Categories
डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

दिनेश चंद्र त्यागी : इतिहास का विद्वान स्वयं बन गया ‘इतिहास’

अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ हिंदूवादी चिंतक ,महान इतिहासकार और भारतीय संस्कृति के उद्भट प्रस्तोता दिनेश चंद्र त्यागी का देहांत सचमुच बौद्धिक जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है। उनका पावन सानिध्य जब भी मिला तभी उन्होंने अपनी विद्वता की अद्भुत छाप मेरे मानस पर छोड़ी।
श्री त्यागी जीवन भर ”राजनीति का हिंदूकरण और हिंदुओं का सैनिकीकरण”- करने के वीर सावरकर के संकल्प को साकार और साक्षात क्रियान्वित करने के लिए सक्रिय रहे । 1984 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था। वह राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता के रूप में भी जाने जाते हैं। जिसके लिए उन्होंने इतिहास के अनेकों तथ्यों को एकत्र कर आंदोलन को गतिशील बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। इसके अतिरिक्त श्री त्यागी आरएसएस के प्रचारक के रूप में भी काम करते रहे थे। हिंदू महासभा के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने चुनाव आयोग से इस संगठन की मान्यता बहाल कराने में सफलता प्राप्त की थी।
उनका चिंतन सावरकर जी के इतिहास चिंतन को स्थापित कर भारत के अतीत के गौरव को अपने देश के युवाओं के हृदय में उकेर देने तक ही सीमित नहीं था बल्कि इससे भी आगे जाकर वह भारत को विश्व गुरु बनाने के प्रति संकल्पित रहे। इसके लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया । जब – जब भी उन्हें किसी भी सभा, सम्मेलन या सेमिनार में अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिला उन्होंने भारतीय इतिहास की बहुत सारी पहेलियों को बड़े विद्वतापूर्ण ढंग से तार्किक आधार पर श्रोताओं के हृदय में उतारने में अद्भुत और अनोखी सफलता प्राप्त की। जब जब भी वह अपने इतिहास ज्ञान को लोगों के समक्ष परोसते तो लोग दांतों तले उंगली दबा लेते थे। उनकी भाषा शैली, उनका ओज और अपनी बात को प्रस्तुत करने का ढंग लोगों को अनायास ही मोह लेता था। जब वह बोलते थे तो सभा में सन्नाटा छा जाता था। क्योंकि उनकी तार्किक शक्ति कमाल की होती थी। वह सभा को अपने साथ बांधना जानते थे।
उन्होंने ‘हिंदू सभा वार्ता पत्रिका’ का सफल संपादन किया और उस पत्रिका के माध्यम से भारतीय इतिहास ,संस्कृति और वैदिक धर्म की अद्भुत सेवा की। इस पत्रिका के माध्यम से श्री त्यागी ने देश में उस विमर्श को उत्पन्न करने में बहुत अधिक योगदान दिया जो आज इतिहास के दोबारा लिखे जाने के रूप में हमारे सामने प्रस्फुटित हो रहा है। बड़े-बड़े विद्वान आज इतिहास के दोबारा लिखे जाने पर बड़े-बड़े गंभीर शोधात्मक लेख प्रस्तुत कर रहे हैं। जिसके लिए उचित माहौल बनाने में श्री त्यागी का अतुलनीय योगदान रहा। ‘हिंदी- हिंदू- हिंदुस्तान’ उनके प्राण तत्व के रूप में काम करता रहा। उसके अतिरिक्त उनका चिंतन कहीं और गया नहीं । उन्होंने बड़ी विद्वता पूर्ण ढंग से बिना किसी विवाद के अपनी बात को कहने की एक अद्भुत कला विकसित की। चाहे मंच हो या फिर लेखन का क्षेत्र हो उन्होंने अपनी बात को बेबाकी से रखा, परंतु प्रमाणिक आधार पर और संतुलित भाषा के द्वारा रखने से उनकी बातों पर कभी विवाद नहीं हुआ।
‘उगता भारत’ समाचार पत्र परिवार से श्री त्यागी गहराई से जुड़े रहे। इसके कार्यकारी संपादक के रूप में भी उन्होंने काम किया। इस पत्र के लिए उन्होंने अनेकों लेख लिखे। जम्मू कश्मीर में धारा 370 पर उन्होंने कई ऐसे लेख लिखे जिनसे उस समय ही यह स्पष्ट हो गया था कि इस विवादित धारा को हटाने के लिए किसी भी प्रकार से राज्य विधानसभाओं के प्रस्ताव या संसद के दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति के द्वारा इसे बड़ी सहजता से हटाया जा सकता है, क्योंकि यह संविधान की अस्थाई धारा है।
