पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा कई संभावनाओं की तलाश, ताकि सुरक्षित रहें भारतीय हित

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विवेक ओझा

“व्यापार निवेश की नई संभावनाओं की तलाश और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका वैश्विक सामरिक साझेदारी को मजबूती देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा कई संभावनाओं की तलाश में सक्रिय है ताकि भारतीय हितों की सुरक्षा की जा सके।”
मोदी की वर्तमान यात्रा के दौरान भारत अमेरिका व्यापक वैश्विक सामरिक साङोदारी की समीक्षा करने की बात की गई है।

 वर्तमान में विश्व राजनीति और क्षेत्रीय राजनीति अभूतपूर्व बदलावों के दौर से गुजर रही है। खाद्य प्रणाली हो या फिर ऊर्जा प्रणाली, ग्लोबल वार्मिंग के दौर में कई स्तरों पर हमें ‘ग्लोबल वार्मिंग’ मिलनी शुरू हो गई है। ऐसे में कोविड महामारी के दौर में भारतीय हितों की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोविड, क्लाइमेट और क्वाड जैसे मुद्दों को केंद्रीय वार्ता का विषय बनाने की बात भारतीय प्रधानमंत्री ने की है।
इसका मतलब साफ है कि भारत इस यात्र के दौरान सबसे अधिक जोर अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ स्वास्थ्य साझेदारी और सतत विकास के लिए हरित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, वैश्विक पर्यावरण को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचाने और उसके लिए स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ ही वैश्विक क्षेत्रीय स्थिरता व सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्वाड समूह को मजबूती देते हुए सदस्य राष्ट्रों को प्रतिरक्षा के मुद्दे पर और नजदीक लाने पर दे रहा है। क्वाड देशों की सैन्य, अंतरिक्ष और उच्च प्रौद्योगिकी क्षमता व उनकी अर्थव्यवस्थाओं के बड़े आकार और उनके महत्व से भारत परिचित है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पता है कि क्वाड सदस्य देशों के सहयोग से भारत को ‘ब्लू वाटर नेवी’ बनाने और हिंद प्रशांत क्षेत्र में ‘मेरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ को बढ़ाने में सहयोग मिल सकता है। अभी कुछ दिनों पूर्व ही आस्ट्रेलिया ने भारत को गगनयान मिशन के लिए एक बड़े अंतरिक्ष सहयोग की बात की है। आस्ट्रेलिया ने कहा है कि उसके कोकोस कीलिंग द्वीप पर इसरो का एक ग्राउंड स्टेशन स्थापित कर भारत को उसके गगनयान मिशन के लिए वह सहायता करेगा। इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रमुख के सिवन ने भी इस बात की पुष्टि की है।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दिलचस्पी इस समय जापान के साथ सामरिक साङोदारी और वैश्विक गठजोड़ को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की है। भारत और जापान के बीच सैन्य सूचना विनिमय और लाजिस्टिक के पारस्परिक आदान प्रदान को लेकर एक समझौता ‘एक्विजिशन एंड क्रास सìवग एग्रीमेंट’ को मूर्त रूप दिया जाना अभी बाकी है। वर्ष 2018 में दोनों देशों ने इस पर समझौता किया था। अब समय आ गया है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए इसे अंतिम रूप से कार्यशील बनाया जाए।

