Categories
महत्वपूर्ण लेख

लंबित न्याय के अनुत्तरित प्रश्न

ANDHA KANUNअनूप भटनागर

याकूब मेमन की फांसी पर सुनवाई के लिये उच्चतम न्यायालय भले ही देर रात तक बैठ गया हो, देश के बाकी फरियादियों को शायद ही ऐसी त्वरित सुनवाई का अवसर मिलता हो।

वजह क्या है? पिछले ही सप्ताह संसद में कानून मंत्री डी वी सदानंद गौडा ने बताया था कि 2014 में देश की अदालतों ने दो करोड़ से अधिक मुकदमों का निपटारा किया, लेकिन इसके बावजूद अदालतों में तीन करोड़ से ज्यादा मामले अभी भी लंबित हैं। कानून मंत्री के अनुसार 2014 में उच्चतम न्यायालय ने 92722 और देश के 24 उच्च न्यायालयों ने 17,34,542 तथा अधीनस्थ अदालतों ने 1,90,19,658 मुकदमों का निपटारा किया। दिलचस्प तथ्य यह है कि करीब दो करोड़ से अधिक मुकदमों का निपटारा करने के बावजूद 2014 में अदालतों में 3,0705153 मुकदमे लंबित थे। इनमें से उच्चतम न्यायालय में 62,791, उच्च न्यायालयों में 41,53,957 तथा अधीनस्थ अदालतों में 2,64,88,405 मुकदमे 2014 में लंबित थे।

कानून मंत्री अदालतों में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित होने की वजह बड़ी संख्या में न्यायपालिका मे रिक्तियां बताते हैं। देश के 24 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 984 स्वीकृत पद हैं और सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल 31 जुलाई की स्थिति के अनुसार उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 382 पद रिक्त हैं। इनमें न्यायाधीशों के सबसे अधिक 83 पद इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिक्त हैं। इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय दूसरे स्थान पर है जहां न्यायाधीशों के 31 पद रिक्त हैं। मगर कानून मंत्री ने अधीनस्थ न्यायपालिका में रिक्त स्थानों का कोई जिक्र नहीं किया।

उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालयों में न्यायाधीशों के पद रिक्त होने की वजह न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून की वैधानिकता का मसला देश की शीर्ष अदालत की संविधान पीठ के समक्ष लंबित होना बताकर बचा जा सकता है। इसके विपरीत, देश की अधीनस्थ अदालतों में न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के रिक्त स्थान कहीं अधिक हैं। अधीनस्थ अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या भी उच्चतम न्यायपालिका से कई गुणा अधिक है।

देश की अधीनस्थ न्यायपालिका में न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के 19756 स्वीकृत पद हैं लेकिन यहां भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। अधीनस्थ अदालतों में करीब 15400 न्यायाधीश और न्यायिक अधिकारी पदस्थ हैं जबकि चार हजार से अधिक पद रिक्त हैं। लंबित मुकदमों की समस्या से निपटने के लिये लोक अदालतें भी आयोजित की जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद न्यायपालिका को मुकदमों की संख्या घटाने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है।

इस स्थिति से निपटने के लिये सबसे अधिक जरूरी है कि केन्द्र और राज्य सरकारें राजनीतिक इच्छा शक्ति का परिचय देते हुए न्यायपालिका के प्रयासों से सहयोग करें और देश में अधीनस्थ अदालतों की संख्या बढ़ाने की ओर गंभीरता से ध्यान दें।

वैसे तो लंबे समय से यह सुझाव दिया जा रहा है कि न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने से छह महीने पहले ही इन रिक्तियों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। लेकिन देखा यह जा रहा है कि न्यायपालिका में रिक्त स्थानों पर भर्ती की प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं है। अधीनस्थ अदालतों की संख्या बढऩे का देश को दोहरा लाभ मिलेगा। पहला तो यह होगा कि आम जनता को अधिक सुगमता और सहजता से शीघ्र न्याय मिल सकेगा और दूसरा यह होगा कि निचली अदालतों और न्यायाधीशों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि होने की स्थिति में राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले आपराधिक तत्वों के मुकदमों का भी तेजी से निपटारा संभव हो सकेगा ।

अधीनस्थ अदालतों और न्यायिक अधिकारियों की संख्या में आनुपातिक रूप में वृद्धि करने के प्रति राज्य सरकारों की उदासीनता की एक वजह उच्चतम न्यायालय की वह व्यवस्था भी हो सकती है, जिसमें कहा गया है कि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को दो साल से अधिक की सजा होने की स्थिति में उसकी सदस्यता खत्म हो जायेगी और ऐसी स्थिति में उच्चतर न्यायपालिका से बरी होने की अवधि तक तो वह किसी भी चुनाव में हिस्सा लेने के अयोग्य रहेगा। चूंकि आज की स्थिति में देश की संसद और राज्यों के विधानमंडलों में बहुत बड़ी संख्या में ऐसे निर्वाचित प्रतिनिधि मौजूद हैं, जिनके खिलाफ अदालतों में कई सालों से आपराधिक मामले लंबित हैं लेकिन अपरिहार्य कारणों से उनका फैसला नहीं हो पा रहा है।

अधीनस्थ अदालतों और न्यायाधीशों तथा न्यायिक अधिकारियां की संख्या बढऩे से जहां एक ओर न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को गति मिलेगी वहीं आपराधिक छवि वाले तत्वों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर करने में भी मदद मिलेगी। इस तरह का कोई भी प्रयास देश और जनता की दिशा में सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
alobet
vegabet giriş
vegabet giriş
restbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
roketbet giriş
imajbet giriş
ikimisli giriş
roketbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
begaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
roketbet giriş
vegabet giriş
vegabet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
Betkolik giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
Safirbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
norabahis giriş
roketbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
İmajbet güncel
Safirbet resmi adres
Safirbet giriş