दिनांक 4 दिसंबर 2021 को कटक स्थित नेवी म्यूजियम को देखने का अवसर मिला

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यहां पर मुझे जिस चीज ने अधिक प्रभावित किया वह थी कि यहां पर इंडोनेशिया से संबंधित ऐसी कई चीजों को सुरक्षित रखा गया है जिनसे भारत और इंडोनेशिया की संस्कृति की साम्यता परिलक्षित होती है। जैसे चित्र में आप देख रहे हैं कि वहां का महात्मा बुध और हमारे यहां के महात्मा बुद्ध की मूर्ति में बहुत साम्यता है। विशेष रूप से यह उड़िया शैली में बनाए जाने वाला महात्मा बुद्ध का चित्र है। जिसे लगभग इसी शैली में इंडोनेशिया में भी बनाया गया है । इसके अतिरिक्त उड़ीसा की रामायण में जिस प्रकार रावण या अन्य पात्रों का भेष बनाया जाता है लगभग वैसा ही इंडोनेशिया की रामायण में भी बनाया जाता है।
  इस म्यूजियम में नावों के बनाने का सजीव चित्रण किया गया है । नाव के लिए बनाने के लिए कहां से कैसे लकड़ी लाई जाती थी ? उसका सजीव चित्रण करते हुए नाव को पहली अवस्था से अंतिम अवस्था तक कैसे ले जाया जाता था अर्थात बनाया जाता था, इस बात का पूरा चित्रण किया गया है। भारत के और विश्व के सिक्कों में भी समानता प्रदर्शित करने की गैलरी यहां पर है।
यहां पर बरगद का एक पेड़ है जो बहुत विशालकाय है और जिसकी आयु लगभग डेढ़ सौ वर्ष बताई गई। कई अच्छी ड्रिल मशीनों को यहां पर रखा गया है, जो बीते दिनों की अपनी इतिहास यात्रा को बता रही हैं। महानदी से एक नहर बनाकर इस म्यूजियम से जोड़ी गई है। इस नहर के माध्यम से ऐसी नावों को यहां तक पहुंचाया जाता था जो किसी कारण से खराब हो गई होती थीं। उनकी मरम्मत करके फिर यहां से उन्हें पानी में भेज दिया जाता था।
  यहां पर पाम के पौधे के तने को काटकर उसे भी नाव के रूप में प्रयोग करने का अद्भुत दृश्य भी हमने देखा। उसे नाव के रूप में ही यहां पर सहेज कर रखा गया है । नावों के कई रूप अर्थात पहली पीढ़ी की नाव कैसी थी और उसके पश्चात उसमें कैसे-कैसे सुधार होते चले गए ? यह भी यहां पर बताया गया है।
उड़ीसा के लोग जब नई नाव बनाते थे तो उस समय वह धार्मिक पूजा पाठ करते थे। उसके बाद जब उनके द्वारा बनाई गई नाव पहली बार यात्रा पर जाती थी तो उस समय भी वह उसके लिए विशेष पूजा पाठ करते थे । इन सबका भी सजीव चित्रण यहां पर किया गया है। कार्तिक पूर्णिमा सहित कई अन्य त्यौहारों को उड़ीसा के लोग किस प्रकार अपनी परंपरागत शैली में मनाते रहे हैं ? उसको भी चित्रों के माध्यम से यहां बताया गया है।
मैंने यहां की अतिथि पुस्तिका पर समाचार पत्र के संपादक के रूप में हस्ताक्षर कर अपनी टिप्पणी लिखी।
यहां पर सरकारी कर्मचारी के रूप में तैनात जगन्नाथ पाणिग्रही ने बहुत ही आत्मीय भाव से हमारा मार्गदर्शन किया और एक एक चीज को बड़ी बारीकी से बताया व समझाया । उनका मोबाइल नंबर 80 18 68 3160 है। अतिथि पुस्तिका पर हस्ताक्षर करने के पश्चात 2:30 बजे हमने वहां से अपने गंतव्य स्थल होटल ‘मुंबई इन’ के लिए प्रस्थान किया। जिसके कक्ष संख्या 205 में हम प्रवास पर हैं।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक उगता भारत
व श्रीनिवास आर्य सह संपादक

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