Categories
आओ कुछ जाने

हिंदू परिवारों में धार्मिक अनुष्ठानों के समय पीर मजारों की जय का आखिर औचित्य क्या है?

मेरे एक परिचित के यहां हवन यज्ञ का कार्यक्रम था जिसमें मुझे भी आमंत्रित किया गया था। हवन यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात पंडित जी ने बोलना प्रारंभ किया “सत्य सनातन धर्म की जय हो, प्राणियों में सद्भावना हो,विश्व का कल्याण हो,गौ माता की जय हो,गौ हत्या बंद हो, यहां तक तो सामान्य था परंतु अंत में पंडित जी ने बोला पीर महाराज की जय हो अब मेरे कान खड़े हो गए मैं सोचने लगा कि हमारे धार्मिक यज्ञ हवन या किसी कर्मकाण्ड में पीर महाराज की जय का क्या औचित्य है मेरा मस्तिष्क गर्म होने लगा सभी पुरुष महिलाएं प्रसाद लेकर अपने अपने घर के लिए प्रस्थान कर गए अर्धांगिनी ने चलने के लिए बोला तो मैंने उन्हें अपने मन की पीड़ा बताई अर्धांगिनी बोली कि जब इन लोगों को कोई आपत्ति नहीं तो आप क्यों इनके कार्य में विघ्न डाल रहे हो मैंने कहा आज पंडित जी से बात किए बिना नहीं जाउंगा और मैं कुपित मन से पंडित जी के समापन अर्थात फ्री होने की प्रतीक्षा करने लगा।

 

अन्ततः पंडित जी जब फ्री हुए तो मैंने प्रश्न किया कि पंडित जी ये कर्मकाण्ड आप किसके यहां ओर किस परपज से करा रहे हैं मेरा प्रश्न सुनते ही पंडित जी हड़बड़ा गये सबकुछ बलि प्रकार समापन के उपरांत उन्हें ऐसे प्रश्न की आशा नहीं थी वो बोले कि अपने यजमान चौधरी साहब के घर की शुद्धि और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहे इसलिए इस यज्ञ का आयोजन किया गया है। अब मेरा प्रश्न था कि सनातन धर्म में ये पीर महाराज कौन है?? वो बोले कि इस चौधरी साहब सहित क्षेत्र में हिंदू लोग होली दीपावली पर पीर महाराज को पूजते हैं इसलिए मैं पीर महाराज की जय बोलता हूं आपके यजमान तो हिंदू हैं और पीर का मतलब एक कब्र में गड़े मुर्दे की मजार होता है एक ओर आप घर की शुद्धि के लिए यज्ञ करा रहे हैं दूसरी ओर पीर को महाराज बोलकर उसकी जय बोलकर आप पीर यानि मुर्दे को इनके घर में आमंत्रित कर रहे हैं चूंकि ये लोग अनजाने में पीर को पूजते आप रहे हैं और आप सत्य सनातन हिन्दू धर्म के प्रचार-प्रसार का काम करते हैं तो फिर आपको अनजान हिंदुओं का उचित मार्गदर्शन करना चाहिए जबकि आप स्वयं ही हिंदुओं को दिग्भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं। अन्ततः पंडित जी ने अपनी त्रुटि स्वीकार की ओर आगे से ऐसा न करने का आश्वासन दिया।
काफी बार हम अपने समक्ष हो रहे ग़लत कार्यों से मुंह मोड़कर निकल जाते हैं कि मैं क्यों पंगा लूं कोई और देखेगा बस यही हमारी कमी होती है कि हम गलत कार्य के विरुद्ध आवाज उठाने से डरते हैं। जबकि एक बार विरोध करने से ही कई बार परिणाम बदल जाते हैं। वही पंडित जी लगभग एक साल उपरांत पुनः उसी घर में हवन यज्ञ के लिए पधारे संयोगवश मुझे भी जाना पड़ा अबकी बार मैं सबसे पीछे कोने में बैठकर पूर्णाहुति के पश्चात होने वाले जयकारे नाद और पंडित जी के पीर महाराज की जय बोलने की प्रतीक्षा करने लगा परंतु इस बार पंडित जी ने पीर महाराज को नहीं बुलाया जो मुझे बहुत अच्छा लगा कि कम से कम मेरे एक बार टोकने मात्र से हिंदू संस्कारों कर्मकाण्डों में पीर का अस्तित्व समाप्त हो गया मैंने पंडित जी का आभार व्यक्त किया और प्रणाम कर अपने गंतव्य को लौट आया।

विष्णु दत्त शर्मा
बागपत।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
orisbet giriş
orisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
milanobet giriş
hiltonbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino giriş
betbox giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hititbet
hititbet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş