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राजनीति

नरेन्द्र मोदी सरकार और डिजिटल भारत की राह

narendra modiसंजय गुप्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संपूर्ण भारत को डिजिटल तकनीक से लैस करने की शुरुआत अपने चिरपरिचित अंदाज में की। भव्य समारोह और बड़ी घोषणाओं के साथ ‘डिजिटल इंडिया सप्ताह का आगाज हुआ है। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने निवेश के भारी-भरकम इरादों का एलान किया। मुकेश अंबानी, साइरस मिस्त्री, कुमारमंगलम बिड़ला, अनिल अंबानी, अजीम प्रेमजी, सुनील भारती मित्तल जैसे बड़े नामों ने न सिर्फ अपने उद्योग घरानों को इस महत्वाकांक्षी योजना से संबद्ध करने की घोषणा की, बल्कि लगे हाथ हजारों करोड़ रुपए के निवेश तथा सूचना तकनीक में कुशल हजारों कर्मियों को रोजगार देने की अपनी योजनाओं का खुलासा भी किया। कहा जा सकता है कि एनडीए सरकार के एक बड़े मिशन की अति प्रभावशाली एवं शानदार शुरुआत हुई है। आगाज के मुताबिक ही बात आगे बढ़ी तो अगले पांच से दस वर्षों में आधुनिक एवं विकसित देश बनने की दिशा में भारत अहम मुकाम तय कर लेगा। डिजिटल इंडिया बनाने का लक्ष्य अपने आप में महत्वाकांक्षी है। मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया के बहुचर्चित उद्देश्यों के साथ जोडक़र देखें तो इसका फलक और भी बड़ा हो जाता है।

अगले एक सप्ताह में सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में इस योजना के अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश होगी। वहां आकर्षक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कोशिश जमीनी स्तर तक पहुंचने की है। मंशा सभी पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोडऩे की है। स्कूल-कॉलेजों को वाई-फाई सेवा से संपन्न् बनाया जाएगा। सभी नागरिकों को डिजिटल सेवाएं मिलें, वे इनका उपयोग करने में सक्षम हों और ई-गवर्नेंस हकीकत बने, इसके लिए सरकार ने बेशक एक प्रशंसनीय पहल की है। लेकिन इस सिलसिले में कुछ ठोस हकीकतों से नजरें मिलाने की जरूरत भी है।

दो लाख गांवों में ब्रॉडबैंड पहुंचाने के लिए पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने भी एक शुरुआत की थी। 2006 में नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना शुरू की गई।

मगर इसमें अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। 2013 के आकलन के मुताबिक तब लक्ष्य पांच साल पिछड़ा हुआ था। फिर भारत में इंटरनेट की पैठ आज भी सीमित है। लगभग 20 प्रतिशत आबादी तक ही इंटरनेट की वास्तविक पहुंच है। सक्रिय यूजर तो और भी कम हैं। महज 9 प्रतिशत ग्रामीण आबादी इंटरनेट का उपयोग करती है।

इस सीमित इस्तेमाल की कई वजहें हैं। कंप्यूटर और स्मार्टफोन आज भी आम भारतीय के बजट से बाहर की वस्तुएं हैं। फिर इंटरनेट के उपयोग का संबंध शिक्षा के स्तर, तकनीकी कौशल, भाषा ज्ञान आदि से भी है। ये सब बुनियादी बातें हैं। मगर इन्हें नजरअंदाज कर डिजिटल इंडिया का निर्माण नहीं हो सकता। इस सपने को पूरा करना है, तो डेटा सुरक्षा या गोपनीयता जैसे मुद्दों का उचित समाधान भी पेश करना होगा। वरना, यह पूरा प्रयोजन निवेशकों और समाज के चंद तबकों के लिए ही लाभकारी हो पाएगा। इसलिए अपेक्षा रहेगी कि प्रधानमंत्री और एनडीए सरकार शानदार उद्घाटन के बाद की चुनौतियों को लेकर भी आगाह रहें।

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