निश्चित रूप से भारतीय प्रधानमंत्री की जापानी प्रधानमंत्री से जो वार्ता हिंद प्रशांत क्षेत्र पर अभी हुई है, उसमें इस आयाम पर भी बात हुई होगी, क्योंकि दोनों देश इस समझौते को महासागरीय सुरक्षा के लिए आवश्यक मानते हैं। जापान के साथ भारत के आर्थिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा समझौता व्यापक आर्थिक साङोदारी समझौता (सेपा) वर्ष 2011 में हुआ था, जिसमें यह कहा गया था कि अगले 10 वर्षो में यानी 2021 तक दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार में 94 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर प्रशुल्क खत्म कर दिया जाएगा। लिहाजा अब उसकी समीक्षा का भी समय आ गया है।
क्वाड समूह के सदस्यों से मुलाकात : भारत को यह भी देखना है कि जापान के साथ लगभग 16 अरब डालर के द्विपक्षीय व्यापार में व्यापारिक घाटे का जो सामना खुद ही करना पड़ता है, वह उसे भरने के लिए जापान के साथ क्या रणनीति अपनाता है। नरेन्द्र मोदी जिस क्वाड समूह के सदस्य देशों से पृथक पृथक व्यक्तिगत स्तर पर मुलाकात करने गए हैं, वह क्वाड स्वयं को एक सैन्य गुट से एक व्यापारिक गुट के रूप में परिवतित करने में भी लगा है। ऐसे में इन सभी देशों के साथ भारत के व्यापारिक आíथक हितों को सुरक्षित करने की व्यावहारिक रणनीति बनानी होगी।
मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने की कवायद : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल को आगे बढ़ाने के लिए कारोबारियों, उद्यमियों और निवेशकों से मुलाकात की। इस कड़ी में आइटी क्षेत्र से लेकर वित्त, रक्षा और नवीनीकरण ऊर्जा के क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच शीर्ष अमेरिकी सीईओ के साथ अलग-अलग बैठकें संपन्न की गई हैं। एडोब, जनरल एटामिक्स, क्वालकाम, फस्र्ट सोलर और ब्लैकस्टोन जैसी कंपनियों के सीईओ के साथ प्रधानमंत्री की बैठक इस बात का संकेत है कि व्यापार, वाणिज्य और निवेश को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए भारत सरकार प्रतिबद्ध है।
वर्तमान में भारत और अमेरिका के मध्य वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय वार्षकि व्यापार 149 अरब डालर के रिकार्ड स्तर तक पहुंच चुका है जिसे निकट भविष्य में 500 अरब डालर करने के लक्ष्य पर भी दोनों देश सहमत हो चुके हैं। ऐसे में अमेरिकी कंपनियों से व्यापार निवेश के मुद्दों पर चर्चा करना और अधिक जरूरी हो जाता है। अभी भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार में भारत को करीब 30 अरब डालर का फायदा हो रहा है जिसे भारत बेहतर आर्थिक रणनीति के जरिये बढ़ाने में भी सक्षम हो सकता है।
क्वालकाम सेमीकंडक्टर उत्पादन, साफ्टवेयर, वायरलेस टेक्नोलाजी सर्विस के क्षेत्र में प्रमुखता से काम करती है। इससे भारत में 5जी तकनीक का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में मदद मिल सकती है। इसके जरिये भारत में आटोमोटिव, आइओटी यानी इंटरनेट आफ थिंग्स के क्षेत्र में बड़ा निवेश हो सकता है। इसी कड़ी में ब्लैक स्टोन के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के साथ राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन और राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन सहित भारत में चल रही परियोजनाओं में निवेश के अवसरों पर भारतीय प्रधानमंत्री की चर्चा हुई।
वैश्विक आतंकवाद का अर्थव्यवस्था पर असर : ग्लोबल कोविड-19 समिट में सहभागिता करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महामारी के आर्थिक प्रभावों की चर्चा करते हुए कहा कि वैक्सीन सर्टिफिकेट्स को पारस्परिक मान्यता देते हुए राष्ट्रों को वैश्विक यात्रओं को सरल बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। दरअसल प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ वर्षो में वैश्विक तनावों और समस्याओं के आíथक प्रभावों के मुद्दे को उठाकर यह जाहिर कर दिया है कि भारत को केवल अपनी ही अर्थव्यवस्था की चिंता नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की सेहत भी सही बनी रहे, भारत को इसकी भी चिंता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इससे पहले ब्रिक्स के एक समिट में कहा था कि वैश्विक आतंकवाद से हर साल एक खरब डालर का नुकसान होता है। इस लिहाज से वैश्विक आतंकवाद ग्लोबल इकोनामी के लिए भी खतरा पैदा करता रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्तमान यात्रा के दौरान भारत अमेरिका व्यापक वैश्विक सामरिक साङोदारी की समीक्षा करने की बात की गई है। वर्ष 2020 के आरंभ में दोनों देशों ने आपसी संबंधों को कांप्रिहेन्सिव ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया था। इसके तहत वैश्विक आतंकवाद से मिलकर निपटने का फैसला लिया गया था। दोनों देशों के मध्य ड्रग तस्करी, नार्को-आतंकवादऔर संगठित अपराध जैसी गंभीर समस्याओं के बारे में एक नए मेकैनिज्म पर भी सहमति हुई थी। कुछ ही समय पहले दोनों देशों के मध्य स्थापित स्ट्रैटेजिक एनर्जी पार्टनरशिप भी सुदृढ़ होती जा रही है और इस क्षेत्र में आपसी निवेश बढ़ा है। तेल और गैस के लिए अमेरिका भारत का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। अमेरिकी संसद ने कुछ समय पहले भारत को नाटो देशों के समान दर्जा देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके चलते अब रक्षा संबंधों के मामले में अमेरिका भारत के साथ नाटो के अपने सहयोगी देशों, इजरायल और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर ही डील करेगा।

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