स्व-पहचान को प्राथमिकता देना है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो व्यक्ति जिस तरह के कौशल में निपुण होता है वह बिना किसी अपेक्षा के अपने कौशल एवं क्षमतानुसार सेवा प्रदान करता है। सूरज की एक किरण को देखकर सूरज बनने का सपना संजोने वाला संगठन महान होता है। वह और अधिक महान होता है, जो सूरज बनने का सपना देखकर परिपूर्ण सूरज बन जाता है। शताब्दियों के बाद कोई-कोई संगठन ऐसा होता है। वह अपनी रोशनी से एक समूची परंपरा एवं संस्कृति को उद्भासित कर देता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसा ही अनूठा स्वयंसेवी संगठन है। संघ का काम व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र निर्माण का है। व्यक्ति से समाज एवं समाज से राष्ट्र निर्मित होता हैं। प्रत्येक संघी यानी स्वयंसेवक समाज में आचरण में परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। यह स्वावलंबी पद्धति से, सामूहिकता से चलने वाला काम है। आइए संघ के हाथों स्वयंसेवक परम्परा को इतना मजबूत और विश्वसनीय बनायें कि निर्माण का हर क्षण इतिहास बने। नये एवं सशक्त भारत का निर्माण हो, जिसका हर रास्ता मुकाम तक ले जाये। सबकी सबके प्रति मंगलभावनाएं मन में बनी रहे। आज देश ने राष्ट्रीयता के ईमान को, कर्त्तव्य की ऊंचाई को, संकल्प की दृढ़ता को और मानवीय मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिये ‘यशस्वी भारत’ के रूप में स्वयंसेवक की इस परम्परा ने फिर आह्वान किया है। आओ, फिर एक बार जागें, संकीर्णता एवं स्वार्थ की दीवारों को ध्वस्त करें।

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