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बेहद सादगी और शालीनता की प्रतिमूर्ति हैं विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार

श्रीनिवास आर्य

विश्व हिंदू परिषद एक ऐसा हिंदूवादी वैश्विक संगठन है जो न केवल भारत में बल्कि संपूर्ण विश्व में हिंदुओं के हितों की रक्षा करने के लिए कृत संकल्प है, इस संगठन के वर्तमान अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार हैं । आलोक कुमार  मृदु भाषी व्यक्तित्व के धनी हैं। वह अपनी बातों पर अडिग रहते हैं यद्यपि क्रोध की मुद्रा में आकर आवेशित होकर अपनी बातों को कहने के अभ्यासी नहीं है जिससे उनकी अलग छाप बनी है। उनके नजदीकियों के मुताबिक बेहद गुस्से में भी उनका लहजा संतुलित रहता है।
वीएचपी के नए अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार बीजेपी से लेकर संघ तक में काम कर चुके हैं। वह जिस पद पर भी रहे और जिस जिम्मेदारी को भी उनके कंधों पर डाला गया उसे ही उन्होंने बखूबी निभाने का प्रयास किया।  उनके नजदीकी लोग यह मानते हैं कि वह चुनौतियों का बड़ी सहजता से सामना करते हैं और सफल होकर ही चैन लेते हैं । वर्तमान में वह जब विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए तो उस समय भी कई लोगों ने उनकी योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाया था, परंतु उन्होंने अब तक यह सिद्ध कर दिया है कि वह वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के महत्वपूर्ण दायित्व को भी उतनी ही सहजता से निभाने के लिए कृत संकल्प हैं जितनी सादगी और समझदारी के साथ उन्होंने अब तक मिले अन्य दायित्वों का निर्वाह किया है।

 

आलोक कुमार अपने छात्र जीवन में दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र यूनियन के प्रेसिडेंट रहे हैं। वह संघ की छात्र इकाई एबीवीपी के पंजाब में संगठन मंत्री भी थे। बीजेपी के टिकट से दिल्ली से विधायक भी बने और दिल्ली विधानसभा उपाध्यक्ष भी। बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में उन्होंने लीगल सेल में भी काम किया साथ ही ट्रेनिंग सेल के हेड भी रहे। इन सभी दायित्वों से उन्हें काम करने की समझ को विकसित करने में सहायता मिली। उनके भीतर असीम धैर्य है और धैर्य पूर्वक ही समस्याओं का समाधान खोजने की उनकी प्रवृत्ति है। जिसके चलते वह  अच्छे अच्छे लोगों को अपना बना कर उसे साथ लेकर चलने में सफल हो जाते हैं । हाई प्रोफाइल के रूप में काम करने वाले प्रवीण तोगड़िया को श्री कुमार ने अपनी कार्यशैली से भुलाने में सफलता प्राप्त कर ली है। संगठन के लोग उनके साथ हैं और वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदू समाज की समस्याओं को बड़ी सादगी, समझदारी और सुलझे हुए ढंग से उठाने में सफल होते जा रहे हैं।
जिन बातों को कई लोग  बड़े शोर-शराबे के साथ कहते हैं उसे आलोक कुमार बहुत ही सहज भाव से  कहते हुए देखे गए हैं। जैसे उन्होंने राम मंदिर के बारे में स्वयं से पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि यदि कोर्ट ने यह जमीन हिंदू समाज को नहीं दी तो वह चाहेंगे कि सरकार इसके लिए एक कानून लेकर आए और संसद से पारित कानून के आधार पर राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण कराएं। उन्होंने पड़े संयत शब्दों में सरकार से यह कह दिया कि उन्हें हर हाल में राम मंदिर चाहिए , इसके लिए कोर्ट यदि आदेश करती है तो ठीक है नहीं तो इसके बाद सरकार को  कानून लाना चाहिए। उनके इस प्रकार की संतुलित भाषा के बोलने का एक कारण यह भी है कि वह कानून की भाषा भी जानते हैं और इतिहास की भाषा भी जानते हैं ।उन्होंने इतिहास को समझाहै और इतिहास की गहरी परख रखने के कारण ही उन्होंने यह बात सरकार से कही। इतिहास के तथ्यों को झुठलाया नहीं जा सकता। इसलिए इतिहास को दुरुस्त करने के लिए सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह कानून लाकर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराए।
पिछले दिनों मुरादाबाद में हिंदूवादी नेता दिनेश चंद त्यागी जी की श्रद्धांजलि सभा के अवसर पर श्री कुमार से हुई वार्ता के आधार पर हमने यह बातें यहां पर प्रस्तुत की हैं । – समाचार संपादक

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