पेट की गैस कहीं बड़ी समस्या में न बदल जाए

आजकल पेट में गैस बनना एक साधारण बात हो गई है। पाचन तंत्र में विकार उत्पन्न होने की वजह से उदर और आंतों में गैस की समस्या उत्पन्न हो जाती है है। गैस बनना किसी रोग का लक्षण भी हो सकता है। अधेड़ उम्र के लोग इससे अधिक पीडि़त रहते हैं। क्योंकि इस उम्र में पाचन क्रिया कमजोर होने लगती है। लोग अक्सर इसे आम समस्या समझकर नजर अंदाज कर दिया करते हैं।

गैस उदर या आंतों में बनती है। उदर व आंत शरीर के वे भाग हैं जिसमें आहार का पाचन होता है। पाचन के लिए आमाशयिक रस की जरूरत होती है। अमाशयिक रस में एंजाइम, पेप्सिन, लाइपेज और रेनिन होते हैं। पेप्सिन, हाइड्रो क्लोरिक अम्ल के साथ मिलकर प्रोटीन को पेप्टीन में बदलता है। रेनिन, दूध के केसीनोजन को गाढ़ा करता है और लाइपेज वसा का पाचन कराता है। अमाशयिक रस द्वारा ही कुछ विषैले पदार्थ जैसे विष, धातु, अल्केलोइड्स आदि निकलते हैं। अनावश्यक जीवाणुओं व कीटाणुओं का नाश भी अमाशयिक रस के द्वारा ही होता है। खाने की चीजों के पाचन के लिए अमाशयिक प्रक्रिया के दौरान पोषक तत्व सोख लिए जाते हैं, और अनचाहे अवशेष मलमूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकल जाते हैं। पाचन क्रिया के तहत रासायनिक प्रक्रिया होती है और गैस बन जाती है। गैस का अधिक या कम बनना पाचन शक्ति, व्यक्ति की आयु, शारीरिक और मानसिक रोग और खाने की चीजों के मिश्रण आदि पर निर्भर होता है।

पेट की गैस दो प्रकार की होती है। एक तो वह जो भोजन करते समय हमारे पेट में पहुंच जाती है। जैसे- नाइट्रोजन, ऑक्सीजन। दूसरी कार्बन डाइआक्साइड, हाइड्रोजन और मीथेन है जो पाचन प्रक्रिया के दौरान आंतों में बनती है। एक स्वस्थ व्यक्ति में ये गैसें कम मात्रा में होती हैं जो कि मलद्वार या डकार से आसानी से बाहर निकल जाती हैं। परन्तु अधिक मात्रा में गैस बनने और पाचन क्रिया के दौरान इसके भोजन में मिलने के कारण इससे कष्ट देने वाले लक्षण पैदा होने लगते हैं। इन लक्षणों में मुख्य है- खाना खाने के एक या दो घंटे पश्चात पेट में भारीपन महसूस होता है और सांस लेने में भी तकलीफ होती है तथा मलद्वार से अधिक गैस निकलने के कारण आंतों में अनपचे कार्बोहाइड्रेट का बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंटेशन होता है। ये गैसें अधिकतर हाइड्रोजन कार्बन डाईआक्साइड और मीथेन होती हैं। सामान्यत: इनमें कोई गंध नहीं होती। पेट के दर्द की वजह गैस नहीं है। दर्द आंतों की गतिशीलता में कमी की वजह से होता है। ज्यादा गैस बनना किसी गंभीर रोग से संबंधित हो सकता है। खट्टी डकारें आना, पेट का फूलना और मलद्वार से दुर्गंधमय गैस निकलने को नजरअदांज नहीं किया जाना चाहिए। इन का पूरा इलाज होना जरूरी है। उदर के रोग जैसे गैस्ट्राइटिस, पेट में अल्सर या पेप्टिक कैंसर, आंतों के रोग एंट्राइटिस, अल्सर, एमीबाइसिस तथा जिआर्डिएसिस आदि से भी गैस की समस्या हो सकती है।

इसके अलावा हवाई यात्रा में भी गैस विकार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हवाई यात्रा के दौरान इस रोग से ग्रस्त लोगों को अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है क्योंकि हवाई जहाज में वायुमण्डल का दबाव कम होने के कारण उदर की गैस आयतन में तीस प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है और कष्टदायक लक्षण सामने आने लगते हैं। मुंह और सांस लेने के अंगों में विकारों की वजह से भी गैस की समस्या हो सकती है। नाक, सांस में बाधा, टौंसिल और एडिनाइड का इलाज आसानी से संभव हो सकता है और अगर गैस की समस्या इनके कारण से हो तो उसे दूर किया जा सकता है।

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