‘हिंदू’ शब्द पर उन्होंने न्यायालय के समक्ष बड़े विद्वता पूर्ण रूप से बहस की थी। अपनी उस बहस में उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि ‘हिंदू’ शब्द अपने आप में सांप्रदायिक नहीं है बल्कि ‘मुस्लिम’ शब्द अपने हाथ में सांप्रदायिक है जो कि एक राजनीतिक पार्टी के नाम के पहले लगा होता है। उन्होंने हिंदुत्व को एक जीवन शैली के रूप में लिया और इसे इसी रूप में सदा व्याख्यायित व स्थापित करते रहे।
श्री त्यागी धर्म की संकीर्ण परिभाषा से बाहर जाकर उसके विस्तृत और व्यापक स्वरूप को जानने समझने वाले विद्वान थे । यही कारण था कि वह पौराणिक गप्पों को अधिक प्राथमिकता नहीं देते थे। हां, जहां इतिहास के संदर्भ में किसी पुराण की साक्षी की बात आती थी तब वह उसे स्वीकार करते थे। उन्होंने अनेकों बार अपनी व्यक्तिगत बातचीत में यह कहा था कि आर्य और हिंदू शब्द पर आर्यसमाज और हिंदुओं को परस्पर किसी प्रकार का विवाद नहीं करना चाहिए। क्योंकि आर्य समाज अपने आप में एक एक फैक्ट्री है, जो कच्चे माल को लेकर पक्का माल तैयार करती है। ध्यान रहे कि उसके लिए कच्चा माल हिंदू समाज ही हो सकता है, जो उसकी वैज्ञानिक, तार्किक और बुद्धि संगत वैदिक व्याख्या को सबसे पहले स्वीकार करेगा। इसके लिए कोई मुसलमान या ईसाई उसके पास नहीं आएगा। इसलिए अपने कच्चे माल को आर्य समाज सुरक्षित रखे, इसी में दोनों का भला है।
श्री त्यागी जी से मैं और श्रीनिवास आर्य जी, बाबा नंद किशोर मिश्र जी और अपने अन्य साथियों के साथ जब भी मिला तब तब ही उन्होंने समकालीन राजनीति पर भी बहुत अच्छा ज्ञान हमको दिया। उनका मार्गदर्शन रह-रहकर याद आता है, जो आज के राजनीतिज्ञों में देखने को नहीं मिलता।
हिंदी के प्रति त्यागी जी का समर्पण अपने आप में बहुत ही प्रेरणादायक रहा। मैं एक बार हिंदू महासभा की बैठक की कार्यवाही लिख रहा था। जिसे उन्होंने बाद में पढ़ा। मेरे द्वारा लिखी गई उस कार्यवाही में आए उर्दू के शब्दों को उन्होंने गिन कर अपने स्मृति पटल पर अंकित रखा और जब मैं उनसे मिला तो मुझे बताया कि आपने जो कार्यवाही लिखी थी उसमें इतने शब्द उर्दू के आए थे। भविष्य में ध्यान रखना कि हिंदी के शब्दों को ही प्राथमिकता दी जाए । उनके उस निर्देश की मैंने पल्लू में गांठ बांध ली।
इस सब के उपरांत नियति के समक्ष हमको झुकना ही पड़ता है। शरीर का एक दिन अंत होना निश्चित है। इस शाश्वत सत्य को हम अटल मानकर स्वीकार करते हैं । फिर भी आज उनका अभाव रह रहकर बहुत कुछ सोचने, समझने, बोलने के लिए प्रेरित कर रहा है। निश्चित रूप से ऐसे महान लेखक और विद्वान को खोकर बहुत अधिक पीड़ा हो रही है। उनका लेखन, उनका चिंतन और हिंदुत्व के प्रति उनका समर्पण हम सबके लिए सदा अनुकरणीय रहेगा। आज इतिहास का एक उद्भट प्रस्तोता, महान विद्वान और महान लेखक स्वयं ही एक ‘इतिहास’ बन गया है। त्यागी जी ने इतिहास को कभी मृत समाधि नहीं बनने दिया बल्कि उसे जीवंत बनाए रखकर हमारे समक्ष प्रस्तुत करने में सफलता प्राप्त की। हमारा भी फर्ज है कि हम उनके विचारों को इतिहास की समाधि में विलीन ना होने दें, बल्कि उसे प्रेरणा लेकर भारतीय इतिहास के द्वारा लेकर जाने के परिश्रम को आगे बढ़ाएं। उनके प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विद्वता ,तप, त्याग और हिंदुत्व की सेवा की प्रतिमूर्ति त्यागी जी को समस्त ‘उगता भारत’ परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
orisbet giriş
orisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
milanobet giriş
hiltonbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hititbet
hititbet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino
vdcasino
hititbet
hititbet
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
betmarino
betmarino
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
celtabet giriş
celtabet giriş